जाने 1587 की वह घटना जिसने यूरोप की राजनीति बदल दी

मैरी पर अपनी चचेरी बहन और इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। एलिजाबेथ ने 1 फरवरी 1587 को मैरी के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले मैरी को पिछले 19 वर्षों तक इंग्लैंड में नजरबंद रखा गया था।

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रानी एलिजाबेथ की हत्या की साजिश या षड्यंत्र? (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar27 Feb 2026 01:11 PM
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History of England : इतिहास के पन्नों में 8 फरवरी 1587 की तारीख हमेशा के लिए दर्ज हो गई, जब स्कॉटलैंड की रानी मैरी को इंग्लैंड के फोदरिंगहे कैसल में एक भयावह फांसी दी गई। यह सिर्फ एक फांसी नहीं थी, बल्कि दो खून के रिश्तों और दो रानियों के बीच चली सत्ता की लड़ाई का खूनी अंत था। रानी मैरी की मौत का यह मंजर इतना भयावह था कि उसने इतिहासकारों को भी झकझोर कर रख दिया था।

तीन वारों से कटा सिर

उस दिन मैरी आंखों पर पट्टी बांधे हुए, विशेष रूप से तैयार किए गए मचान पर एक तकिये पर घुटने टेककर बैठीं और लैटिन भाषा में प्रार्थना करने लगीं। जल्लाद ने कुल्हाड़ी से प्रहार किया, लेकिन दुर्भाग्य से उसका पहला वार चूक गया और वह गर्दन के बजाय सिर पर लगा। दूसरे प्रहार से गर्दन लगभग कट गई, लेकिन एक छोटी सी हड्डी आड़े आ गई। अंततः तीसरे प्रहार में उनका सिर पूरी तरह से धड़ से अलग हो गया।

जल्लाद ने कटा हुआ सिर उठाकर भीड़ के सामने कुल्हाड़ी चलाते हुए चिल्लाया- "ईश्वर महारानी एलिजाबेथ की रक्षा करें!" इसी दौरान एक चौंकाने वाली घटना घटी- सिर पर लगी भूरी विग नीचे गिर गई और मैरी के छोटे-छोटे भूरे बाल सबके सामने आ गए, जो उनकी असली पहचान और बुढ़ापे के प्रतीक बन गए। वहीं, अर्ल ऑफ केंट ने शव के ऊपर खड़े होकर घोषणा की कि रानी और उनके सभी शत्रुओं का यही अंत होता है।

19 साल की नजरबंदी और साजिश का आरोप

मैरी पर अपनी चचेरी बहन और इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। एलिजाबेथ ने 1 फरवरी 1587 को मैरी के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले मैरी को पिछले 19 वर्षों तक इंग्लैंड में नजरबंद रखा गया था। मैरी की मौत का रास्ता तब खुला जब 1586 में एलिजाबेथ की हत्या की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ और मैरी को इसमें शामिल पाए जाने के बाद राजद्रोह का दोषी ठहराया गया।

सिंहासन से गिरकर फांसी तक का सफर

मैरी का जीवन एक उतार-चढ़ाव भरा सफर रहा। 1542 में महज छह दिन की उम्र में उन्होंने स्कॉटलैंड की गद्दी संभाली थी। फ्रांस में पली-बढ़ीं मैरी का विवाह फ्रांस के राजा फ्रांसिस द्वितीय से हुआ, लेकिन विवाह के एक साल बाद ही फ्रांसिस की मृत्यु हो गई। स्कॉटलैंड लौटने के बाद उन्होंने 1565 में अपने चचेरे भाई लॉर्ड डार्नले से शादी कर ली, ताकि अंग्रेजी सिंहासन पर अपना दावा मजबूत किया जा सके।

