शिन्दे बने महाराष्ट्र के बादशाह, बेताज बादशाह रहे बाला साहब ठाकरे को याद करके ली शपथ, फडनवीस को मिला deputy CM का झुनझुना
Maharashtra Politics
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 07:30 PM
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के सियासी नाटक के इस सीजन का क्लाइमैक्स आ गया है। एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री बने है। BJP ने उन्हें समर्थन दिया है और मंत्रिमंडल में भी शामिल हुई हैं। इस क्लाइमेक्स के बाद सभी के मन में बस एक ही सवाल है कि आखिर BJP ने सिर्फ 49 विधायकों के समर्थन वाले एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री क्यों बनाया?
तो आइए जानते हैं क्यों भारतीय जनता पार्टी ने कैसे एक तीर से पांच निशाने साधे हैं-
निशाना-1: शिंदे के जरिए उद्धव ठाकरे की शिवसेना को खत्म करना
महाराष्ट्र में BJP और शिवसेना, दोनों ही हिंदूवादी राजनीति के कॉम्पिटिटर हैं। 30 सालों से साथ होने के बावजूद दोनों ही जानते हैं कि किसी एक के बढ़ने का मतलब दूसरे का कम होना है। आकंड़े भी इसकी गवाही देते हैं। साल-दर साल शिवसेना सिमटती गई और BJP उतनी ही तेजी से आगे बढ़ती गई।
पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना और BJP दोनों साथ मिलकर लड़ीं। BJP बड़ी पार्टी बनी और सीएम पद पर दावा ठोंक दिया, लेकिन शिवसेना समझ गई कि अगर CM की कुर्सी फिर से फडणवीस के हाथ में गई तो BJP को तेजी से फैलने से कोई रोक नहीं पाएगा। 2019 में BJP और उद्धव के बीच मचे घमासान की बड़ी वजह सीएम की कुर्सी ही थी।
चूंकि शिवसेना को खत्म किए बिना BJP आगे नहीं बढ़ सकती, लेकिन शिवसेना खत्म हो जाए और उसका ब्लेम BJP के सिर पर न आए, इसलिए शिंदे को सीएम बनाया गया। इसके अलावा शिंदे को सीएम बनाकर BJP ये संदेश देना चाहती है कि उन्हीं का खेमा असली शिवसेना है। (Maharashtra Politics)
निशाना-2: पूरे सियासी ड्रामे में एकनाथ शिंदे को आगे कर खुद का बचाव
[caption id="attachment_28237" align="aligncenter" width="640"] Eknath Shinde with Fadanvis[/caption]
बीजेपी ठाकरे की विरासत वाली शिवसेना को समेटना तो चाहती है, लेकिन वो यह भी नहीं चाहती थी कि महाराष्ट्र की जनता के सामने यह ठीकरा उसके सिर फूटे। यही वजह है कि इस बगावत में सबसे अहम किरदार निभाने के बावजूद BJP खुद सामने नहीं आई। उधर, शिंदे बार-बार खुद को असली शिवसेना बताते रहे। और आखिरकार BJP ने शिवसैनिक शिंदे को सीएम बनाकर सबसे बड़ा दांव खेल दिया।
इसके साथ ही शिंदे को सीएम बनाने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि BJP अभी टेस्ट एंड ट्रायल करना चाहती है। वो परखना चाहती है कि बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे की कुर्सी और पार्टी छीनने पर महाराष्ट्र की जनता कैसे रिएक्ट करती है। चुनाव में अगर इसका उल्टा असर पड़ा तो नतीजे केवल शिंदे और उनके गुट को भुगतने होंगे। सरकार का चेहरा न होने की वजह से BJP काफी हद तक इससे बची रहेगी। (Maharashtra Politics)
निशाना-3: शिवसेना तो रहेगी, लेकिन ठाकरे की विरासत सिमट जाएगी
महाराष्ट्र में बालासाहेब ठाकरे की विरासत BJP की राह का बड़ा रोड़ा थी। जिसकी झंडा बरदारी फिलहाल उद्धव ठाकरे कर रहे हैं। शिंदे को सुप्रीम पावर देने से शिवेसना के संगठन में टूट पड़ने के आसार हैं। संगठन के लोग मुख्यमंत्री के खेमे में जाना चाहेंगे। इस तरह उद्धव ठाकरे की ताकत और कमजोर पड़ जाएगी। (Maharashtra Politics)
शिंदे के बागी कैंप की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा कि उद्धव ठाकरे हिंदुत्व को भूलकर एनसीपी और कांग्रेस के करीबी हो गए हैं। शिंदे के इस दांव को उद्धव भी भांप चुके थे, इसीलिए दो तिहाई पार्टी गंवाने और सुप्रीम कोर्ट में सुनिश्चत हार के बावजूद जाते-जाते औरंगाबाद का नाम संभाजी नगर और उस्मानाबाद का धाराशिव कर दिया। दरअसल, उद्धव नहीं चाहते थे कि हिंदुत्व की राजनीति पर उनकी पकड़ कमजोर हो।
निशाना-4: 37 सालों से शिवसेना की ताकत का सोर्स माने जाने वाली BMC को छीनना (Maharashtra Politics)
बीजेपी के एकनाथ शिंदे को CM बनाने के दांव की एक और वजह एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बृहनमुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन यानी BMC पर कब्जे की लड़ाई है। BJP का प्रमुख एजेंडा शिवसेना से BMC को छीनना है। इस साल सितंबर में BMC के चुनाव होने हैं और इनमें BJP की नजरें शिवसेना के वोट बैंक को कमजोर करने की है।
एकनाथ शिंदे समेत शिवसेना के दो तिहाई से ज्यादा विधायकों को समर्थन देते हुए सरकार बनवाकर BJP ने शिवसेना के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। इससे शिवसेना कमजोर होगी, जिसका फायदा BJP को BMC चुनावों में हो सकता है।
दरअसल, मुंबई में शिवसेना की ताकत BMC में उसकी मजबूत पकड़ से ही आती है। शिवसेना 1985 में BMC में सत्ता में आई थी और तब से BMC पर उसका कब्जा बरकरार है। 2017 के चुनावों में BMC पर कब्जे के लिए शिवसेना और BJP के बीच कांटे की लड़ाई हुई थी और 227 सीटों में से शिवसेना को 84 और BJP को 82 सीटें मिली थीं।
निशाना-5: एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने से मराठाओं में BJP का दखल बढ़ेगा
सभी जानते हैं कि बाल ठाकरे ने अपनी राजनीति की शुरुआत मराठी मानुष से की थी। यानी मराठा अस्मिता उनकी राजनीति का कोर रही है। ये बात अलग है कि 90 के दशक में हिंदूवादी राजनीति के जोर पकड़ने के बाद ठाकरे ने हिंदूवादी राजनीति की भी शुरुआत कर दी। (Maharashtra Politics)
इधर, BJP राष्ट्रीय पार्टी होने की वजह से मराठी अस्मिता की राजनीति नहीं कर सकती है। इससे बाकी हिंदी भाषी बेल्ट में उस पर बुरा असर पड़ेगा। BJP को ऐसे में हिंदुत्व के अलावा एक और फैक्टर की जरूरत थी। उसकी भरपाई के लिए भाजपा ने शिंदे पर दांव खेला है। शिंदे मराठा हैं और इसका फायदा BJP को जरूर मिलेगा।