रामनवमी छुट्टी पर सस्पेंस खत्म, जानिए स्कूल बंद होने की सही तारीख

चैत्र नवरात्रि के समापन के साथ भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी को लेकर देशभर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। हालांकि वर्ष 2026 में रामनवमी की तिथि को लेकर बने मतभेद की वजह से अलग-अलग राज्यों में अवकाश की तारीखें भी अलग तय की गई हैं।

रामनवमी छुट्टी पर बड़ी अपडेट
रामनवमी छुट्टी पर बड़ी अपडेट
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar26 Mar 2026 11:18 AM
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Ram Navami 2026 : चैत्र नवरात्रि के समापन के साथ भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी को लेकर देशभर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। हालांकि वर्ष 2026 में रामनवमी की तिथि को लेकर बने मतभेद की वजह से अलग-अलग राज्यों में अवकाश की तारीखें भी अलग तय की गई हैं। यही कारण है कि कहीं 26 मार्च को छुट्टी घोषित की गई है तो कहीं 27 मार्च को स्कूल और सरकारी दफ्तर बंद रखने का फैसला लिया गया है। हिंदू पंचांग के मुताबिक नवमी तिथि 26 मार्च की सुबह से प्रारंभ होकर 27 मार्च की सुबह तक प्रभावी रहेगी। इसी आधार पर कई राज्यों ने उदया तिथि, धार्मिक परंपरा और स्थानीय मान्यता को ध्यान में रखते हुए अवकाश का निर्धारण किया है। ऐसे में छात्रों, अभिभावकों और कर्मचारियों के बीच यह जानने की उत्सुकता बनी हुई है कि आखिर उनके राज्य में रामनवमी की छुट्टी किस दिन रहेगी।

रामनवमी की छुट्टी किस दिन है?

देश के अलग-अलग राज्यों ने अपने-अपने प्रशासनिक और धार्मिक आधार पर अवकाश घोषित किया है। कुछ राज्यों में 26 मार्च को मुख्य अवकाश रखा गया है, जबकि कुछ राज्यों में 27 मार्च को छुट्टी दी गई है। उत्तर प्रदेश इस मामले में सबसे अलग नजर आ रहा है, जहां सरकार ने दो दिनों का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है।

उत्तर प्रदेश में दो दिन की छुट्टी

उत्तर प्रदेश सरकार ने रामनवमी को लेकर बड़ा निर्णय लेते हुए 26 और 27 मार्च, दोनों दिन सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। खास बात यह है कि 28 मार्च को चौथा शनिवार और 29 मार्च को रविवार पड़ रहा है, जिससे प्रदेश के छात्रों और सरकारी कर्मचारियों को लगातार चार दिन का लंबा अवकाश मिल रहा है।

आज किन राज्यों में बंद हैं स्कूल?

दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड जैसे राज्यों में 26 मार्च को रामनवमी का प्रमुख अवकाश माना गया है। इन राज्यों में सरकारी स्कूलों के साथ-साथ अधिकांश निजी शिक्षण संस्थान भी बंद हैं। हालांकि कुछ निजी स्कूलों ने स्थानीय परिस्थितियों और अपने प्रबंधन के आधार पर अलग निर्णय लिया है। ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे स्कूल के आधिकारिक नोटिस पर ही भरोसा करें। बिहार, ओडिशा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में 27 मार्च को रामनवमी का अवकाश रखा गया है। बिहार के शिक्षा विभाग के अवकाश कैलेंडर के अनुसार सरकारी स्कूलों में 27 मार्च को छुट्टी निर्धारित है। वहीं वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले समुदाय और ISKCON से जुड़े कई संस्थानों में भी 27 मार्च को ही राम जन्मोत्सव मनाया जाएगा, जिसके चलते वहां अगले दिन अवकाश रहेगा।

पश्चिम और दक्षिण भारत में अलग तस्वीर

महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में रामनवमी को लेकर अवकाश व्यवस्था एक समान नहीं है। महाराष्ट्र के कुछ बड़े शहरों, जैसे मुंबई और नागपुर में 26 मार्च को स्कूलों और बैंकों में छुट्टी देखी जा रही है। दूसरी ओर गुजरात और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में इसे वैकल्पिक अवकाश के रूप में रखा गया है। वहीं तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में सामान्यतः रामनवमी पर स्कूल बंद नहीं किए जाते और शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य रूप से चलती रहती हैं। Ram Navami 2026

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दुनिया के सबसे पसंदीदा नेता बने पीएम मोदी, ग्लोबल सर्वे में फिर मारी बाजी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता ने एक बार फिर विश्व मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। अमेरिका की जानी-मानी डेटा एनालिटिक्स संस्था मॉर्निंग कंसल्ट के ताजा वैश्विक सर्वे में पीएम मोदी 68 फीसदी अप्रूवल रेटिंग के साथ दुनिया के सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता बनकर उभरे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar26 Mar 2026 09:32 AM
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PM Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता ने एक बार फिर विश्व मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। अमेरिका की जानी-मानी डेटा एनालिटिक्स संस्था मॉर्निंग कंसल्ट के ताजा वैश्विक सर्वे में पीएम मोदी 68 फीसदी अप्रूवल रेटिंग के साथ दुनिया के सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता बनकर उभरे हैं। यह सर्वे 2 से 8 मार्च 2026 के बीच जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें विभिन्न देशों के वयस्क नागरिकों की राय को सात दिनों के मूविंग एवरेज के रूप में शामिल किया गया। इस ताजा रिपोर्ट ने न केवल मोदी की घरेलू सियासी पकड़ को रेखांकित किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी स्वीकार्यता और प्रभाव लगातार मजबूत हो रहा है।

