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हाल ही में CBSE बोर्ड की 12वीं कक्षा के नतीजे घोषित किए गए हैं। कुछ ही दिन पहले 10वीं कक्षा के नतीजे घोषित किए गए थे। 10वीं तथा 12वीं के नतीजों के बाद से छात्र-छात्राओं के अंक प्रतिशत चर्चा का विषय बने हुए हैं।

Mahatma Gandhi : हाल ही में CBSE बोर्ड की 12वीं कक्षा के नतीजे घोषित किए गए हैं। कुछ ही दिन पहले 10वीं कक्षा के नतीजे घोषित किए गए थे। 10वीं तथा 12वीं के नतीजों के बाद से छात्र-छात्राओं के अंक प्रतिशत चर्चा का विषय बने हुए हैं। जिन छात्र-छात्राओं के अंक प्रतिशत कम रहे हैं वे छात्र-छात्राएं तथा उनके अभिभावक दु:खी अथवा चिंतित हैं। सच यह है कि जीवन में महान तथा अच्छा इंसान बनने के लिए अंक प्रतिशत का कोई महत्व नहीं है। इस मामले में इतिहास पुरूष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का उदाहरण सब कुछ साफ कर देता है। Mahatma Gandhi
जीवन में महान इंसान बनने के लिए 10वीं तथा 12वीं के अंक प्रतिशत का कोई महत्व नहीं है। इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन से मिलता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पूरी दुनिया जानती है। दुनिया के ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि महात्मा गांधी को 10वीं कक्षा में बेहद कम प्रतिशत नंबर मिले थे। महात्मा गांधी की शिक्षा से जुड़ा रिपोर्ट तथा महात्मा गांधी की आत्मकथा इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को 10वीं कक्षा में मात्र 39.52 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे। परीक्षा में इतने कम अंक प्राप्त होने के बावजूद वे दुनिया के महानतम इंसान बने। Mahatma Gandhi
महात्मा गांधी की पढ़ाई के दिनों में 10वीं की परीक्षा को मैट्रिक स्तर की परीक्षा कहा जाता था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने मैट्रिक की परीक्षा वर्ष-1887 में पास की थी। वर्तमान में मुंबई यूनिवर्सिटी के नाम से प्रसिद्ध बाम्बे यूनिवर्सिटी बोर्ड ने यह परीक्षा आयोजित की थी। महात्मा गांधी ने मैट्रिक की यह परीक्षा राजकोट के अलफ्रेड हाईस्कूल से पास की थी। जब इस परीक्षा का रिजल्ट आया था तब पता चला कि महात्मा गांधी को इतिहास विषय में मात्र 20 नंबर मिले हैं। अपनी आत्मकथा ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ में भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने यह बताया है कि उन्हें मैट्रिक की परीक्षा में 626 में से 247.5 अंक प्राप्त हुए थे। यानि उनका प्रतिशत कुल 39.52 प्रतिशत था। Mahatma Gandhi
ऐसा नहीं है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नंबर 10वीं की परीक्षा में सभी विषयों में खराब थे। अंग्रेजी विषय में उनके 89 नंबर आए थे। बात गांधी जी के अलग-अलग विषयों में मिले नंबरों की करें तो गुजराती भाषा में उन्हें 45 नंबर, गणित में 59 नंबर, इतिहास में 20 नंबर, विज्ञान में 34 नंबर तथा सामान्य ज्ञान में सिर्फ 54 नंबर मिले थे। 10वीं के रिजल्ट में महात्मा गांधी को 404वीं रैंक प्राप्त हुई थी। इस उदाहरण से यह साफ जाहिर है कि परीक्षा में अंक प्रशित से जीवन में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता है। Mahatma Gandhi
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