Maharashtra News : ईडी(ED) ने अदालत से कहा, सक्रिय साजिशकर्ता हैं संजय राउत
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 01:36 PM
Maharashtra News : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोर्ट में दायर रिमांड आवेदन में शिवसेना नेता संजय राउत को सक्रिय साजिशकर्ता होने का दावा किया है। 1,039 करोड़ 79 लाख रुपये के पात्रा चॉल पुनर्विकास घोटाले में गिरफ्तार सांसद संजय राउत चार अगस्त तक (ईडी) की हिरासत में हैं। इस घोटाले में पहले से गिरफ्तार प्रवीण राउत को संजय राउत का ‘फ्रंटमैन’ करार दिया गया है। ईडी अब प्रवीण और संजय राउत को आमने-सामने बैठकर पूछताछ कर सकता है। इसी मामले में ईडी ने मुंबई में दो ठिकानों पर छापेमारी की है।
शिवसेना सांसद संजय राउत के करीबी होने के कारण प्रवीण को महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएचएडीए) से जरूरी मंजूरी मिली। ईडी का दावा है कि अब तक की जांच से पता चला है कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवीण द्वारा अवैध रूप से प्राप्त 112 करोड़ रुपये में से एक करोड़ 6 लाख रुपये सीधे संजय राउत और उनके परिवार को दिए गए। यह भी दावा किया है कि यह राशि और अधिक हो सकती है।
ईडी ने अदालत में कहा कि प्रवीण राउत ने कई बार संजय राउत के परिवार के देश-विदेश में मनाई छुट्टियों का पूरा खर्च उठाया था। हालांकि, संजय राउत ने अदालत में कहा कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई विशुद्ध रूप से राजनीतिक बदला है। हालांकि ईडी की जांच में सामने आया है कि एमएचएडीए की जमीन की एफएसआई को अनधिकृत तरीके से लेने के बाद गुरु आशीष कंपनी ने तेजी से इसे 16 अन्य बिल्डर्स को बेचा। प्रवीण राउत इसी कंपनी में एक डायरेक्टर थे। इससे गुरु आशीष कंपनी को एक बड़ा आर्थिक मुनाफा हुआ। हालांकि, यह प्रोजेक्ट अभी तक सिर्फ 10 प्रतिशत ही तैयार हुआ है। इसे पूरा करने के लिए गुरु आशीष कंपनी को एक बड़ा अमाउंट चाहिए, लेकिन वह अब दिवालिया घोषित होने की प्रक्रिया में है।
ईडी के मुताबिक, पात्रा चॉल में रहने वालों ने एमएचएडीए और गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ ट्रिपल एग्रीमेंट किया था। इस एग्रीमेंट में गुरु आशीष कंपनी के डायरेक्टर प्रवीण राउत की महत्वपूर्ण भूमिका थी। ओरिजिनल एग्रीमेंट यह कहता है कि गुरु आशीष कंपनी एमएचएडीए की किसी भी जमीन को किसी थर्ड पार्टी को नहीं बेच सकती। इसके बावजूद जमीन को धोखे से बेचा गया। इसके बदले में एचडीआईएल (हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड) से प्रवीण राउत को 2010-2011 में 112 करोड़ रुपये मिले। अवैध ढंग से पैसे लेने के बाद इसे पात्रा चॉल परियोजना में निवेश करने के बजाय, मेसर्स गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड ने पैसा निकाल लिया। खास यह है कि प्रवीण राउत ने परियोजना में कोई पैसा निवेश नहीं किया था।
ईडी ने दावा किया है कि पीएमएलए मामले की जांच के दौरान यह पता चला है कि संजय राउत, प्रवीण राउत, राकेश कुमार वधावन और सारंग वधावन ने मिलकर साजिश रची। चारों ने इस परियोजना को पूरा किए बिना 672 परिवारों के भविष्य को खतरे में डाला और पैसे निकालने की साजिश की।
112 करोड़ को आगे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इनमें से कुछ पैसों को डायवर्ट कर उससे कई प्रॉपर्टीज खरीदी गईं। इसी मामले में 5 अप्रैल 2022 को प्रवीण राउत, वर्षा राउत (संजय राउत की पत्नी), स्वप्ना पाटकर के नाम पर दर्ज 11 करोड़ 51 लाख 56 हजार 573 रुपये की संपत्ति कुर्क की गई थी। इन सभी ने किरायेदारों, एमएचएडीए और बिल्डरों (जिन्होंने एफएसआई खरीदा था) को बड़ा धोखा दिया। अपनी जांच के आधार पर ईडी ने अदालत को बताया कि 112 करोड़ में से अब तक संजय राउत और उनकी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए एक करोड़ 6 लाख 44 हजार 375 रुपयों का पता लगाया है। जांच में यह भी पता चला कि प्रवीण राउत, संजय राउत के करीबी विश्वासपात्र और सहयोगी हैं। गवाहों के बयानों से स्पष्ट होता है कि फ्रंटमैन होने के नाते उन्होंने संजय राउत के साथ अपनी नजदीकी का इस्तेमाल एमएचएडीए से अप्रूवल पाने और दूसरे लाभों के लिए किया।
संजय राउत ने पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज अपने बयान में चॉल परियोजना में प्रवीण राउत के शामिल होने की जानकारी से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वे प्रवीण के संपर्क में 2012-13 में आए थे। उनकी पत्नी और प्रवीण राउत की पत्नी एक दूसरे को जानती थीं। उनके कारण ही वे प्रवीण राउत से मिले थे। पत्नी के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के बारे में पूछे जाने पर संजय राउत कोई लीगल वजह नहीं दे सके। इसके अलावा वे प्रॉपर्टी खरीदने में हुए लेनदेन से संबंधित कोई दस्तावेज भी पेश नहीं कर पाए।
रिमांड कॉपी के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि पात्रा चॉल के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के दौरान संजय राउत की पत्नी की कंपनी अवनी इन्फ्रास्ट्रक्चर ने 2010-11 में अलीबाग के किहिम बीच पर 8 कांट्रैक्ट के तहत 10 लैंड पार्सल खरीदे। ये कॉन्ट्रैक्ट स्वप्ना पाटकर और वर्षा राउत के नाम से किए गए थे। पाटकर ने अपने बयान में कहा है कि इन जमीनों को खरीदने के बदले विक्रेताओं को नकद भुगतान किया गया था और इस नकद भुगतान का स्रोत प्रवीण राउत हैं। जब अवनी इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी बनाई गई तब संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत एक टीचर थीं और प्रवीण राउत की पत्नी माधुरी राउत उस समय गृहिणी थीं। वर्षा राउत को अवनी इंफ्रास्ट्रक्चर में 5625 रुपये के निवेश के बदले 13 लाख 95 हजार 611 रुपये मिले थे।
ईडी की ओर से दावा किया गया है कि प्रवीण राउत की ओर से संजय राउत को हर महीने 2 लाख रुपसे नकद मिले हैं। संजय राउत ने विक्रेताओं को अलीबाग के किहिम बीच स्थित अपनी जमीन बेचने की धमकी दी गई थी। इसके अलावा, उन्होंने ईडी के सामने गवाही देने वालों को भी धमकी दी है।