
MBBS seat in India : भारत देश में यह अवधारणा है कि धरती पर डाक्टर (Doctor) दूसरा भगवान होता है। डाक्टर बनना एक मुश्किल काम है। ऊपर से समस्या तब और बढ़ जाती है जब डाक्टर बनने की पढ़ाई कराने वाले मेडिकल कॉलिज कम हों और डाक्टर बनने के इच्छुक युवाओं को डाकटरी की पढ़ाई का मौका ही न मिले। अब भारत में डाक्टर बनना आसान काम होने लगा है। जल्दी ही भारत में सवा लाख डाक्टर हर साल बना करेंगे।
आपको बता दें कि भारत में 10 वर्ष पहले तक मेडिकल की पढ़ाई करने के अवसर बेहद कम हुआ करते थे। वर्ष-2014 तक भारत में कुल 387 मेडिकल कॉलिज थे। इन कॉलिजों में एमबीबीएस..... की पढ़ाई करने के लिए कुल 51 हजार 348 सीट हुआ करती थीं। अब भारत में 695 मेडिकल कॉलिज बन चुके हैं। इस समय भारत में डाक्टरी की उच्च स्तरीय पढ़ाई करने के लिए MBBS की एक लाख 63 हजार 333 सीट उपलब्ध हो चुकी हैं। भारत सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा कर दी है कि वर्ष-2025 तक भारत में 725 मेडिकल कॉलिज हो जाएंगे। साथ ही MBBS की सवा लाख सीट उपलब्ध हो जाएंगी। इसका सीधा सा अर्थ है कि वर्ष-2025 के बाद भारत को हर साल सवा लाख नए डाक्टर मिलने शुरू हो जाएंगे।
आपको यह भी बता दें कि 15 वर्ष पहले तक भारत में आठ हजार की आबादी पर एक डाक्टर हुआ करता था। यह स्थिति बेहद चिंताजनक स्थिति थी। आठ हजार लोगों के ईलाज के लिए एक डाक्टर का होना कष्टदायक हालत को इंगित करता है। खुशी की बात यह है कि अब भारत में 834 लोगों के इलाज के लिए एक डाकटर का आंकड़ा हो चुका है।इस प्रकार भारत में डाक्टरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वर्ष-2025 के बाद भारत में हर साल सवा लाख नए डाक्टर तैयार होने लगेंगे।
आपको यह भी बता दें कि भारत में मेडिकल कॉलिजों, अस्पतालों तथा नर्सिंग होम्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस संख्या के बढऩे के साथ ही भारत में मेडिकल टूरिज्म भी तेजी से बढ़ रहा है। दरअसल, विदेशों में किसी भी बिमारी का ईलाज कराना बहुत महंगा है। जोड व दांत के दर्द जैसी छोटी-मोटी बीमारी के लिए भी लाखों रूपए का खर्च विदेशों में आता है। भारत में इलाज सब जगह उपलब्ध है। साथ-साथ ही भारत में ईलाज कराना बहुत सस्ता भी है। इसी कारण विदेशों से बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भारत में ईलाज कराने आते हैं।
विदेशों से भारत में ईलाज कराने आने वाली व्यवस्था को मेडिकल टूरिज्म कहा जाता है। भारत सरकार के एक आंकड़े के अनुसार भारत में मेडिकल टूरिज्म लगातार बढ़ रहा है। अब तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक कोरोना की महामारी से पहले वर्ष-2020 में भारत को मेडिकल टूरिज्म से 2.89 लाख करोड़ रूपए की आमदनी हुई थी। कोरोना के कारण इस आमदनी में कमी आने लगी थी। मेडिकल टूरिज्म से भारत की कमाई अब दोबारा बढऩे लगी है।