
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अफीम की खेती पहाड़ी जिलों में की जाती है, जिनमें से कई पर कुकी जनजातियों का प्रभुत्व है। मैतई और अन्य जनजातियो ने पहले भी आरोप लगाया था कि कुकी जनजातियां अवैध अफीम उगा रही हैं। मैतेई काउंसिल के प्रवक्ता नबकिशोर सिंह युमनाम का कहना है कि कुकी द्वारा यह बात फैलाई जा रही है कि सभी जगह मैतई का वर्चस्व है जबकि ऐसा नहीं है कई बड़े पदों पर कुकी भी आसीन है। प्रदेश के डीजीपी भी कुकी है। जबकि कुकी समुदाय का कहना है कि मैतई जो कि बहुसंख्यक आबादी है पहले से ही संसाधनों का लाभ ले रहे हैं और उन्हें आदिवासी दर्जा मिल जाने के बाद कुकी आदिवासी समुदाय के लिए शिक्षा, नौकरी और शिक्षण संस्थानों में दाखिले में मौके कम हो जाएंगे। साथ ही वे आदिवासी संरक्षित क्षेत्र में जमीने भी खरीद लेंगे। राज्य पर उनका पूरी तरह वर्चस्व हो जाएगा।