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देश की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े संवैधानिक बदलावों को लेकर हलचल तेज हो सकती है। केंद्र सरकार एक बार फिर ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ (ONOE) और परिसीमन (Delimitation) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटी बताई जा रही है।

One Nation One Election : देश की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े संवैधानिक बदलावों को लेकर हलचल तेज हो सकती है। केंद्र सरकार एक बार फिर ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ (ONOE) और परिसीमन (Delimitation) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटी बताई जा रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हालिया चुनावी समीकरणों में आए बदलाव के बाद भारतीय जनता पार्टी इन दोनों प्रस्तावों को लेकर नई रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों का दावा है कि केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एक देश-एक चुनाव संबंधी विधेयक को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर सकती है। साथ ही, परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को भी नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। इससे पहले संसद में इस विषय पर विपक्ष के कड़े विरोध के कारण सरकार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया था। One Nation One Election
लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण से जुड़े परिसीमन प्रस्ताव को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर आपत्तियां जताई थीं। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (DMK) समेत कई दलों का तर्क था कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण दक्षिण भारतीय राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है। विपक्ष का यह भी कहना था कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय को परिसीमन से जोड़ने से अनावश्यक राजनीतिक विवाद पैदा हुआ। इसी वजह से संसद में इस मुद्दे पर व्यापक सहमति नहीं बन सकी थी। One Nation One Election
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हालिया चुनावी नतीजों के बाद भाजपा क्षेत्रीय दलों के रुख पर बारीकी से नजर रखे हुए है। विशेष रूप से DMK और TMC को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि कुछ राष्ट्रीय मुद्दों पर DMK भविष्य में अपनी रणनीति परिस्थितियों के अनुसार तय कर सकती है। वहीं पश्चिम बंगाल में चुनावी झटके के बाद TMC के भीतर उभरे मतभेद भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। One Nation One Election
एक देश-एक चुनाव प्रस्ताव पर गठित संसदीय समिति भी अपनी समीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। माना जा रहा है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार इस दिशा में अगले कदम उठा सकती है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, इस व्यवस्था को एक साथ पूरे देश में लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू करने का विकल्प भी विचाराधीन है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात, गोवा, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे राज्यों के आगामी विधानसभा चुनाव इस रणनीति का आधार बन सकते हैं। One Nation One Election
तमिलनाडु की राजनीति में प्रभाव रखने वाले नेताओं का कहना है कि उनकी प्राथमिकता हमेशा राज्य के हितों और अधिकारों की रक्षा रही है। पार्टी का मानना है कि यदि परिसीमन की प्रक्रिया में दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को नुकसान नहीं पहुंचता और उनकी मौजूदा हिस्सेदारी सुरक्षित रहती है, तो किसी भी प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने फिलहाल भाजपा के साथ किसी राजनीतिक गठजोड़ की संभावना से इनकार किया है। उनका कहना है कि भविष्य की रणनीति उस समय के राजनीतिक हालात और राज्य हितों को ध्यान में रखकर तय की जाएगी। वहीं कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन और एक देश-एक चुनाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आगे बढ़ने से पहले सरकार को सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा करनी चाहिए। पार्टी का मानना है कि संवैधानिक बदलावों के लिए राजनीतिक सहमति और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है। One Nation One Election
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