उचित मार्गदर्शन, अच्छा हुनर तथा कुछ कर गुजरने की तमन्ना बड़े से बड़ा काम करवा देती है। इसी प्रकार का उदाहरण पेश किया है मनसुख भाई ने। मनसुख भाई ने मिट्टी को सोना बनाने का वह काम करके दिखा दिया है, जिसकी कल्पना भी करना मुश्किल था।

Mansukhbhai Prajapati : उचित मार्गदर्शन, अच्छा हुनर तथा कुछ कर गुजरने की तमन्ना बड़े से बड़ा काम करवा देती है। इसी प्रकार का उदाहरण पेश किया है मनसुख भाई ने। मनसुख भाई ने मिट्टी को सोना बनाने का वह काम करके दिखा दिया है, जिसकी कल्पना भी करना मुश्किल था। मिट्टी से कारोबार शुरू करके मनसुख भाई ने कुछ ही समय में 10 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली कंपनी खड़ी कर दी। अपने हुनर तथा हिम्मत के बल पर मनसुख भाई लाखों युवाओं की प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।
दसवीं फेल या यूं कहें कि दसवीं कक्षा में पढ़ाई छोड़ने वाले मनसुख भाई प्रजापति ने कमाल करके दिखा दिया है। मनसुखभाई ने बताया कि उन्होंने 10वीं क्लास में ही पढ़ाई छोड़ दी थी और अपने पिता से कुम्हार का काम सीखना चाहते थे, क्योंकि उनके पिता एक कुम्हार थे. पिताजी पढ़ाई छोड़ने के बिल्कुल खिलाफ थे और उन्हें कुम्हार का काम सीखने नहीं देना चाहते थे. लेकिन मनसुखभाई का कहना था कि जैसे-तैसे उन्होंने अपने पिताजी को मना लिया और उनसे यह भी कहा कि वह कुम्हार के इस काम को टेक्नोलॉजी और साइंस से जोड़कर आगे बढ़ाना चाहते हैं. वहीं उनका कहना था कि यहीं से उनके एक नए सफर की शुरुआत हुई थी.
मुख्य रूप से गुजरात प्रदेश के रहने वाले मनसुखभाई ने आगे बताया कि जब उन्होंने अपने पिता का कुम्हार का काम आगे बढ़ाया, तो उन्होंने कई अलग तरह के मिट्टी के बर्तन बनाए और उन्हें टेक्नोलॉजी और साइंस से भी जोड़ा. उनका कहना था कि उन्होंने एक रेफ्रिजरेटर भी बनाया है, जो बिना बिजली के पानी ठंडा करता है और उसमें रखी गई बाकी चीजें भी ठंडी कर देता है. उन्होंने करीब 900 से ज्यादा मिट्टी की अलग-अलग तरह की रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली चीजें बनाई, जिसके बाद उनका यह वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया. उन्हें एक रियलिटी शो पर भी बुलाया गया था, जिसका नाम भारत का सुपर फाउंडर था, जहां उन्हें 3 करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट भी मिला था. अब उनका यह कुम्हार का पूरा बिजनेस इतना बड़ा हो गया है कि वह सालाना 10 करोड़ रुपए का टर्नओवर करते हैं. इसमें वह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से अपनी चीजें भेजते हैं और बाहर के देशों से भी उन्हें ऑर्डर आते हैं. वह वहां पर भी अपना सामान एक्सपोर्ट करते हैं.
मनसुखभाई का यह भी कहना था कि इस कुम्हार के काम को सीखने के लिए अब कई लोग उनके पास आते हैं. वे कई लोगों को इसका प्रशिक्षण भी देते हैं और ज्यादातर उनमें महिलाएं होती हैं, जो कोई काम नहीं जानती हैं और इस कला को सीखना चाहती हैं, जिससे वह अपना रोजगार कमा सकें. अगर कोई भी मिट्टी की कोई चीज खरीदना चाहता है या फिर कुछ भी बनाना सीखना चाहता है, तो वह उन्हें mitticool.com वेबसाइट के जरिए संपर्क कर सकता है। Mansukhbhai Prajapati