राज्यसभा में राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी के भीतर और बाहर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस फैसले ने पार्टी की कार्यप्रणाली, आंतरिक लोकतंत्र और नेतृत्व की शैली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Raghav Chadha : राज्यसभा में राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी के भीतर और बाहर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस फैसले ने पार्टी की कार्यप्रणाली, आंतरिक लोकतंत्र और नेतृत्व की शैली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने राघव चड्ढा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने संसद में आम लोगों से जुड़े मुद्दों को उतनी मजबूती से नहीं उठाया, जितनी उनसे अपेक्षा की जाती थी। साथ ही उन पर भाजपा सरकार से सीधे सवाल करने से बचने और पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने के आरोप भी लगे हैं।
इसी बीच आम आदमी पार्टी के पूर्व संस्थापक सदस्य और हिंदी जगत के चर्चित कवि कुमार विश्वास का एक पुराना बयान फिर से चर्चा में आ गया है। करीब डेढ़ साल पहले एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने संकेतों में कहा था कि पार्टी के भीतर अगला निशाना वही युवा नेता हो सकता है, जिसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने तंज भरे अंदाज में यह भी कहा था कि किसी चर्चित अभिनेत्री से शादी के बाद उसकी चमक और ज्यादा बढ़ गई है, और यही बात पार्टी नेतृत्व को असहज कर सकती है। कुमार विश्वास ने उस बातचीत में दावा किया था कि शादी के समय ही उन्हें लग गया था कि अब उस नेता के खिलाफ कार्रवाई तय है। उनका कहना था कि जिस नेतृत्व को अपने आसपास किसी दूसरे चेहरे की बढ़ती पहचान मंजूर नहीं होती, वह ऐसे लोगों को ज्यादा दिन तक आगे नहीं बढ़ने देता। इस बयान को अब राघव चड्ढा से जोड़कर देखा जा रहा है, इसलिए यह एक बार फिर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। बता दें कि कुमार विश्वास कभी आम आदमी पार्टी के प्रमुख संस्थापक चेहरों में शामिल रहे थे। पार्टी के शुरुआती दौर में उनकी भूमिका अहम मानी जाती थी, लेकिन दिल्ली की सत्ता में आने के बाद उनका अरविंद केजरीवाल और शीर्ष नेतृत्व से मतभेद बढ़ता गया। धीरे-धीरे यह दूरी इतनी बढ़ी कि उन्होंने पार्टी से अलग राह चुन ली। तब से लेकर अब तक वह कई मंचों से आम आदमी पार्टी और उसके नेतृत्व पर तीखे हमले करते रहे हैं।
अपने खिलाफ उठे सवालों पर राघव चड्ढा ने भी खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने संसद में हमेशा जनता से जुड़े मुद्दे उठाए हैं और यदि आम लोगों की परेशानी सामने रखना गलत माना जा रहा है, तो यह गंभीर बात है। राघव ने कहा कि उन्होंने टोल प्लाजा पर वसूली, टैक्स का बोझ, खाने-पीने की चीजों में मिलावट, बैंक शुल्क और दूरसंचार कंपनियों द्वारा इनकमिंग कॉल रोकने जैसे कई मुद्दों को सदन में उठाया। राघव चड्ढा ने सवाल किया कि जनता के हित के मुद्दे उठाने से पार्टी को आखिर क्या नुकसान हुआ। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उन्हें फिलहाल खामोश जरूर कराया गया है, लेकिन वह हारे नहीं हैं। उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व पर सीधा संदेश माना जा रहा है।
इस पूरे विवाद पर भाजपा ने भी आम आदमी पार्टी को घेरने का मौका नहीं छोड़ा। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी अपने ही नेताओं से राघव चड्ढा के खिलाफ बयान दिलवा रही है। उनका कहना है कि अरविंद केजरीवाल बाहर से पार्टी को एकजुट दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि नेतृत्व आलोचना से डरता है और असहमति को दबाने में लगा है। राघव चड्ढा द्वारा इस कार्रवाई को सामान्य संगठनात्मक फैसला बताए जाने पर आम आदमी पार्टी ने भी पलटवार किया। पार्टी की ओर से सवाल उठाया गया कि अगर सब कुछ सामान्य है, तो फिर राघव देश और पार्टी से जुड़े अहम मुद्दों पर भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने से क्यों बचते रहे। पार्टी का संकेत साफ था कि मामला केवल पद परिवर्तन का नहीं, बल्कि राजनीतिक रुख और संगठनात्मक अनुशासन का भी है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस विवाद पर पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि किसी भी दल को संसद में अपना नेता या उपनेता बदलने का पूरा अधिकार होता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल समय-समय पर इस तरह के फैसले लेते रहते हैं और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। भगवंत मान ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह पहली बार चुनाव जीतकर आए थे, तब पार्टी ने किसी और को नेता बनाया था और बाद में जिम्मेदारी बदली गई। उन्होंने आगे कहा कि कई मौकों पर लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों को एकमत होकर फैसले लेने पड़ते हैं, चाहे वह सदन से बहिर्गमन हो या सरकार की नीतियों का विरोध। अगर कोई नेता ऐसे सामूहिक निर्णयों का समर्थन नहीं करता और पार्टी लाइन से अलग चलता है, तो उसे पार्टी व्हिप के खिलाफ माना जाता है। ऐसे में कार्रवाई होना स्वाभाविक है। Raghav Chadha