देश के लाखों विद्यार्थियों के लिए केंद्र सरकार एक बड़ी पहल की तैयारी में है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, यूपीएससी, बैंकिंग और अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अलग-अलग मंत्रालयों और राज्य सरकारों की ओर से संचालित मुफ्त कोचिंग योजनाओं को एकीकृत करने की तैयारी है।

National News : भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के तहत देश भर में कोचिंग की फ्री व्यवस्था को एक साथ जोड़ने की योजना बनाई गई है। आपको बतादें कि देश के लाखों विद्यार्थियों के लिए केंद्र सरकार एक बड़ी पहल की तैयारी में है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, यूपीएससी, एसएससी, बैंकिंग और अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अलग-अलग मंत्रालयों और राज्य सरकारों की ओर से संचालित मुफ्त कोचिंग योजनाओं को एकीकृत करने या उन्हें एक साझा फ्री ऑनलाइन कोचिंग पोर्टल से जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल सीमित विद्यार्थियों तक न रह जाए, बल्कि देश के ग्रामीण, दूरदराज और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण परीक्षा तैयारी की सुविधा मिल सके। सरकारी स्तर पर तैयार किए जा रहे रोडमैप में इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि विद्यार्थियों को अलग-अलग विभागों की योजनाओं की जानकारी के लिए भटकना न पड़े। एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी, अध्ययन सामग्री, प्रैक्टिस टेस्ट और संबंधित सरकारी कोचिंग योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
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मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग को लेकर केंद्र सरकार की कवायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 अगस्त को लाल किले से की गई मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा के बाद तेज हुई है। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने सरकारी कोचिंग योजनाओं की मौजूदा व्यवस्था और विद्यार्थियों तक उनकी पहुंच का आकलन शुरू किया। रोडमैप तैयार करने के दौरान यह सामने आया कि केंद्र और राज्य सरकारें मेडिकल, इंजीनियरिंग तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, लेकिन योजनाओं का लाभ सभी पात्र विद्यार्थियों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे शहरों के विद्यार्थियों को इन योजनाओं की जानकारी नहीं मिलने तथा अलग-अलग परीक्षाओं के लिए अलग-अलग तैयारी व्यवस्था होने के कारण समस्या बनी हुई है।
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सरकारी स्तर पर सामने आई एक बड़ी चुनौती यह भी है कि विभिन्न राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए कोई एक समान राष्ट्रीय रोडमैप नहीं है। कई जगह सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है, जबकि जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं का पैटर्न और विषयगत जरूरतें काफी अलग होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सामान्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने से मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में विद्यार्थियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में प्रस्तावित एकीकृत व्यवस्था में परीक्षा के अनुसार अलग-अलग विशेषज्ञ सामग्री और टेस्ट सीरीज उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा सकता है।
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अनुमान के मुताबिक, विभिन्न राज्य सरकारें मुफ्त कोचिंग योजनाओं पर सालाना 50 से 60 करोड़ रुपये तक खर्च करती हैं। इसके बावजूद इन योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाता। सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि पहले से चल रही योजनाओं और उन पर खर्च होने वाली राशि का बेहतर उपयोग किया जाए तथा विद्यार्थियों को एक ही डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
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शिक्षा मंत्रालय की ओर से पहले से ही ‘साथी’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से मुफ्त परीक्षा तैयारी उपलब्ध कराई जा रही है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत सभी जाति, धर्म और समुदाय के विद्यार्थियों को जेईई, नीट, सीयूईटी, एसएससी और बैंकिंग जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराने की व्यवस्था की गई है। बताया गया है कि इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 21 लाख से अधिक उम्मीदवारों को मुफ्त तैयारी की सुविधा मिल रही है। हालांकि, सरकारी स्तर पर यह भी महसूस किया गया है कि पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी इस सुविधा का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। यही वजह है कि अब ऐसी सभी सुविधाओं को अधिक प्रभावी ढंग से विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए एकीकृत डिजिटल व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
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फिलहाल केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालय और एजेंसियां अलग-अलग परीक्षाओं के लिए मुफ्त तैयारी की सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से नीट, जेईई और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन अभ्यास और प्रैक्टिस की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। वहीं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के तहत एससी और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों तथा संबंधित पात्र लाभार्थियों को यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी और बैंकिंग जैसी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता दी जाती है। पीएम केयर्स से जुड़ी योजना में भी पात्र विद्यार्थियों के लिए परीक्षा तैयारी की सुविधा का प्रावधान है। इन योजनाओं में निर्धारित आय सीमा और अन्य पात्रता शर्तों के आधार पर विद्यार्थियों को लाभ दिया जाता है।
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देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के साथ-साथ यूपीएससी, एसएससी, बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निजी कोचिंग संस्थानों की फीस कई विद्यार्थियों के परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में सरकारी स्तर पर मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन कोचिंग को मजबूत किया जाता है तो आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए यह बड़ा अवसर साबित हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों और छोटे शहरों में रहने वाले विद्यार्थियों तक भी आसानी से पहुंचे।
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प्रस्तावित व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि विद्यार्थी को अलग-अलग मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों की वेबसाइटों पर जाकर योजनाएं खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक साझा पोर्टल पर परीक्षा के अनुसार मुफ्त कोचिंग, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, अध्ययन सामग्री, वीडियो लेक्चर और प्रैक्टिस टेस्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। यदि इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो यह सरकारी कोचिंग योजनाओं के बीच समन्वय बढ़ाने के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में डिजिटल समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल मुफ्त कोचिंग उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इसकी जानकारी और डिजिटल सुविधा देश के अंतिम छोर तक पहुंचे। इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल साक्षरता और स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाकर इस व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का एकीकृत मॉडल लागू होने पर आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण विद्यार्थियों को महंगी निजी कोचिंग पर निर्भरता कम करने का अवसर मिल सकता है।
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