
Mission Chandrayaan 3[/caption]
चंद्रयान 3 चांद को लेकर इसरो का तीसरा अंतरिक्ष अभियान है। इस कार्यक्रम को भारतीय चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम के नाम से भी जाना जाता है। इसके अंतर्गत पहले भी चंद्रयान और चंद्रयान 2 भेजे जा चुके हैं। भारत ने अपना पहला चंद्र अभियान चंद्रयान (Chandrayaan) 2008 में भेजा था। उस पर एक ऑर्बिटर और इम्पैक्ट प्रोब भी था, लेकिन यह शेकलटन क्रेटर के पास क्रैश हो गया था।
Mission Chandrayaan 3 तब अपने प्रक्षेपण के 312 दिन बाद उसका संपर्क धरती से टूट गया, लेकिन इससे संपर्क टूटने से पहले इस अभियान का 95 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया। इस मिशन के साथ ही भारत चांद पर अपना झंडा फहराने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया था। उससे पहले अमेरिका, रूस और जापान ये कामयाबी हासिल कर चुके थे।
इसके बाद 2019 में चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) को लॉन्च किया गया था। इस को ऑर्बिटर, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के साथ प्रक्षेपित किया गया। लेकिन जब इसने चांद की सतह पर सॉफ़्ट लैंडिंग की कोशिश की, तो विक्रम लैंडर से इसरो का संपर्क टूट गया। 3 महीने बाद नासा के उपग्रह ने इसके मलबे को ढूंढा और इसकी तस्वीर जारी की।
हालांकि विक्रम लैंडर भले ही असफल रहा हो, लेकिन ऑर्बिटर चंद्रमा और इसके वातावरण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां इकट्ठा करता रहा। हालांकि तब मिली मिश्रित सफलता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक बहुत बड़ा क़दम थी। चंद्रयान- 2 को भेजने का उद्देश्य भी चांद पर पानी के कण को ढूंढने का ही था।
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