
Mahakal Corridor : मध्य प्रदेश के उज्जैन में देश का पहला नाइट गार्डन तैयार किया जा रहा है। महाकाल कॉरिडोर के नाम से बनाया जा रहा यह धार्मिक नाइट गार्डन होगा, जो 20 हेक्टेयर में तैयार किया जा रहा है। आगामी 11 अक्टूबर को पीएम नरेंद्र मोदी इसका लोकार्पण करेंगे। इसे भोलेनाथ, माता पार्वती, देवी दुर्गा और पौराणिक धार्मिक कथाओं से जुड़ी लगभग 200 प्रतिमाएं यहां पर स्थापित की गई है। इसके साथ ही भित्ति चित्र से भी इसे सजाया गया है। यह प्रोजेक्ट में 793 करोड़ का है।
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इस प्रोजेक्ट का पहला चरण पूरा होने वाला है। इस प्रोजेक्ट के लिए जहां मध्य प्रदेश सरकार 421 करोड रूपये खर्च कर रही है, वहीं केंद्र सरकार 271 करोड़ रूपये दिए है। इस प्रोजेक्ट के लिए फ्रांस सरकार ने 80 करोड़ और महाकाल मंदिर समिति ने 21 करोड़ रूपये दिए है।
आपको बता दें कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने इस प्रोजेक्ट को बनाया था। उस वक्त कमलनाथ सरकार ने 300 करोड़ रूपये की योजना बनाई थी। लेकिन 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद शिवराज सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर नए सिरे से काम शुरू किया। इस प्रोजेक्ट के लिए मंत्रियों की त्रिस्तरीय सदस्यीय समिति भी बनाई गई है।
अपने उज्जैन प्रवास के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाकाल कॉरिडोर देश का पहला ऐसा धार्मिक स्थल होगा, जो पौराणिक सरोवर रुद्रसागर के किनारे विकसित हो रहा है। करीब 200 देवी देवताओं की प्रतिमाओं से सुसज्जित इस पार्क श्रद्धालु शिव की अनसुनी कथाएं इनसे जानेंगे। सप्त ऋषि, नवग्रह मंडल, त्रिपुरासुर वध, कमल ताल में विराजित शिव, 108 स्तम्भों में शिव के आनंद तांडव, शिव स्तम्भ, भव्य प्रवेश द्वार पर विराजित नंदी की विशाल प्रतिमाएं हैं। यहां देश का पहला नाइट गार्डन भी बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि 793 करोड़ रुपए के इस विस्तार प्रोजेक्ट के पहले चरण के कामों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसमें महाकाल पथ, महाकाल वाटिका, रुद्रसागर तालाब के किनारे का विकास शामिल है। इसका प्रोजेक्ट यह फायदा होगा कि उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को महाकाल के दर्शन आसान होंगे और दर्शन के साथ लोग धार्मिक पर्यटन भी कर पाएंगे। यहां पर यात्रियों में घूमने, ठहरने, आराम करने से लेकर तमाम सुविधाएं मौजूद होंगी।
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महाकाल प्रोजेक्ट के दौरान आठ महीने बाद उज्जैन में बदलाव की एक और बड़ी तस्वीर सामने आई है। यहां महाकाल पथ से सटा हुआ रुद्रसागर तालाब निखर उठा है। आठ महीने पहले तक यहां इतनी जलकुंभी थी कि पानी ढूंढना मुश्किल था। तालाब को साफ-सुथरा बनाने के लिए 40 लोगों ने डेढ़ महीने जलकुंभी हटाने के लिए दिन-रात एक कर दिए। 2016 के सिंहस्थ के बाद पहली बार इस तालाब पर फोकस किया गया।
आपको बता दें कि उज्जैन के महाकाल कॉरिडोर का आकार काशी विश्वनाथ मंदिर से बड़ा है। कॉरिडोर में शिव तांडव स्त्रोत, शिव विवाह, महाकालेश्वर वाटिका, महाकालेश्वर मार्ग, शिव अवतार वाटिका, प्रवचन हॉल, नूतन स्कूल परिसर, गणेश विद्यालय परिसर, रूद्रसागर तट विकास, अर्ध पथ क्षेत्र, धर्मशाला और पार्किंग सर्विसेस भी तैयार किया जा रहा है। परिसर में ई-रिक्शा के माध्यम से उन श्रद्धालुओं का आवागमन कराया जाएगा, जिन्हें चलने में दिक्कत होगी। प्रसाद आदि खरीदने के लिए परिसर में ही दुकानें भी रहेंगी।
अगर भारत में तीर्थ पर्यटन पर गौर करें, तो पिछले कुछ साल में इस ओर काफी विकास किया जा रहा है। हृदय” योजना, प्रसाद, धार्मिक सर्किट जैसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। दरअसल इसका कारण यह है कि भारत में पर्यटन का आकार काफी बड़ा है। पर्यटन एक उद्योग जगत का रूप ले चुका है, भारत में यात्रा व पर्यटन उद्योग करीब 10 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर रहा है एवं देश के कुल रोजगार में पर्यटन उद्योग की 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।