कैसे चुने जाते हैं राज्यसभा सदस्य? यहां समझें पूरा फॉर्मूला
राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए 16 मार्च को 10 राज्यों की 37 सीटों पर मतदान होगा। राज्यसभा में सदस्य बनने की न्यूनतम उम्र 30 साल है और केवल राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य और केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचक मंडल वोटिंग में हिस्सा लेते हैं। चुनाव में जीतने के लिए एक खास फॉर्मूला लागू होता है।

भारत की संसद का उच्च सदन राज्यसभा हर दो साल में अपने सदस्यों का एक तिहाई हिस्सा बदलती है। 16 मार्च को 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए मतदान होगा। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 साल का होता है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार कुल अधिकतम सदस्य 250 हो सकते हैं। इनमें से 238 निर्वाचित होते हैं और 12 को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।
सदस्य बनने की योग्यताएं
राज्यसभा के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 30 साल है। चुनाव के लिए पात्र उम्मीदवार वही हैं जिनकी सीट का कार्यकाल पूरा हो रहा है। देश के पांच राज्यों में विधान परिषद है लेकिन उनके सदस्य राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकते। राज्यसभा सदस्य केवल राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचक मंडलों द्वारा चुने जाते हैं।
वोटिंग का फॉर्मूला
राज्यसभा में किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए आवश्यक न्यूनतम वोट की गणना एक खास फॉर्मूले के अनुसार की जाती है। इसमें सबसे पहले विधानसभा के कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है और राज्य की कुल राज्यसभा सीटों में एक जोड़कर भाग दिया जाता है। इसके बाद 1 और जोड़कर जो संख्या आती है वह उम्मीदवार को जीतने के लिए आवश्यक न्यूनतम वोट होती है।
मतगणना की प्रक्रिया
यदि किसी उम्मीदवार को पहली वरीयता के आधार पर सबसे अधिक वोट मिले लेकिन वह फॉर्मूले द्वारा तय न्यूनतम संख्या तक नहीं पहुंचता तो दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती की जाती है। फिर भी यदि आवश्यक संख्या पूरी नहीं होती तो तीसरी और चौथी वरीयता के वोटों की गिनती की जाती है। इस तरह यह सुनिश्चित किया जाता है कि जीतने वाला उम्मीदवार विधिक रूप से आवश्यक समर्थन प्राप्त करे।
मतदान का समय और प्रक्रिया
16 मार्च को मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे से शुरू होगी। इस बार जिन राज्यों की सीटें खाली हो रही हैं, उनमें महाराष्ट्र (7), तमिलनाडु (6), पश्चिम बंगाल (5), बिहार (5), ओडिशा (4), असम (3), तेलंगाना (2), छत्तीसगढ़ (2), हरियाणा (2) और हिमाचल प्रदेश (1) शामिल हैं।
भारत की संसद का उच्च सदन राज्यसभा हर दो साल में अपने सदस्यों का एक तिहाई हिस्सा बदलती है। 16 मार्च को 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए मतदान होगा। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 साल का होता है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार कुल अधिकतम सदस्य 250 हो सकते हैं। इनमें से 238 निर्वाचित होते हैं और 12 को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।
सदस्य बनने की योग्यताएं
राज्यसभा के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 30 साल है। चुनाव के लिए पात्र उम्मीदवार वही हैं जिनकी सीट का कार्यकाल पूरा हो रहा है। देश के पांच राज्यों में विधान परिषद है लेकिन उनके सदस्य राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकते। राज्यसभा सदस्य केवल राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचक मंडलों द्वारा चुने जाते हैं।
वोटिंग का फॉर्मूला
राज्यसभा में किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए आवश्यक न्यूनतम वोट की गणना एक खास फॉर्मूले के अनुसार की जाती है। इसमें सबसे पहले विधानसभा के कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है और राज्य की कुल राज्यसभा सीटों में एक जोड़कर भाग दिया जाता है। इसके बाद 1 और जोड़कर जो संख्या आती है वह उम्मीदवार को जीतने के लिए आवश्यक न्यूनतम वोट होती है।
मतगणना की प्रक्रिया
यदि किसी उम्मीदवार को पहली वरीयता के आधार पर सबसे अधिक वोट मिले लेकिन वह फॉर्मूले द्वारा तय न्यूनतम संख्या तक नहीं पहुंचता तो दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती की जाती है। फिर भी यदि आवश्यक संख्या पूरी नहीं होती तो तीसरी और चौथी वरीयता के वोटों की गिनती की जाती है। इस तरह यह सुनिश्चित किया जाता है कि जीतने वाला उम्मीदवार विधिक रूप से आवश्यक समर्थन प्राप्त करे।
मतदान का समय और प्रक्रिया
16 मार्च को मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे से शुरू होगी। इस बार जिन राज्यों की सीटें खाली हो रही हैं, उनमें महाराष्ट्र (7), तमिलनाडु (6), पश्चिम बंगाल (5), बिहार (5), ओडिशा (4), असम (3), तेलंगाना (2), छत्तीसगढ़ (2), हरियाणा (2) और हिमाचल प्रदेश (1) शामिल हैं।












