प्रसिद्ध कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने इन नियमों के खिलाफ खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा करते हुए खुद को अभागा सवर्ण बताया और व्यंग्यात्मक अंदाज में व्यवस्था पर सवाल उठाए।

UGC Controversy : उच्च शिक्षा आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए दिशा-निदेर्शों को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इसी कड़ी में प्रसिद्ध कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने इन नियमों के खिलाफ खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा करते हुए खुद को अभागा सवर्ण बताया और व्यंग्यात्मक अंदाज में व्यवस्था पर सवाल उठाए। कुमार विश्वास ने अपनी पोस्ट में दिवंगत कवि रमेश रंजन मिश्रा की कविता की कुछ पंक्तियाँ उद्धृत कीं। इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने अपनी असहमति दर्ज कराई और लिखा कि उनसे सब कुछ छीन लेने की बात कही जा रही है। पोस्ट के साथ उन्होंने #यूजीसी’’रोलबैक हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए नए नियमों को वापस लेने की मांग भी की।
यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की थीं। इनका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है। नियमों के तहत एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए विशेष समितियाँ, हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र स्थापित करना अनिवार्य किया गया है। हालांकि सरकार का कहना है कि ये कदम सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं, लेकिन कुछ वर्गों और संगठनों का मानना है कि इससे सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ अन्याय हो सकता है।
यूजीसी नियमों को लेकर विवाद उस समय और गहरा गया जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने विरोध स्वरूप अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सामान्य वर्ग की लगातार अनदेखी की जा रही है। साथ ही उन्होंने ब्राह्मण समाज के निर्वाचित प्रतिनिधियों से भी पद छोड़ने की अपील की। हालांकि सरकार ने उनके इस कदम को अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं और उन्हें शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
एक ओर सरकार इन नियमों को सामाजिक समानता की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर विरोध करने वाले इसे असंतुलित और भेदभावपूर्ण करार दे रहे हैं। कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया ने इस बहस को और तेज कर दिया है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।