कभी नहीं पिघलती शहादत, 16 साल बाद सेना के जवान अमरीश त्यागी का पार्थिव शरीर पहुंचा मुरादनगर
भारत
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 12:27 PM
गाजियाबाद। 16 साल पहले सतोपंथ आरोहण के दौरान लापता हुए सेना के जवान अमरीश त्यागी का पार्थिव शरीर आज पूरे सैन्य सम्मान के साथ मुरादनगर पहुंचा। सेना की गाड़ी में लाए गए जवान का पार्थिव शरीर जैसे ही मुरादनगर पहुंचा तो क्षेत्र के लोगों की आंखों से आंसू निकल आए। भारत माता के जयकारों के साथ क्षेत्रवासियों ने अपने जवान के पार्थिव शरीर का स्वागत किया। फूलों से सजी सेना की गाड़ी को युवाओं ने घेरा बनाया हुआ था और साथ-साथ चल रहे थे। उधर, सोमवार को उत्तरकाशी में सेना के जवान अमरीश त्यागी के पार्थिव शरीर को गार्ड आफ आॅनर दिया गया था।
बता दें कि वर्ष 2005 में गंगोत्री हिमालय की सबसे ऊंची चोटी सतोपंथ पर तिरंगा फहराकर सेना का जवान अमरीश त्यागी लौट रहा था। रास्ते में पैर फिसलने के कारण वह व उनके तीन अन्य साथी गहरी खाई में गिर गए थे। उस दौरान एक जवान का शव नहीं मिला था। अब 16 साल बाद लापता उस जवान का शव मिला है। उस जवान का नाम ही अमरीश त्यागी है। अमरीश त्यागी गाजियाबाद जिले के मुरादनगर के गांव हिसाली के रहने वाले थे। डेढ़ दशक बाद अमरीश त्यागी का शव मिलने के बाद परिजनों के पुराने जख्म ताजा हो गए। बेटे के अंतिम दर्शन करने के इंतजार में माता-पिता की आंखे पथरा गई थीं और व इंतजार करते-करते चार वर्ष पहले स्वर्ग सिधार गए थे। 23 सितंबर को आर्मी के खोजी दल को बरामद हुए सेना के जवान अमरीश त्यागी की ड्रेस, नेम प्लेट और शव भी काफी हद तक सुरक्षित मिला।
25 सितंबर को आर्मी मुख्यालय ने दी थी अमरीश त्यागी के बारे में सूचना
आर्मी मुख्यालय नई दिल्ली द्वारा मुरादनगर के गांव हिसाली में परिजनों को अमरीश त्यागी के पार्थिव शरीर के मिल जाने की खबर दी थी। आर्मी के जवानों का एक दल जब गांव हिसाली अमरीश त्यागी के घर पहुंचा था तब उन्हें अमरीश त्यागी के भाई विनेश और रामकिशोर मिले थे। अमरीश त्यागी के तीन भाई हैं। अमरीश त्यागी के दो भाई गांव हिसाली में ही रहकर खेतीबाड़ी करते हैं जबकि एक भाई चंडीगढ़ आर्डिनेंस फैक्ट्री में कार्यरत है।
आज सुबह पहुंचा अमरीश त्यागी का पार्थिव शरीर
आज सुबह जैसे ही सेना की गाड़ी अमरीश त्यागी का पार्थिव शरीर को लेकर मुरादनगर पहुंची तो लोगों को सैलाब उमड़ पड़ा। देश की सेवा में अपनी जान न्यौछावर करने वाले अमरीश त्यागी के पार्थिव शरीर को लेकर आई सेना की गाड़ी पर फूलों की वर्षा की। बता दें कि 2005 में अमरीश त्यागी लापता हो गए थे तब 2006 में सेना ने अमरीश त्यागी को मृत घोषित कर दिया था। अमरीश त्यागी की पत्नाी को आर्थिक सहायता प्रदान की थी।
12 सितंबर 2005 को तिरंगा फहराने उत्तराकाशी से निकले थे सेना के जवान
12 सितंबर 2005 को भारतीय सेना का 25 सदस्यों का एक दल स्वर्णिम अवसर के मौके पर सतोपंथ चोटी पर तिरंगा फहराने के लिए उत्तरकाशी से निकले थे। हिमालय रेंज के बीच गंगोत्री नेशनल पार्क की दूसरी सबसे बड़ी चोटी बताई जाती है। इस चोटी की ऊंचाई 7075 है।
सपाइयों ने दी शहीद अमरीश त्यागी का श्रद्धांजलि
गांव हिसाली पहुंचकर सपा के महानगर अध्यक्ष राहुल चौधरी व अन्य कार्यकर्ताओं ने शहीद अमरीश त्यागी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि शहादत कभी नहीं पिघलती है। 16 साल बाद अमरीश त्यागी का पार्थिव शरीर मिला है। अमरीश त्यागी द्वारा भारत माता की रक्षा और उसके सम्मान के लिए दिए गए योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य अमित त्यागी, विकास यादव, नितिन त्यागी, शैलेश शर्मा, रतन प्रकाश गोस्वामी, आकाश अग्रवाल, बिट्टू त्यागी, कमल जाटव आदि मौजूद रहे।