इस खास दुश्मन के ऊपर कभी कविता नहीं लिखेंगे कुमार विश्वास
Kumar Vishwas
भारत
चेतना मंच
28 May 2025 11:24 PM
Kumar Vishwas : कुमार विश्वास भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया के प्रसिद्ध कवि हैं। कवि कुमार विश्वास ने राजनीति में भी हाथ आजमाया है। कुमार विश्वास की राजनीतिक पारी उनके दोस्त से दुश्मन बने अरविंद केजरीवाल के कारण असफलता के साथ समाप्त हो गई। कवि कुमार विश्वास के विषय में बहुत कुछ जानने वाले भी यह नहीं जानते कि कुमार विश्वास ने अपने एक खास दुश्मन के ऊपर कभी कविता नहीं लिखी है। कवि कुमार विश्वास इस दुश्मन के ऊपर आगे भी कभी कविता नहीं लिखना चाहते हैं। इस दुश्मन के ऊपर कविता ना लिखने का कुमार विश्वास का कारण भी खास है।
इस दुश्मन के ऊपर क्यों लिखूं कविता : कुमार विश्वास
भारत के एक सौ चालीस करोड़ नागरिकों की तरह से ही पाकिस्तान कुमार विश्वास का भी खास दुश्मन है। कुमार विश्वास पिछले 31 वर्षों से कविता लिख रहे हैं। इन 31 वर्षों में कुमार विश्वास ने पाकिस्तान के ऊपर एक भी कविता नहीं लिखी है। कुमार विश्वास भविष्य में भी पाकिस्तान के ऊपर कविता नहीं लिखना चाहते। कुमार विश्वास का कहना है कि कविता प्रेम का सच्चा चित्रण होती है। प्रेम के ऊपर लिखी गई कविता चिर स्थाई होती है। उनका कहना है कि सच्ची और अच्छी कविता हमेशा मौजूद रहती है। कुमार विश्वास आगे कहते हैं कि पाकिस्तान तो अस्थाई विषय है। वर्ष-1947 से पहले तो पाकिस्तान था ही नहीं। जो पाकिस्तान की हालत है उससे साफ जाहिर है कि भविष्य में पाकिस्तान रहेगा ही नहीं। वें कहते हैं कि ऐसे अस्थाई देश पाकिस्तान के लिए कविता लिखने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। वें यह भी कहते हैं कि पाकिस्तान जल्दी ही समाप्त हो जाएगा। समाप्त हो जाने वाले विषय पर कविता लिखने का कोई औचित्य ही नहीं है।
कौन हैं कुमार विश्वास? Who is Kumar Vishwas?
कुमार विश्वास एक प्रसिद्ध कवि हैं। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के पिलखुआ में 10 फरवरी 1970 को कुमार विश्वास का जन्म हुआ था। उन्होंने शुरूआती पढ़ाई पिलखुआ के लाला गंगा सहाय स्कूल से पूरी की। फिर राजपूताना रेजिमेंट इंटर कॉलेज से 12वीं पास की। इनके पिता चन्द्रपाल शर्मा चाहते थे कि बेटा इंजीनियर बनें, लेकिन कुमार विश्वास का इंजीनियरिंग की पढ़ाई में मन नहीं लगता था। क्योंकि वह कुछ अलग करना चाहते थे। इसलिए कुमार विश्वास ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और हिंदी साहित्य में 'स्वर्ण पदक' के साथ स्नातक की डिग्री प्राप्त की। फिर एमए करने के बाद कुमार विश्वास ने 'कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना' विषय पर पीएचडी की। साल 2001 में उनके इस शोधकार्य को पुरस्कृत भी किया गया था।
इस प्रकार बने कुमार विश्वास कवि
कुमार विश्वास के कवि बनने की काफी दिलचस्प कहानी है। दरअसल उनके पिता चन्द्रपाल शर्मा को पसंद नहीं था कि कुमार कवि बन जाएं। इस बारे में कुमार विश्वास ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वह एक बार कवि सम्मेलन से रात को घर पहुंचे, तो उनके पिता गुस्सा हो गए। गुस्से में उनके पिता ने कहा कि इनके लिए हलवा बनाओ, क्योंकि ये सीमा से लडक़र आए हैं। पिता की यह बात कुमार विश्वास को चुभ गई और उन्होंने ठान लिया कि अब इसी दिशा में वह अपना नाम बनाएंगे।
कुमार विश्वास बताते हैं कि शुरूआती दिनों में जब वह कवि सम्मेलनों से देर से वापस लौटते थे, तो पैसे बचाने के लिए वह ट्रक वालों से लिफ्ट लिया करते थे। उन्होंने बताया कि उस दौरान कोई भी यह सोच नहीं सकता था कि एक दिन ऐसा भी होगा, जब कुमार विश्वास की कविता को टीवी शो के लिए लाखों रुपए मिलेंगे।
कुमार विश्वास का कहना है कि उनकी जिंदगी में 4 महिलाओं का अहम योगदान रहा है। वह चार महिलाओं में पहली उनकी मां जिनसे उन्होंने गाने का सलीका सीखा। दूसरी महिला कुमार विश्वास की बड़ी बहन, तीसरी महिला उनकी प्रेमिका जिसने उनको कवि बनाया और चौथी महिला कुमार विश्वास की पत्नी, जिन्होंने उनको एंटरप्रिन्योर बना दिया। बता दें कि फेमस हिंदी गीतकार गोपालदास नीरज ने उन्हें 'निशा-नियाम' की संज्ञा दी थी। तो वहीं धर्मवीर भारती ने कुमार को अपनी पीढ़ी का सबसे ज्यादा संभावनाओं वाला कवि कहा था।