
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के सियासी माहौल में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM बार-बार दरवाज़ा खटखटा रही है। उन्हें भली-भांति पता है कि लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव इंडी (INDIA) गठबंधन में उनकी पार्टी को शामिल करने के मूड में नहीं हैं, बावजूद इसके ओवैसी खत पर खत लिख रहे हैं। सवाल यही है—क्या यह सिर्फ दिखावे की कवायद है या इसके पीछे कोई गहरी रणनीति छिपी है? ओवैसी की राजनीतिक सोच साफ है। अगर एनडीए 2025 में सत्ता में लौटता है, तो वे मुस्लिम मतदाताओं को यही संदेश देंगे कि “हमने तो हाथ बढ़ाया था, लेकिन लालू-तेजस्वी ने ही हमें किनारे कर दिया।” इस तरह पांच साल तक वे यह नैरेटिव कायम रख पाएंगे कि मुस्लिम हितों की अनदेखी विपक्षी गठबंधन ने खुद की। Bihar Assembly Election 2025
AIMIM के कार्यकर्ताओं ने हाल ही में लालू-राबड़ी आवास का रुख किया और नारों के साथ इंडी गठबंधन में जगह देने की मांग की। उनकी भाषा किसी निवेदन से कम और राजनीतिक चुनौती से अधिक लग रही थी। यह साफ इशारा है कि गठबंधन में एंट्री मिले या न मिले, ओवैसी की पार्टी माहौल बनाकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रहेगी। उधर कांग्रेस पहले ही पल्ला झाड़ चुकी है और पूरा फैसला राजद पर छोड़ दिया है। सवाल यही है कि ओवैसी यह जानते हुए भी क्यों बार-बार दरवाज़ा खटखटा रहे हैं?
AIMIM का कहना है कि अगर उन्हें बाहर रखा गया तो विपक्षी वोटों का बिखराव होगा और सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान का तर्क है— “बिहार की सियासत में एनडीए जैसी ताकतों को हराने के लिए सभी का एकजुट होना ज़रूरी है। अगर हम अलग रखे गए तो विरोधी वोट बंट जाएंगे और इसका सीधा असर चुनाव नतीजों पर पड़ेगा।
बिहार चुनाव 2020 इस सियासी हकीकत का सबसे बड़ा सबूत है। सीमांचल की पांच सीटों पर AIMIM की जीत ने महागठबंधन की पूरी रणनीति ध्वस्त कर दी थी। कई इलाकों में पार्टी ने राजद के पारंपरिक वोट बैंक को खींच लिया और इसका फायदा सीधे-सीधे एनडीए की झोली में गया। यही वजह है कि राजद आज भी ओवैसी को लेकर आशंकित है और उन्हें गठबंधन में शामिल करने से बचता है। खुद ओवैसी भी इस गणित से पूरी तरह वाकिफ़ हैं। उन्हें मालूम है कि महागठबंधन के दरवाज़े शायद ही उनके लिए खुलें, लेकिन खतों की बरसात और तीखे बयानों से वे एक नई सियासी पटकथा रच रहे हैं। दरअसल, यह दांव ऐसा है कि चुनावी हार भी उन्हें हाशिए पर नहीं धकेलेगी, बल्कि उन्हें यह कहने का मौका देगी—“हम तो साथ आने को तैयार थे, मगर दरवाज़ा दूसरों ने बंद कर दिया। Bihar Assembly Election 2025