हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में आसमानी कहर : भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ ने मचाई तबाही
भारत
RP Raghuvanshi
30 Aug 2025 01:10 PM
पहाड़ी राज्यों में मानसून का कहर अब भी जारी है। जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में लगातार भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं से तबाही मची है। अब तक 70 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, सैकड़ों लोग लापता हैं, और हजारों घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। Monsoon Havoc :
प्रभावित जिले और मौतों का विवरण
* जम्मू-कश्मीर: कुल 54 मौतें
* कटरा: 34
* रियासी: 7
* रामबन: 3
* जम्मू जिले में 5 (1 आर्मी, 1 बीएसएफ जवान शामिल)
* डोडा: 4
* कठुआ: 1
* उत्तराखंड: शुक्रवार को 6 मौतें, 11 लापता
* बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और बागेश्वर में भारी नुकसान
* हिमाचल प्रदेश (चंबा): 10 मौतें, 8 घायल, 4 लापता
प्राकृतिक आपदा का स्वरूप
रामबन के राजगढ़ क्षेत्र में बादल फटने से मकान जमींदोज हो गया। रियासी के माहौर इलाके में भूस्खलन से सात लोगों की मौत हो गई। चमोली में मोपाटा गांव में पति-पत्नी मलबे में दब गए। वहीं बागेश्वर के पौसारी गांव में दो महिलाओं की मौत और तीन लोग लापता हो गए। उत्तराखंड : बागेश्वर, चमोली, देहरादून, रुद्रप्रयाग जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट किया गया है। चंपावत, हरिद्वार, पिथौरागढ़, उधमसिंह नगर, उत्तरकाशी जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। अलकनंदा, मंदाकिनी और अन्य नदियों में जलस्तर बढ़ने से सड़कों पर वाहनों का आवागमन रोकना पड़ा।
तबाही का पैमाना
इस मानसून के कहर के कारण कई घर बह गए, मवेशी और फसलें बर्बाद हो गई। टिहरी और चंबा में कई गांवों तक संपर्क टूट गया, राहत कार्य प्रभावित हो गया है। भरमौर विधानसभा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित, खाद्य और जरूरी सामान केवल चार दिन बाद पहुंच सका है। मोबाइल नेटवर्क कई हिस्सों में बहाल हुआ, लेकिन भरमौर और आसपास इलाकों में अब भी संचार सुविधा की भारी मुश्किल है।
पैदल चलकर बचाव और राहत पहुंचाने की कोशिशें जारी है। पहाड़ी राज्यों में मौसम का कहर और बाढ़-भूस्खलन ने जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। राहत एवं बचाव कार्य तेज करने की तत्काल आवश्यकता है।