बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन! जल्द लागू होगा नया नियम
बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य, उनकी सुरक्षा और ऑनलाइन आदतों को देखते हुए भारत सरकार और कुछ राज्य सरकारें सोशल मीडिया पर बच्चों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नए कदम उठा रही हैं। जल्द ही इसके लिए नए कानून और नियम लागू किए जा सकते हैं।

आजकल बच्चे इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से बहुत जल्दी जुड़ जाते हैं। हालांकि यह उन्हें जानकारी और मनोरंजन के नए अवसर देता है लेकिन विशेषज्ञों और सरकार की नजर में इसके साथ जोखिम भी जुड़े हैं। बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य, उनकी सुरक्षा और ऑनलाइन आदतों को देखते हुए भारत सरकार और कुछ राज्य सरकारें सोशल मीडिया पर बच्चों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नए कदम उठा रही हैं। जल्द ही इसके लिए नए कानून और नियम लागू किए जा सकते हैं।
उम्र के हिसाब से तय होंगे नियम
केंद्र सरकार बच्चों के लिए सोशल मीडिया को पूरी तरह बैन करने के पक्ष में नहीं है। इसके बजाय एक ग्रेडेड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पर विचार किया जा रहा है। इसमें अलग-अलग उम्र के बच्चों के लिए अलग-अलग नियम तय किए जाएंगे। प्रस्तावित योजना के अनुसार बच्चों को तीन आयु वर्गों में बांटा गया है: 8 से 12 साल, 12 से 16 साल, और 16 से 18 साल। सबसे छोटे बच्चों के लिए सबसे कड़े नियम होंगे जबकि बड़े किशोरों के लिए नियम थोड़े ढीले रहेंगे।
हो सकती है नाइट कर्फ्यू की व्यवस्था
समय और पहुंच पर पाबंदी सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा। नए कानून के तहत तय किया जा सकता है कि बच्चे दिन में कितने घंटे सोशल मीडिया इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा नाइट कर्फ्यू की व्यवस्था भी हो सकती है जिससे बच्चे रात के समय प्लेटफॉर्म पर लॉग-इन न कर सकें। पेरेंटल कंसेंट भी अनिवार्य बनाया जा सकता है यानी नाबालिगों के अकाउंट बनाने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी।
कंपनियों को भी नए सुरक्षा फीचर्स लगाना होंगे
सोशल मीडिया कंपनियों को भी नए सुरक्षा फीचर्स लगाना होंगे। इसका मकसद होगा कि प्लेटफॉर्म बच्चों की उम्र की पहचान कर सके और उनके लिए उपयुक्त कंटेंट ही दिखाए। यह कदम डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की राज्य सरकारें पहले ही इस दिशा में कदम उठा रही हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2026-27 के बजट में घोषणा की कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अगले 90 दिनों में 13 या 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध पर विचार करने का संकेत दिया।
पाबंदियों पर उठाए गए सवाल
हालांकि, बड़ी तकनीकी कंपनियों और डिजिटल अधिकार संगठनों ने इन पाबंदियों पर सवाल उठाए हैं। कंपनियों का तर्क है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम लागू करना मुश्किल होगा। इसके अलावा, बैन की वजह से बच्चे सुरक्षित प्लेटफॉर्म छोड़कर अनरेगुलेटेड साइट्स की ओर भी जा सकते हैं। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन का मानना है कि केवल बैन लगाने से समस्या हल नहीं होगी। इसके बजाय प्लेटफॉर्म के डिजाइन, डेटा सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता पर ध्यान देना ज्यादा प्रभावी होगा।
दुनियाभर में बढ़ रहा है सोशल मीडिया बैन का चलन
दुनिया भर में बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का चलन बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लागू है। फ्रांस और ग्रीस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया पर रोक है। इंडोनेशिया में 28 मार्च से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर अकाउंट बनाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। भारत भी इस वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा बन रहा है और जल्द ही अपने नियमों के साथ इसे लागू करने की तैयारी में है।
आजकल बच्चे इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से बहुत जल्दी जुड़ जाते हैं। हालांकि यह उन्हें जानकारी और मनोरंजन के नए अवसर देता है लेकिन विशेषज्ञों और सरकार की नजर में इसके साथ जोखिम भी जुड़े हैं। बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य, उनकी सुरक्षा और ऑनलाइन आदतों को देखते हुए भारत सरकार और कुछ राज्य सरकारें सोशल मीडिया पर बच्चों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नए कदम उठा रही हैं। जल्द ही इसके लिए नए कानून और नियम लागू किए जा सकते हैं।
उम्र के हिसाब से तय होंगे नियम
केंद्र सरकार बच्चों के लिए सोशल मीडिया को पूरी तरह बैन करने के पक्ष में नहीं है। इसके बजाय एक ग्रेडेड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पर विचार किया जा रहा है। इसमें अलग-अलग उम्र के बच्चों के लिए अलग-अलग नियम तय किए जाएंगे। प्रस्तावित योजना के अनुसार बच्चों को तीन आयु वर्गों में बांटा गया है: 8 से 12 साल, 12 से 16 साल, और 16 से 18 साल। सबसे छोटे बच्चों के लिए सबसे कड़े नियम होंगे जबकि बड़े किशोरों के लिए नियम थोड़े ढीले रहेंगे।
हो सकती है नाइट कर्फ्यू की व्यवस्था
समय और पहुंच पर पाबंदी सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा। नए कानून के तहत तय किया जा सकता है कि बच्चे दिन में कितने घंटे सोशल मीडिया इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा नाइट कर्फ्यू की व्यवस्था भी हो सकती है जिससे बच्चे रात के समय प्लेटफॉर्म पर लॉग-इन न कर सकें। पेरेंटल कंसेंट भी अनिवार्य बनाया जा सकता है यानी नाबालिगों के अकाउंट बनाने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी।
कंपनियों को भी नए सुरक्षा फीचर्स लगाना होंगे
सोशल मीडिया कंपनियों को भी नए सुरक्षा फीचर्स लगाना होंगे। इसका मकसद होगा कि प्लेटफॉर्म बच्चों की उम्र की पहचान कर सके और उनके लिए उपयुक्त कंटेंट ही दिखाए। यह कदम डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की राज्य सरकारें पहले ही इस दिशा में कदम उठा रही हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2026-27 के बजट में घोषणा की कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अगले 90 दिनों में 13 या 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध पर विचार करने का संकेत दिया।
पाबंदियों पर उठाए गए सवाल
हालांकि, बड़ी तकनीकी कंपनियों और डिजिटल अधिकार संगठनों ने इन पाबंदियों पर सवाल उठाए हैं। कंपनियों का तर्क है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम लागू करना मुश्किल होगा। इसके अलावा, बैन की वजह से बच्चे सुरक्षित प्लेटफॉर्म छोड़कर अनरेगुलेटेड साइट्स की ओर भी जा सकते हैं। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन का मानना है कि केवल बैन लगाने से समस्या हल नहीं होगी। इसके बजाय प्लेटफॉर्म के डिजाइन, डेटा सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता पर ध्यान देना ज्यादा प्रभावी होगा।
दुनियाभर में बढ़ रहा है सोशल मीडिया बैन का चलन
दुनिया भर में बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का चलन बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लागू है। फ्रांस और ग्रीस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया पर रोक है। इंडोनेशिया में 28 मार्च से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर अकाउंट बनाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। भारत भी इस वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा बन रहा है और जल्द ही अपने नियमों के साथ इसे लागू करने की तैयारी में है।












