हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को नहीं जानते तो गलत है
भारत
चेतना मंच
29 Aug 2025 04:30 PM
भारत का कोई नागरिक हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को नहीं जानता यह कल्पना करना बहुत मुश्किल है। कल्पना करें कि जो व्यक्ति मेजर ध्यानचंद को नहीं जानता भला वह भारत के विषय में क्या जानता होगा। मेजर ध्यानचंद भारत के खिलाडिय़ों के हीरो थे, हैं और हमेशा हीरो रहेंगे। यह भी कहा जा सकता है कि मेजर ध्यानचंद भारत के खेल इतिहास का स्वर्णिम पेज है। कुछ लोग तो मेजर ध्यानचंद को भारतीय खेल जगत का चमकता हुआ ध्रुवतारा भी कहते हैं। Major Dhyan Chand
मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर मनाया जाता है नेशनल स्पोर्ट्स डे
दुनिया भर में हॉकी के जादूगर के नाम से प्रसिद्ध मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 में हुआ था। 29 अगस्त के दिन मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन पूरे धूमधाम के साथ मनाया जाता है। दुनिया भर के खेल प्रेमी जन्मदिन पर मेजर ध्यानचंद को याद करते हैं। भारत में मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन नेशनल स्पोर्ट्स डे के रूप में मनाया जाता है। भारत का जो नागरिक मेजर ध्यानचंद को नहीं जानता वह बहुत बड़ी गलती पर है। पूरी दुनिया मेजर ध्यानचंद को हॉकी के जादूगर के नाम से जानती है। इस समाचार में हम आपको मेजर ध्यानचंद का पूरा परिचय आसान शब्दों
में दे रहे हैं। Major Dhyan Chand
मेजर ध्यानचंद का पूरा परिवार हॉकी को समर्पित
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मेजर ध्यानचंद का पूरा परिवार हॉकी के खेल के लिए समर्पित रहा है। मेजर ध्यानचंद के भाई रूप सिंह भी हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी थे। मेजर ध्यानचंद के पुत्र ने भी हॉकी को अपना कैरियर बनाया। मेजर ध्यानचंद के पुत्र का नाम अशोक कुमार है। अशोक कुमार ने हॉकी खेलते हुए भारत को वर्ष-1975 में हॉकी में वल्र्ड कप जितवाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। दुर्भाग्य यह है कि भारत को 1975 से पहले और ना ही 1975 के बाद अभी तक हॉकी में वल्र्ड कप जीतने का मौका मिला है। मात्र 1975 में भारत ने हॉकी का एक मात्र वल्र्ड कप जीता था। वह वल्र्ड कप जीतने में मेजर ध्यानचंद के पुत्र अशोक कुमार का उल्लेखनीय योगदान था। वर्ष-1975 के उस वल्र्ड कप का फाइनल मुकाबला भारत तथा पाकिस्तान के बीच खेला गया था। उस मुकाबले में अशोक कुमार ने निर्णायक
गोल करके भारत को जीत दिलाई थी। Major Dhyan Chand
आपको बता दें कि हॉकी का जादूगर मेजर ध्यानचंद उत्तर प्रदेश का लाडला बेटा था। मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज), उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनका असली नाम ध्यान सिंह था। मेजर ध्यानचंद के पिता ब्रिटिश इंडियन आर्मी में एक सूबेदार थे। परिवार में बार-बार तबादलों के कारण वह ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाए, इसलिए उनकी औपचारिक शिक्षा बहुत कम रही। मेजर ध्यानचंद को बचपन में हॉकी से कोई खास लगाव नहीं था। वह पहलवानी भी पसंद करते थे। हालांकि, मेजर ध्यानचंद के पिता समेश्वर दत्त सिंह ब्रिटिश इंडियन आर्मी में थे और वे भी हॉकी खेलते थे। मेजर ध्यानचंद भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए 1922 में 16 साल की उम्र में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में सिपाही के रूप में भर्ती हुए। यहीं पर मेजर ध्यानचंद ने हॉकी खेलना शुरू किया। वह रात में चांदनी की रोशनी में प्रैक्टिस करते थे, जिस कारण उनके साथी उन्हें ध्यानचंद कहने लगे। इसी से उनका नाम ध्यानचंद पड़ा। Major Dhyan Chand
मेजर ध्यानचंद के नेतृत्व में भारतीय हॉकी टीम ने 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में लगातार तीन गोल्ड मेडल जीते। मेजर ध्यानचंद ने 1928 एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारत ने फाइनल में नीदरलैंड्स को 3-0 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। मेजर ध्यानचंद ने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 14 गोल किए थे। मेजर ध्यानचंद ने 1932 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में शानदार खेल दिखाया। भारत ने अमेरिका को 24-1 के रिकॉर्ड स्कोर से हराया। इस मैच में मेजर ध्यानचंद ने 8 गोल और उनके भाई रूप सिंह ने 10 गोल किए थे। वष-1936 बर्लिन ओलंपिक मेजर ध्यानचंद के लिए कप्तान के रूप में था। फाइनल में भारत ने जर्मनी को 8-1 से हराया। Major Dhyan Chand
दावा किया जाता है कि इस जीत के बाद जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर ने मेजर ध्यानचंद जर्मनी की सेना में शामिल होने और उच्च पद का ऑफर दिया, जिसे मेजर ध्यानचंद ने विनम्रतापूर्वक ठुकरा दिया। मेजर ध्यानचंद 1956 में भारतीय सेना से मेजर के पद से रिटायर हुए। भारत सरकार ने इसी साल उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन 29 अगस्त को भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। 3 दिसंबर 1979 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया था। मेजर ध्यानचंद की गिनती दुनिया के महानतम खिलाडिय़ों में होती है। उनके जीवन पर कई कहानियां और किस्से मशहूर हैं। एक बार की बात है, नीदरलैंड्स में उनका मैच था तो लोग उनकी हॉकी स्टिक को तोडक़र जांच करने लगे कि कहीं उसमें कोई चुंबक तो नहीं लगा है। Major Dhyan Chand
मेजर ध्यानचंद की विरासत को सम्मान देने के लिए भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार उन्हीं के नाम पर रखा गया है। यह पुरस्कार खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को दिया जाता है। मेजर ध्यानचंद को भारतीय हॉकी का जादूगर कहा जाता है और उन्हें लंबे समय से भारत रत्न देने की मांग हो रही है। मेजर ध्यानचंद के छोटे भाई रूप सिंह भी एक बेहतरीन हॉकी खिलाड़ी थे। उन्हें दुनिया के सबसे महान इंसाइड-लेफ्ट खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। उन्होंने 1932 और 1936 के ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीते और मेजर ध्यानचंद के साथ मिलकर कई यादगार मैच खेले। रूप सिंह ने लॉस एंजेलिस ओलंपिक 1932 में भारत ने अमेरिका को 24-1 से हराया था, जिसमें रूप सिंह ने 10 और ध्यानचंद ने 8 गोल किए थे। इन दोनों भाइयों को हॉकी के जुड़वां के नाम से भी जाना जाता था। जर्मनी में 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उनके शानदार प्रदर्शन के बाद म्यूनिख में एक सड़क का नाम उनके नाम पर रखा गया था। Major Dhyan Chand