
Manmohan Singh Birthday देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे सरदार मनमोहन सिंह (Ex PM Manmohan Singh) को कौन नहीं जानता है। उस समय विपक्ष उन पर खूब तंज कसता था, लेकिन वह भारत के एक ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं, जिन्होंने देश को कई तरह की आर्थिक मुसीबतों से उबारा है। वह महान अर्थशास्त्री भी है। आज पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का जन्म दिन है। इस अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा देशभर में उनका जन्मदिन धूमधाम से मनाया जा रहा है। आज उनके जन्म दिन के अवसर पर हम आपको कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बात बताएंगे, जिन्हें शायद ही आप जानते हों।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आज 91 साल के हो गए हैं। उन्हें देश में आर्थिक सुधारों का सूत्रपात करने वाला अर्थशास्त्री कहा जाता है। देश को गंभीर आर्थिक संकट से निकालने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। मनमोहन सिंह ने 24 जुलाई 1991 को ऐसा बजट पेश किया था जिसने देश की दिशा और दशा को हमेशा के लिए बदल दिया था। केंद्रीय वित्त मंत्री के पद के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की पहली पसंद अर्थशास्त्री आईजी पटेल थे, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से राव की पेशकश को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद राव को मनमोहन सिंह का नाम सुझाया गया जो आरबीआई के गवर्नर, योजना आयोग के प्रमुख और मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके थे।
देश में आर्थिक सुधारों का श्रेय तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जोड़ी को दिया जाता है। डॉ. मनमोहन सिंह ने 24 जुलाई 1991 को ऐतिहासिक बजट को पेश करते हुए फ्रांसीसी विद्वान विक्टर ह्यूगो को उद्धृत करते हुए कहा था कि दुनिया की कोई ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती जिसका समय आ गया हो। उससे पहले भारत की क्लोज इकॉनमी में सरकार ही सब कुछ तय करती थी। किस सामान का उत्पादन कितना होगा, उसे बनाने में कितने लोग काम करेंगे और उसकी कीमत क्या होगी, सब सरकार तय करती है। इस सिस्टम को लाइसेंस परमिट राज कहा जाता था।
24 जुलाई 1991 के बजट ने लाइसेंस परमिट राज से देश को मुक्ति दिला दी। देश में खुली अर्थव्यवस्था का रास्ता साफ हुआ। इसमें प्राइवेट कंपनियों को कई तरह की छूट और प्रोत्साहन दिए गए। सरकारी निवेश कम करने और खुले बाजार को बढ़ावा देने का फैसला किया गया। इस बजट ने देश की तस्वीर बदलकर रख दी। कंपनियां फलने-फूलने लगीं और करोड़ों नई नौकरियां मार्केट में आईं। आज भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकॉनमी बनकर उभरा है। अमेरिका समेत दुनिया के कई देश जहां मंदी की आशंका में जी रहे हैं, वहीं भारत की इकॉनमी तेजी से आगे बढ़ रही है।
वर्ष 1991 में प्रधानमंत्री बनने से दो दिन पहले नरसिंह राव को कैबिनेट सचिव नरेश चंद्रा ने एक नोट दिया था जिसमें बताया गया था कि भारत की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। देश के पास एक महीने के आयात के लिए भी पैसे नहीं बचे थे। ऐसे में उन्हें वित्त मंत्री के रूप में एक ऐसे शख्स की तलाश थी जो देश को इस स्थिति से उबार सकता था। तब पीसी अलेक्जेंडर ने उन्हें रिजर्व बैंक के गवर्नर रह चुके और लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स के डायरेक्टर आईजी पटेल का नाम सुझाया, लेकिन आईजी पटेल दिल्ली आना नहीं चाहते थे क्योंकि उनकी मां बीमार थीं।
इसके बाद अलेक्जेंडर ने ही मनमोहन सिंह का नाम सुझाया। अलेक्जेंडर ने शपथ ग्रहण समारोह से एक दिन पहले मनमोहन सिंह को फोन किया। वह कुछ ही घंटे पहले विदेश से लौटे थे और उस समय सो रहे थे। जब मनमोहन सिंह को इस प्रस्ताव के बारे में बताया गया तो उन्होंने इस पर विश्वास नहीं किया। उनका कहना था कि अधिकारी इस तरह की बातें करते रहते हैं। अगले दिन शपथ ग्रहण समारोह से तीन घंटे पहले मनमोहन सिंह के पास यूजीसी के ऑफिस में नरसिम्हा राव का फोन आया। उन्होंने कहा कि मैं आपको अपना वित्त मंत्री बनाना चाहता हूं।
शपथ ग्रहण समारोह से पहले नरसिम्हा राव ने मनमोहन सिंह से कहा था कि अगर हम सफल हुए तो इसका श्रेय हम दोनों को मिलेगा लेकिन असफलता का ठीकरा आपके सिर पर फूटेगा। साल 1991 के ऐतिहासिक बजट से दो हफ्ते पहले जब मनमोहन सिंह बजट का मसौदा लेकर नरसिम्हा राव के पास गए तो उन्होंने उसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए आपको फाइनेंस मिनिस्टर नहीं बनाया गया है। मनमोहन सिंह ने अपने बजट भाषण में जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का कई बार नाम लिया लेकिन उनकी आर्थिक नीतियों को एक झटके में पलट दिया।
मनमोहन सिंह एक अर्थशास्त्री हैं, जिन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में दो कार्यकालों तक अपनी सेवाएं दीं। उनसे पहले केवल जवाहर लाल नेहरू ही थे, जो दो बार लगातार पीएम रहे। उनके बाद नरेंद्र मोदी। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी सिंह से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट के साथ अपनी युवावस्था में संयुक्त राष्ट्र के लिए काम किया और बाद में भारत देश के आर्थिक शासन में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्हें 1991 में देश की अर्थव्यवस्था को फिर से विकसित करने के लिए संरचनात्मक सुधारों की रूपरेखा तैयार करके देश को पूर्ण आर्थिक संकट के कगार से बचाने का श्रेय दिया जाता है। वित्त मंत्री के रूप में उनके नेतृत्व में, संकट सफलतापूर्वक टल गया और भारत विश्व बाजार में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने की राह पर आगे बढ़ता गया।
मनमोहन सिंह ने 1993 में वर्ष के वित्त मंत्री के रूप में यूरोमनी पुरस्कार जीता तथा 1993 और 1994 के लिए एशिया के वर्ष के वित्त मंत्री के रूप में एशियामनी पुरस्कार जीता।
Manmohan Singh Birthday : मनमोहन सिंह जन्म 26 सितंबर 1932 गांव गाह (पश्चिम पंजाब) में हुआ था। उन्होंने सिविल सेवा, अर्थशास्त्री, राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक और शिक्षाविद के रुप में कार्य किया है। उनके पिता का नाम गुरमुख सिंह तथा माता का नाम अमृत कौर है। उनकी जीवनसाथी का नाम गुरशरण कौर है, जो एक गृहिणी है। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह सिंह की तीन पुत्रियां हैं। वर्ष 1982 में वह भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर बने। Manmohan Singh Birthday