हालांकि, इस शादी ने उनकी किस्मत का तारा मंद कर दिया। 1567 में डार्नले की रहस्यमय तरीके से हत्या हो गई, जिसमें मैरी के प्रेमी अर्ल ऑफ बोथवेल पर संदेह बना। बोथवेल से शादी करने के फैसले ने स्कॉटिश लॉर्ड्स को भड़का दिया। मैरी को हार का सामना करना पड़ा और उन्हें अपने बेटे जेम्स VI के पक्ष में सिंहासन छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

बेटे की चुप्पी और आखिरी फैसला

1568 में कैद से भागकर मैरी इंग्लैंड पहुंचीं, लेकिन यहां एलिजाबेथ ने उन्हें सुरक्षा के बहाने नजरबंद कर लिया। मैरी कैथोलिक साजिशों का केंद्र बनती चली गईं, जिसके चलते अंततः उन्हें मौत की सजा दी गई। सबसे विडंबना यह रही कि मैरी की मौत के बाद उनके बेटे जेम्स VI ने इसे शांतिपूर्वक स्वीकार किया और किसी भी तरह की बगावत या विरोध से परहेज किया। इतिहास गवाह है कि 1603 में एलिजाबेथ की मृत्यु के बाद यही जेम्स इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और आयरलैंड का राजा बना। इस तरह, मां के खून की कीमत पर बेटे को तीनों देशों का सिंहासन मिला। History of England

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झंडों में लाल, सफेद और नीले रंगों का कब्जा क्यों है? जानें इतिहास का राज

इतिहास में झंडों का इस्तेमाल जहाजों पर और लड़ाई के मैदानों में सबसे ज्यादा होता था। ऐसे में 'विजिबिलिटी' (दृश्यता) का होना बेहद जरूरी था। लाल, सफेद और नीला रंग आपस में मिलकर एक मजबूत कंट्रास्ट (विरोधाभास) बनाते हैं।

Flag Colors Meaning
यही है झंडों की लोकप्रियता का राज (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar27 Feb 2026 11:19 AM
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Flag Colors Meaning: अगर आप ध्यान से दुनिया के नक्शे या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगे झंडों को देखें, तो आपको एक खास पैटर्न जरूर नजर आएगा। दरअसल, दुनिया के ज्यादातर देशों के झंडों में लाल, सफेद और नीले रंग का बोलबाला है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन तीनों रंगों को इतनी तरजीह क्यों दी जाती है? क्या यह सिर्फ एक संयोग है या फिर इसके पीछे कोई गहरा इतिहास और वजह है? आइए, जानते हैं इस सवाल का जवाब।

रंगों की टिकाऊ खासियत और मुश्किलें

इसका सबसे बड़ा कारण पुराने समय की तकनीकी मुश्किलें हैं। मध्यकालीन दौर (मिडिल एज) में पक्के रंग बनाना काफी मुश्किल और महंगा हुआ करता था। ऐसे में लाल और नीले रंग सबसे ज्यादा टिकाऊ माने जाते थे। ये रंग तेज धूप, बारिश और खराब मौसम के बावजूद आसानी से फीके नहीं पड़ते थे। वहीं, सफेद रंग बनाना भी आसान था; कपड़े को ब्लीच (सफेद) करके आसानी से सफेद झंडा तैयार किया जा सकता था। इसके विपरीत, पीले या काले जैसे रंगों को लंबे समय तक बनाए रखना न सिर्फ मुश्किल था, बल्कि इन्हें बनाना भी काफी महंगा पड़ता था।

दूर से पहचानना था आसान

इतिहास में झंडों का इस्तेमाल जहाजों पर और लड़ाई के मैदानों में सबसे ज्यादा होता था। ऐसे में 'विजिबिलिटी' (दृश्यता) का होना बेहद जरूरी था। लाल, सफेद और नीला रंग आपस में मिलकर एक मजबूत कंट्रास्ट (विरोधाभास) बनाते हैं। इस वजह से लंबी दूरी से या फिर खराब मौसम में भी इन झंडों को पहचानना आसान हो जाता था, जो किसी भी सेना या जहाज के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद था।

