
विपक्ष पर हमला करते हुए मायावती(Mayawati) ने हुए आरोप लगाया कि कुछ जातिवादी और परिवारवादी पार्टियां बसपा को समाप्त करने की साजिश रच रही हैं, लेकिन वह इसे सफल नहीं होने देंगी। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि बसपा में रिश्तों और परिवार से ज्यादा महत्वपूर्ण पार्टी के उद्देश्य और कांशीराम की विचारधारा है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति कांशीराम के सिद्धांतों को मानते हुए पार्टी में काम करेगा, वही आगे बढ़ेगा। मायावती ने कहा कि पार्टी में परिवारवाद को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा और कांशीराम की विचारधारा को ही सर्वोपरि माना जाएगा।
मायावती(Mayawati) ने पार्टी के इतिहास पर भी प्रकाश डाला और बताया कि 2007 में जब उनकी सरकार बनी थी, तब बहुजन समाज के लोगों को समान अधिकार मिले थे। इससे पहले समाज के इस वर्ग को कुर्सी या चारपाई पर बैठने का भी अधिकार नहीं था। यह बदलाव समाज में एक बड़ा परिवर्तन था, जो बहुजन समाज के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन सामाजिक न्याय की दिशा में एक अहम कदम था, जिसे बहुजन समाज के लोग कभी नहीं भूल सकते। मायावती ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने कांशीराम के सपनों को साकार किया और समाज में एक नई जागरूकता लाई।
हाल ही में, मायावती(Mayawati) ने अपने समधी अशोक सिद्धार्थ और भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया था। इस फैसले के बाद उनका यह बयान यूपी के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। जानकारों का मानना है कि मायावती का यह बयान पार्टी को फिर से मजबूत करने और परिवारवाद की राजनीति के आरोपों को मिटाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इस बयान से यह साफ होता है कि मायावती अपनी पार्टी में कांशीराम के विचारों को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही हैं और इसे एक नई दिशा देने का इरादा रखती हैं।Mayawati: