वो चलती है तो भी जन्नत का अहसास देती है, मैंने जन्नत तो नहीं देखी, लेकिन मां देखी है।ना आसमां होता, ना जमीं होती, अगर मां तुम ना होती, तो ये दुनिया ही ना होती।।
भारत में देवियों की तरह पूजी जाने वाली माता को कुछ नरपिशाच चंद रुपयों के लिए कारोबार का साधन बना दिया गया है। सुनने में यह बेशक अटपटा लगे, लेकिन है बिल्कुल सच। बंगलुरू की कंपनी नियोलैक्टा लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड एशिया की पहली कंपनी है, जो मां के दूध का कारोबार कर रही है। अपने इस कारोबार के लिए कंपनी गरीब माताओं को अपनी कमाई का साधन बन रही है।
गरीब माताओं को चंद सिक्के देकर उनके बच्चों के हिस्से के दूध को बंगलुरू की कंपनी नियोलैक्टा लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड खरीदकर उसे बाजार में बेच रही है। अपनी सुंदरता बचाए रखने के नाम पर अभिजात्य घरानों की लाखों महिलाएं इस दूध को खरीद रही हैं। एशिया की यह पहली कंपनी है, जो मोटे मुनाफे के लिए मां के दूध का कारोबार कर रही है। इस कंपनी की स्थापना वर्ष-2016 में हुई थी। कंपनी ने डेयरी प्रोडक्ट की कैटेगरी में सरकार से लाइसेंस लिया हुआ है। मां के दूध का व्यापार करने वाली यह कंपनी मात्र 300 मिलीलीटर दूध 4500 रुपये में बेच रही है।
इस मामले के उजागर होने के बाद फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने कंपनी के लाइसेंस को रद्द कर दिया था, क्योंकि मां के दूध का व्यापार गैरकानूनी है। एफएसएसएआई की कार्रवाई के बाद भी कंपनी ने चालबाजी जारी रखी और ब्रांड नाम बदलकर नारी क्षीर नाम से नवंबर 2021 में आयुष लाइसेंस प्राप्त कर लिया। कंपनी ने यह लाइसेंस आयुर्वेदिक दवाइयों के नाम पर लिया है। हैरानी की बात है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने जिस आयुष मंत्रालय को आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के मकसद से बनाया था, उसी ने इस कंपनी को लाइसेंस दे दिया। गौरतलब है कि इन दिनों असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल इस विभाग के मंत्री हैं।
नोएडा में भी इस कंपनी का कारोबार फलफूल रहा है। मां के दूध का व्यापार करने वाली यह कंपनी मात्र 300 मिलीलीटर दूध 4500
रुपये में बेच रही है। यह दूध भारत के किसी भी शहर व कस्बे में उपलब्ध है। हमारे संवाददाता ने इस गंभीर मामले की तहकीकात शुरू की। छानबीन के दौरान उसने ग्रेटर नोएडा के रोजा याकूबपुर गांव के एक मेडिकल स्टोर से नियोलेक्टा कंपनी द्वारा बेचा जा रहा मां का 50 मिलीलीटर दूध 1458 रुपये में खरीदा है।
ब्रेस्ट फीडिंग प्रमोशन नेटवर्क ऑफ इंडिया नामक एक समाजसेवी संस्था की संचालिका नूपुर बिड़ला ने चेतना मंच से कहा कि माता के दूध का कारोबार चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि नियोलैक्टा लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को माताओं से दूध कलेक्ट करने और उसे एक डेयरी प्रोडक्ट की तरह बेचने की अनुमति सरकार दे रही है। दिलचस्प है कि हमारे संविधान और कानून में मां के दूध के व्यापार को गैरकानूनी करार दिया गया है। उन्होंने इस धंधे को घोर पाप बताया।
ब्रिटेन के डॉ. माइकल नामैन और अर्थशात्री सुसान न्यूमैन ने दिसंबर, 2020 में इस मामले की छानबीन कर एक आलेख प्रकाशित किया था, जिसमें कहा गया था कि नियोलैक्टा लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी एनजीओ के माध्यम से गरीब माताओं को लालच देकर दूध बटोरकर उसे बाजार में ऊंचे मूल्य पर बेच रही है।