शक्तिशाली देशों का प्रभाव

इतिहास के कुछ शक्तिशाली देशों ने इन रंगों को अपनाने के बाद दुनिया भर में इसे लोकप्रिय बनाया।

  • नीदरलैंड:16वीं सदी में नीदरलैंड लाल, सफेद और नीले तिरंगे को अपनाने वाले पहले देशों में से एक था।
  • फ्रांस: फ्रांस का तिरंगा फ्रांसीसी क्रांति के दौरान आजादी, बराबरी और लोकतंत्र (डेमोक्रेसी) का प्रतीक बन गया। इसके बाद कई देशों ने अपने आजादी के आंदोलन और लोकतांत्रिक आदर्शों को दिखाने के लिए इसी कलर स्कीम को अपनाया।
  • ब्रिटेन: यूनाइटेड किंगडम का 'यूनियन जैक', जिसमें ये तीनों रंग हैं, ने कई पुरानी ब्रिटिश कॉलोनी के झंडों पर गहरा असर डाला। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अन्य कई देशों ने आजादी मिलने के बाद भी अपनी राष्ट्रीय पहचान के हिस्से के तौर पर इन रंगों को बनाए रखा।

सार्वभौमिक मूल्यों का प्रतीक

इन रंगों का चुनाव सिर्फ व्यावहारिक कारणों से नहीं, बल्कि उनके प्रतीकात्मक महत्व के कारण भी होता है। ये रंग सार्वभौमिक मूल्यों (यूनिवर्सल वैल्यूज) को दर्शाते हैं:

  • लाल रंग:यह हिम्मत, त्याग और ताकत की निशानी है।
  • सफेद रंग:यह शांति, पवित्रता और ईमानदारी का प्रतीक है।
  • नीला रंग:यह न्याय, स्थिरता और सावधानी को दर्शाता है। Flag Colors Meaning

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स्वतंत्रता सेनानियों की याद में बने 'राष्ट्र मंदिर' का हुआ भव्य उद्घाटन

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राष्ट्र मंदिर के उद्घाटन को सफल (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar26 Feb 2026 06:28 PM
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Rashtra Mandir : ऐतिहासिक नवलखा महल में सत्यार्थ प्रकाश न्यास के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय आर्य सम्मेलन का भव्य समापन स्वतंत्रता सेनानियों की याद में बने 'राष्ट्र मंदिर' के उद्घाटन के साथ हुआ। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण इसी 'राष्ट्र मंदिर' का उद्घाटन रहा, जिसे एमडीएच के अध्यक्ष महाशय राजीव गुलाटी ने किया। इस अवसर पर एमडीएच के अध्यक्ष महाशय राजीव गुलाटी ने कहा कि यह तीर्थ स्थल दीर्घकाल तक देश के स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता रहेगा। उन्होंने कहा, "यह मंदिर नई पीढ़ी को हमारे वीर सेनानियों के बलिदान से अवगत कराएगा और उनमें देशभक्ति की भावना जगाएगा।" उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए वीरों को नमन करते हुए इस पहल की सराहना की।

युवाओं पर राष्ट्र का भविष्य निर्भर: अनिल आर्य

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महर्षि दयानन्द की तपोभूमि का महत्व

उल्लेखनीय है कि नवलखा महल उदयपुर वह पावन स्थल है, जहां रहकर महर्षि दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज के मूल ग्रंथ 'सत्यार्थ प्रकाश' की रचना की थी। इस ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए इस सम्मेलन में देशभर से बड़ी संख्या में आर्य प्रतिनिधि शामिल हुए।

विशिष्ट उपस्थिति एवं संचालन

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद स्वामी सुमेधा नंद सरस्वती ने की, जबकि कुशल संचालन अशोक आर्य ने किया। इस दौरान प्रमुख रूप से सांसद एवं विधायक ताराचंद जैन, जीव वर्धन शास्त्री, विमलेश बंसल एवं विनोद बंसल आदि गणमान्य लोगों ने अपने शुभकामनाएं व विचार व्यक्त किए। Rashtra Mandir

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