अध्यक्ष बदलते ही भाजपा में हलचल, वरिष्ठ नेताओं की बेचैनी क्यों बढ़ी?
पार्टी के अंदरूनी गलियारों में चर्चा है कि नितिन नवीन अपनी टीम बनाते समय युवाओं और महिलाओं को पहले से ज्यादा तरजीह दे सकते हैं और यही संकेत कई मौजूदा पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और दावेदारों की बेचैनी बढ़ा रहा है।

Nitin Nabin : दुनिया के सबसे बड़े राजनितिक दल भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन हो चुका है। बीतें दिनों बिहार के पूर्व मंत्री रहे नितिन नबीन को दुनिया के सबसे बड़े राजनितिक दल भाजपा का नेतृत्व सौंपा गया था। बिहार के पूर्व मंत्री नितिन नवीन को नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद संगठन में सबसे बड़ा सवाल अब नई केंद्रीय टीम को लेकर खड़ा हो गया है। पार्टी के अंदरूनी गलियारों में चर्चा है कि नितिन नवीन अपनी टीम बनाते समय युवाओं और महिलाओं को पहले से ज्यादा तरजीह दे सकते हैं और यही संकेत कई मौजूदा पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और दावेदारों की बेचैनी बढ़ा रहा है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय कई नेताओं को डर सता रहा है कि कहीं उम्र और पुराने ढर्रे की वजह से वे दौड़ में पीछे न रह जाएं। दूसरी ओर, हाल के दिनों में कुछ नेताओं को खास चुनावी जिम्मेदारियां देकर यह संदेश भी दिया गया है कि नेतृत्व हाशिए पर रहे चेहरों को फिर से आगे ला सकता है।
अगले महीने के मध्य तक आ सकती है नई केंद्रीय टीम
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा की नई केंद्रीय टीम अगले महीने के मध्य तक सामने आ सकती है। पार्टी के भीतर इस पर व्यापक विमर्श हो चुका है और अंतिम रूप उचित समय पर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि पूरी टीम उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव स्तर पर काफी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि तीनों स्तरों पर लगभग आधे-आधे नए चेहरे आ सकते हैं। कुछ नेताओं की जिम्मेदारी में केवल अदला-बदली होगी, लेकिन कई पदों पर नए नाम तय माने जा रहे हैं। बदलाव के पीछे मुख्य तर्क यही बताया जा रहा है कि नेतृत्व नई पीढ़ी को आगे लाकर संगठन में नई ऊर्जा और अधिक सक्रिय संचालन चाहता है।
महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की तैयारी
नई टीम में महिलाओं की संख्या बढ़ने की चर्चा भी तेज है। आगामी समय में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के आरक्षण के परिदृश्य को देखते हुए पार्टी संगठन में भी महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दे सकती है। हालांकि पार्टी के संविधान में केंद्रीय पदाधिकारियों में एक-तिहाई हिस्सेदारी महिलाओं को देने की व्यवस्था है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इस लक्ष्य को पूरी तरह हासिल कर पाना इस बार भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसके बावजूद पिछली टीम की तुलना में महिला चेहरों की संख्या बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
राज्यों से भी आ सकते हैं नए चेहरे
भाजपा के विस्तार और संगठनात्मक जरूरतों को देखते हुए इस बार राज्यों में काम कर रहे कुछ चेहरों को केंद्रीय टीम में जगह मिलने की संभावना बताई जा रही है। साथ ही, राज्यों के प्रभारी और सह-प्रभारी की नियुक्ति को लेकर भी यह जरूरी नहीं माना जा रहा कि केवल केंद्रीय पदाधिकारियों को ही यह जिम्मेदारी दी जाए।
सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को भी प्रभार जैसी अहम भूमिका मिल सकती है। चूंकि प्रभारियों का काम राजनीतिक समझ, समन्वय और अनुभव के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है, इसलिए इस स्तर पर वरिष्ठ नेताओं को ज्यादा जिम्मेदारी सौंपे जाने की संभावना भी बनी हुई है। Nitin Nabin
Nitin Nabin : दुनिया के सबसे बड़े राजनितिक दल भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन हो चुका है। बीतें दिनों बिहार के पूर्व मंत्री रहे नितिन नबीन को दुनिया के सबसे बड़े राजनितिक दल भाजपा का नेतृत्व सौंपा गया था। बिहार के पूर्व मंत्री नितिन नवीन को नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद संगठन में सबसे बड़ा सवाल अब नई केंद्रीय टीम को लेकर खड़ा हो गया है। पार्टी के अंदरूनी गलियारों में चर्चा है कि नितिन नवीन अपनी टीम बनाते समय युवाओं और महिलाओं को पहले से ज्यादा तरजीह दे सकते हैं और यही संकेत कई मौजूदा पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और दावेदारों की बेचैनी बढ़ा रहा है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय कई नेताओं को डर सता रहा है कि कहीं उम्र और पुराने ढर्रे की वजह से वे दौड़ में पीछे न रह जाएं। दूसरी ओर, हाल के दिनों में कुछ नेताओं को खास चुनावी जिम्मेदारियां देकर यह संदेश भी दिया गया है कि नेतृत्व हाशिए पर रहे चेहरों को फिर से आगे ला सकता है।
अगले महीने के मध्य तक आ सकती है नई केंद्रीय टीम
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा की नई केंद्रीय टीम अगले महीने के मध्य तक सामने आ सकती है। पार्टी के भीतर इस पर व्यापक विमर्श हो चुका है और अंतिम रूप उचित समय पर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि पूरी टीम उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव स्तर पर काफी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि तीनों स्तरों पर लगभग आधे-आधे नए चेहरे आ सकते हैं। कुछ नेताओं की जिम्मेदारी में केवल अदला-बदली होगी, लेकिन कई पदों पर नए नाम तय माने जा रहे हैं। बदलाव के पीछे मुख्य तर्क यही बताया जा रहा है कि नेतृत्व नई पीढ़ी को आगे लाकर संगठन में नई ऊर्जा और अधिक सक्रिय संचालन चाहता है।
महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की तैयारी
नई टीम में महिलाओं की संख्या बढ़ने की चर्चा भी तेज है। आगामी समय में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के आरक्षण के परिदृश्य को देखते हुए पार्टी संगठन में भी महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दे सकती है। हालांकि पार्टी के संविधान में केंद्रीय पदाधिकारियों में एक-तिहाई हिस्सेदारी महिलाओं को देने की व्यवस्था है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इस लक्ष्य को पूरी तरह हासिल कर पाना इस बार भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसके बावजूद पिछली टीम की तुलना में महिला चेहरों की संख्या बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
राज्यों से भी आ सकते हैं नए चेहरे
भाजपा के विस्तार और संगठनात्मक जरूरतों को देखते हुए इस बार राज्यों में काम कर रहे कुछ चेहरों को केंद्रीय टीम में जगह मिलने की संभावना बताई जा रही है। साथ ही, राज्यों के प्रभारी और सह-प्रभारी की नियुक्ति को लेकर भी यह जरूरी नहीं माना जा रहा कि केवल केंद्रीय पदाधिकारियों को ही यह जिम्मेदारी दी जाए।
सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को भी प्रभार जैसी अहम भूमिका मिल सकती है। चूंकि प्रभारियों का काम राजनीतिक समझ, समन्वय और अनुभव के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है, इसलिए इस स्तर पर वरिष्ठ नेताओं को ज्यादा जिम्मेदारी सौंपे जाने की संभावना भी बनी हुई है। Nitin Nabin













