
वैसे तो देश के कई राज्यों में लम्पी वायरस का जबरदस्त प्रकोप है। लेकिन, राजस्थान इससे सबसे अधिक प्रभावित है। सरकार भी गोवंश को होने वाली इस बीमारी से चिंतित है और वह इससे गोवंश को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। इसके साथ ही तमाम समाजसेवी और चिकित्सक भी अपने स्तर से इस बीमारी से चल रहे संघर्ष में शामिल हैं। इन्हीं में से एक हैं रविन्द्र प्रताप सिंह। वह लम्पी वायरस से जूझ रहे गोवंश की मदद को आगे आए हैं।
चेतना मंच के साथ खास बातचीत के दौरान समाजसेवी रविन्द्र प्रताप सिंह कहते हैं कि उनकी कोई संस्था नहीं है। वह किसी संस्था के साथ काम नहीं करते हैं। वह व्यक्तिगत रूप से पीड़ित व्यक्ति और पशुओं की सेवा करने का काम करते हैं। इसी में उन्हें आत्मिक सुख मिलता है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में इन दिनों लम्पी वायरस का जबरदस्त प्रकोप है। इसकी चपेट में आकर अब तक हजारों गोवंश की मौत हो चुकी है। इससे वे बेहद द्रवित हुए। उन्होंने इस महामारी से गोवंश को निजात दिलाने के लिए कोशिशें शुरू की हैं।
समाजसेवी रविन्द्र प्रताप सिंह बताते हैं कि अब तक वह 10 हजार गोवंश का इलाज कर उन्हें लम्पी वायरस के चंगुल से मुक्त करा चुके हैं। इसके लिए वे होम्योपैथी दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने बताया कि पावापुरी, नंदगांव और भाग्यवंती समेत लगभग सात गोशालाओं में लम्पी वायरस से पीड़ित गोवंश का इलाज कर चुके हैं। उनके इलाज से अब तक 10 हजार से अधिक गोवंश इस बीमारी से मुक्त हो चुकी हैं। उन्हांेने बताया कि गुजरात के अहमदाबाद स्थित नमो नमः ट्रस्ट उन्हें निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराता है। यह दवा मांग के अनुरूप उन्हें मिलती है। आबू रोड और आसपास के इलाके से सूचना मिलने पर वह गोवंश का इलाज करने जाते हैं। दूसरी गायों को भी प्रिवेंटिव मेडिसिन देते हैं, जिससे वे इस वायरस की चपेट में आने से बच सकें। लम्पी वायरस से पीड़ित गोवंश को नाक के रास्ते दवा दी जाती है, जबकि प्रिवेंटिव मेडिसिन पानी में खोलकर पिलाई जाती है। वह बताते हैं कि उनकी दवा का सक्सेस रेट 90 फीसदी है, यानि 100 बीमार गोवंश में से 90 स्वस्थ हो जाती हैं और इसमें सिर्फ तीन दिन का वक्त लगता है। गोवंश के इलाज के अलावा गोशालाओं और आसपास के क्षेत्रों में होम्योपैथी दवाओं का छिड़काव किया जाता है, जिससे दूसरे गोवंश को वायरस से सुरक्षा प्रदान की जा सके।