हरिद्वार में मनसा देवी मंदिर पर भगदड़, 6 की मौत, 15 घायल
Mansa Devi Temple Accident
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 04:44 AM
Mansa Devi Temple Accident : श्रावण मास में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में रविवार सुबह दर्दनाक हादसा हो गया। सीढ़ियों वाले मार्ग पर अचानक भगदड़ मचने से 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 15 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।
कैसे हुआ हादसा?
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, हादसा मंदिर तक जाने वाले संकरे और ढलानदार सीढ़ी मार्ग पर हुआ। सावन का महीना और रविवार की भीड़, ऊपर से बरसात और फिसलन, इन सभी कारणों से हालात पहले से ही चुनौतीपूर्ण थे। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि कुछ श्रद्धालु बिजली की तार के सहारे ऊपर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे। उसी दौरान किसी ने यह अफवाह फैला दी कि बिजली की तार में करंट दौड़ रहा है। यह सुनते ही श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया और देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई, जो जानलेवा भगदड़ में तब्दील हो गई।
प्रशासन और पुलिस अलर्ट पर
गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे, कोतवाली प्रभारी रितेश शाह समेत जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं। एनडीआरएफ और स्थानीय बचाव दल राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। बताया जा रहा है कि घटनास्थल पर अभी भी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं है।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा दु:ख जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर मार्ग में भगदड़ मचने का अत्यंत दु:खद समाचार प्राप्त हुआ है। स्थानीय पुलिस तथा अन्य बचाव दल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। मैं निरंतर स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हूं और स्थिति की निगरानी कर रहा हूं। माता रानी से सभी श्रद्धालुओं की कुशलता की प्रार्थना करता हूं।
सावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़
गौरतलब है कि सावन के महीने में हरिद्वार, हर की पौड़ी और आसपास के मंदिरों में लाखों शिवभक्त पहुंचते हैं। मनसा देवी मंदिर, जो ऊंचाई पर स्थित है, वहां तक पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं, रोपवे और सीढ़ियां। रोपवे पर सीमित संख्या में लोग जा सकते हैं, जबकि अधिकतर श्रद्धालु पैदल चढ़ाई करते हैं। रविवार होने के कारण आज सुबह से ही मंदिर मार्ग पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। बारिश के कारण सड़कें फिसलन भरी थीं और चढ़ाई वाला रास्ता पहले से ही संकटपूर्ण बना हुआ था।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस दुखद हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम थे? क्या मंदिर प्रशासन और पुलिस के बीच समन्वय की कमी थी? क्यों समय रहते रोपवे, सीढ़ियों और मार्गों की सुरक्षा समीक्षा नहीं की गई? हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थलों पर सावन में श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंचती है, ऐसे में मजबूत सुरक्षा प्रबंध, अफवाह रोकने की व्यवस्था, और प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती अनिवार्य हो जाती है। यह हादसा एक त्रासदी ही नहीं, बल्कि व्यवस्था पर कठोर प्रश्नचिह्न भी है।