RSS की 3 दिवसीय बैठक में हुई कई बड़ी चर्चा, सीमा पार गतिविधियों पर संघ की नजर
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भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 10:23 PM
RSS : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रचारक बैठक रविवार को दिल्ली के केशवकुंज स्थित कार्यालय में संपन्न हुई। RSS की यह महत्वपूर्ण बैठक 4 जुलाई से 6 जुलाई तक चली जिसमें संगठन के भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने के साथ-साथ कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी खुलकर विचार-विमर्श किया गया। RSS की इस वार्षिक बैठक में संघ के 11 क्षेत्रों और 46 प्रांतों के प्रचारक मौजूद रहे। RSS की बैठक का नेतृत्व RSS प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने किया।
शताब्दी वर्ष की तैयारियां बनीं मुख्य धुरी
RSS 2025 में अपने स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। इस अवसर को भव्य और प्रभावी बनाने के लिए अक्टूबर से देशभर में शुरू होने वाले विविध आयोजनों की रूपरेखा इस बैठक में तय की गई। शताब्दी वर्ष को सामाजिक समरसता, राष्ट्र सेवा और वैचारिक जागरूकता के केंद्र बिंदु के रूप में प्रस्तुत करने की योजना पर चर्चा हुई।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी रहे चर्चा में
सूत्रों के अनुसार, बैठक में कनाडा और अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हो रहे हमलों, बांग्लादेश में हिंदू व अन्य अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और अवैध घुसपैठ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा हुई। संघ का मानना है कि ये घटनाएं सिर्फ धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करतीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय सभ्यता और संस्कृति के खिलाफ एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा भी हो सकती हैं।
धर्मांतरण और अवैध घुसपैठ पर चिंता
बैठक में विशेष रूप से उत्तर-पूर्व और सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे धर्मांतरण और बांग्लादेश से भारत में अवैध रूप से आ रहे घुसपैठियों के मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई। संघ के प्रचारकों ने जमीनी अनुभव साझा किए और स्थानीय स्तर पर इसके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव पर प्रकाश डाला। हाल ही में चर्चा में आए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे राज्यों में जो परिस्थितियां बनीं उन पर भी संघ के प्रचारकों ने विस्तार से चर्चा की। ऐसे आपातकालीन हालात में संघ कार्यकर्ताओं की भूमिका, राहत कार्य और जनजागरण जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
डिजिटल युग में पारिवारिक मूल्यों पर मंडराता संकट
बैठक में एक खास मुद्दा डिजिटल तकनीक के प्रभाव को लेकर भी उठा। सोशल मीडिया और अत्यधिक मोबाइल उपयोग के कारण पारिवारिक रिश्तों में आ रही दूरी पर चिंता जताई गई। प्रचारकों ने सुझाव दिया कि समाज को डिजिटल संतुलन की दिशा में प्रेरित करने की जरूरत है ताकि पारिवारिक ताने-बाने को सुरक्षित रखा जा सके।
सामाजिक समरसता पर भी चर्चा
RSS की इस बैठक में देश के वर्तमान राजनीतिक माहौल पर भी मंथन हुआ। विशेष रूप से भाषा, जाति और क्षेत्रीय भेदभाव से पैदा हो रही दरारों को दूर करने, और सामाजिक समरसता को मजबूत करने पर जोर दिया गया। संघ का मानना है कि समाज के हर वर्ग को जोड़ने और एकता के सूत्र में पिरोने के प्रयास तेज होने चाहिए। RSS