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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ी घोषणा कर दी है। RSS प्रमुख की इस घोषणा को RSS में बदले हुए युग के रूप में देखा जा रहा है। RSS अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर चुका है। इन दिनों भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में RSS का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है।

Mohan Bhagwat : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ी घोषणा कर दी है। RSS प्रमुख की इस घोषणा को RSS में बदले हुए युग के रूप में देखा जा रहा है। RSS अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर चुका है। इन दिनों भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में RSS का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। RSS के शताब्दी वर्ष के सिलसिले में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
RSS का राष्ट्रीय मुख्यालय महाराष्ट्र के नागपुर शहर में है। नागपुर में शुक्रवार को RSS का बड़ा आयोजन हुआ। RSS के इस आयोजन में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भविष्य में RSS के अलग-अलग 86 संभाग बनाए जाएंगे। वर्तमान में RSS के 46 प्रांत हैं। इन 46 प्रांतों को 86 संभाग में बदलकर RSS के संगठन में बड़ा बदलाव किया जाएगा। इसके साथ ही संघ प्रमुख मोहन भागवत ने यह घोषणा भी कर दी है कि RSS के संगठन का स्वरूप जरूर बदलेगा किन्तु RSS का काम तथा काम करने का तरीका बिल्कुल भी नहीं बदला जाएगा।
नागपुर के कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी उन विचारधाराओं की ओर आकर्षित होती है, जिसमें राष्ट्र सेवा की भावना हो। उन्होंने कहा कि RSS को अच्छे कामों के लिए इंटरनेट मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की आवश्यकता है। जब उनसे पूछा गया कि RSS ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर हाल ही में संगठन में क्या बड़े बदलाव किए हैं, इस पर उन्होंने कहा कि RSS का कार्य बड़े स्तर पर बढ़ा है। इसलिए अब विकेंद्रीकरण की जरूरत है।
भागवत ने कहा कि छोटी-छोटी इकाइयां जरूरी कामों को ज्यादा कुशलता से संभालेंगी, जबकि मित्रता रखने और स्वयं मिसाल बनकर नेतृत्व करने का मूल तरीका पहले जैसा ही रहेगा। उन्होंने कहा कि चूंकि RSS से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं, इसलिए स्वयंसेवकों को भी अब ज्यादा परिश्रम करना होगा। इसलिए अब और भी छोटी-छोटी इकाइयां बनाई जाएंगी। जो काम पहले ऊपरी स्तर से होता था, वह अब ये छोटी इकाइयां करेंगी। जब कोई संगठन बड़ा होता है तो यह एक स्वाभाविक बदलाव है। उन्होंने कहा कि अब आरएसएस में 46 प्रांतों (प्रशासनिक इकाइयों) के बजाय 86 संभाग होंगे।उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS के काम करने का ढंग नहीं बदलेगा। यह पहले जैसा ही रहेगा। काम करने का वह तरीका है मित्रता करना और स्वयं मिसाल बनकर बदलाव लाना। जब उनसे पूछा गया कि विपरीत परिस्थितियों में भी संघ का विस्तार कैसे हुआ तो उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन के विस्तार में प्रचार-प्रसार से मदद मिल सकती है, लेकिन RSS की असली ताकत कुछ और ही है। संघ का विस्तार ऐसे माध्यमों से नहीं होता। इसका विस्तार इसके काम और इसके कार्यकर्ताओं के बीच आपसी स्नेह से होता है। Mohan Bhagwat