पीएम मोदी 68% अप्रूवल के साथ शीर्ष पर

रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल घरेलू राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ी है। यही वजह है कि वे एक बार फिर इस वैश्विक सूची में सबसे आगे दिखाई दिए। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग 62 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे। अगर अन्य बड़े नेताओं की बात करें तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 39 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग मिली, जो पीएम मोदी से काफी पीछे है। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को 24 प्रतिशत समर्थन मिला। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों केवल 17 प्रतिशत अप्रूवल के साथ सूची के निचले हिस्से में रहे, जबकि उनके खिलाफ 75 प्रतिशत डिसअप्रूवल दर्ज किया गया।

लोकप्रियता के साथ रिकॉर्ड भी बना रहे हैं पीएम मोदी

सर्वे यह भी बताता है कि प्रधानमंत्री मोदी की नेट अप्रूवल रेटिंग भी मजबूत बनी हुई है। उनके खिलाफ असहमति जताने वालों का प्रतिशत 26 रहा, जो कई अन्य वैश्विक नेताओं की तुलना में कम है। इससे साफ संकेत मिलता है कि मोदी की जनस्वीकृति अभी भी मजबूत आधार पर टिकी हुई है। इससे पहले जुलाई 2025 में जारी मॉर्निंग कंसल्ट की रिपोर्ट में भी पीएम मोदी 75 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग के साथ सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता रहे थे। राजनीतिक उपलब्धियों के लिहाज से भी प्रधानमंत्री मोदी का दौर रिकॉर्ड दर्ज कर रहा है। 25 जुलाई 2025 को उन्होंने लगातार कार्यकाल के मामले में इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ दिया और भारत के दूसरे सबसे लंबे समय तक बिना रुकावट प्रधानमंत्री पद संभालने वाले नेता बन गए। इस सूची में अब उनसे आगे केवल पंडित जवाहरलाल नेहरू हैं। PM Modi

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पीएनजी कनेक्शन पर सरकार की बड़ी राहत : 500 तक मुफ्त गैस, सिक्योरिटी चार्ज पूरी तरह खत्म

देश में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से नई सुविधाओं का ऐलान किया गया है, जिससे अब कनेक्शन लेना पहले से कहीं ज्यादा आसान और सस्ता हो जाएगा।

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पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG)
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar25 Mar 2026 06:34 PM
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PNG Connection : देश में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से नई सुविधाओं का ऐलान किया गया है, जिससे अब कनेक्शन लेना पहले से कहीं ज्यादा आसान और सस्ता हो जाएगा। इस पहल से खासतौर पर शहरी क्षेत्रों के लाखों उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। नई व्यवस्था के तहत पीएनजी कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को शुरुआत में 500 तक की गैस मुफ्त दी जाएगी। इसका मकसद लोगों को पीएनजी इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे पारंपरिक एलपीजी सिलेंडर से हटकर पाइप्ड गैस को अपनाएं।

सिक्योरिटी फीस पूरी तरह माफ

सरकार ने एक और बड़ी राहत देते हुए पीएनजी कनेक्शन पर लगने वाला सिक्योरिटी चार्ज भी खत्म कर दिया है। पहले कनेक्शन लेने के दौरान उपभोक्ताओं को अतिरिक्त राशि जमा करनी पड़ती थी, लेकिन अब इस फैसले के बाद शुरुआती खर्च लगभग शून्य हो जाएगा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहरों में पीएनजी नेटवर्क का विस्तार करना है। सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा घरों तक पाइप्ड गैस पहुंचे, जिससे ईंधन की आपूर्ति आसान और सुरक्षित हो सके।

एलपीजी से पीएनजी की ओर बदलाव की कोशिश

सरकार लंबे समय से एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है। पीएनजी न केवल सुविधाजनक है, बल्कि यह लगातार सप्लाई देता है और सिलेंडर बुकिंग या डिलीवरी की झंझट भी खत्म करता है। इसके अलावा, पाइप्ड गैस को ज्यादा सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है।

पर्यावरण और खर्च दोनों में राहत

पीएनजी को क्लीन फ्यूल माना जाता है, जिससे प्रदूषण में कमी आती है। इसके साथ ही यह अक्सर एलपीजी के मुकाबले किफायती भी साबित होता है, जिससे उपभोक्ताओं के मासिक खर्च में कमी आ सकती है। नए पीएनजी कनेक्शन लेने वाले घरेलू उपभोक्ता और शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के निवासी व वे लोग जो पहली बार पाइप्ड गैस का उपयोग शुरू करेंगे उन्हें फायदा होगा। सरकार की यह पहल आम लोगों के लिए दोहरी राहत लेकर आई है एक तरफ शुरूआती खर्च में कमी और दूसरी तरफ सुरक्षित व निरंतर गैस सप्लाई। अगर यह योजना बड़े स्तर पर लागू होती है, तो आने वाले समय में देश के ऊर्जा उपयोग के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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