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महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को तगड़ा झटका लगा है, जहां पार्टी के 6 लोकसभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया है।

New Delhi/Mumbai News : महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को तगड़ा झटका लगा है, जहां पार्टी के 6 लोकसभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद अब लोकसभा में यूबीटी के पास केवल 3 सांसद ही बचे हैं। सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये सभी सांसद पिछले कुछ दिनों से लगातार संपर्क में थे और दिल्ली में उनकी गतिविधियों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने पहले लोकसभा में एक अलग समूह बनाने की प्रक्रिया शुरू की और बाद में शिंदे गुट में शामिल होने की तैयारी पूरी कर ली।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम अचानक नहीं हुआ बल्कि लंबे समय से चल रही अंदरूनी नाराजगी और संगठनात्मक असंतोष का परिणाम है। सांसदों के एक समूह ने पहले ही केंद्रीय नेतृत्व और लोकसभा अध्यक्ष को अपने निर्णय से अवगत करा दिया था। सूत्रों का यह भी दावा है कि सभी 6 सांसदों ने पहले एक अलग संसदीय समूह बनाने के लिए सहमति जताई और उसके बाद शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ जुड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। इस टूट के बाद उद्धव ठाकरे गुट की लोकसभा में ताकत बेहद सीमित हो गई है। अब पार्टी के पास केवल तीन सांसद बचे हैं, जो संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस घटनाक्रम से महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन और भी बदल सकता है और आने वाले समय में गठबंधन राजनीति पर इसका असर दिख सकता है।
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रिपोर्ट्स में जिन नामों का जिक्र सामने आया है, उनमें कुछ वरिष्ठ सांसद भी शामिल हैं, जो लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय थे। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि और औपचारिक घोषणा की प्रक्रिया अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम न सिर्फ शिवसेना (यूबीटी) के लिए बल्कि पूरे इंडिया गठबंधन की महाराष्ट्र रणनीति के लिए भी बड़ा झटका साबित हो सकता है। वहीं शिंदे गुट की स्थिति लोकसभा में और मजबूत हो गई है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि लोकसभा अध्यक्ष इस समूह को किस तरह मान्यता देते हैं और क्या यह बदलाव आधिकारिक रूप से संसद रिकॉर्ड में दर्ज होता है या नहीं।
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