मानसून में नहीं पड़ना बीमार? तो इन 7 चीजों को बना लें अपना दोस्त!
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 01:39 PM
मानसून आते ही मौसम में नमी बढ़ जाती है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपने लगते हैं। ऐसे समय में हमारा पाचन तंत्र थोड़ा कमजोर हो जाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी गिरने लगती है। नतीजा ये होता है कि मामूली सी ठंडी हवा या भीग जाने से सर्दी-जुकाम, बुखार, पेट दर्द, गैस जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। लेकिन अगर आप आयुर्वेद की सलाह मानें और सही खानपान को अपनाएं, तो आप इन समस्याओं से आसानी से बच सकते हैं।
गुड़ – मीठा लेकिन औषधीय गुणों से भरपूर
गांवों में एक कहावत प्रचलित है – "सावन गुड़ खावे, चाहे मुहर बराबर आवे।" इसका अर्थ है कि सावन के महीने में गुड़ जरूर खाना चाहिए, चाहे वह कितना भी महंगा क्यों न हो। बारिश में शरीर में पित्त बढ़ने की संभावना रहती है और गुड़ इस पित्त को शांत करने में मदद करता है। इसके अलावा यह पाचन शक्ति को बढ़ाता है और शरीर को भीतर से गर्मी प्रदान करता है, जिससे मानसून में होने वाली बीमारियों से बचाव होता है।
काली मिर्च – मानसून की प्राकृतिक दवा
काली मिर्च न सिर्फ स्वाद बढ़ाती है, बल्कि ये एक शक्तिशाली औषधि भी है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो शरीर को संक्रमण से बचाते हैं। बारिश के मौसम में काली मिर्च का सेवन सर्दी-जुकाम, खांसी और बलगम जैसी समस्याओं में राहत देता है। चाय, काढ़े या सब्जियों में इसे शामिल करना एक अच्छा उपाय हो सकता है।
पाचन के पहरेदार – जीरा, अजवाइन और सोंठ
मानसून में सबसे ज्यादा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि हम ऐसे मसालों का सेवन करें जो अपच, गैस और भारीपन जैसी समस्याओं को दूर करें। जीरा, अजवाइन और सोंठ ऐसे ही तीन मसाले हैं जो इस काम में बेहद कारगर हैं। ये तीनों तत्व पेट को हल्का रखते हैं, भोजन को जल्दी पचाने में मदद करते हैं और पेट की सूजन को भी कम करते हैं।
देसी घी – शरीर की आंतरिक नमी के लिए
देसी घी को आयुर्वेद में ‘सत्व’ माना गया है। बारिश के मौसम में जब त्वचा और शरीर दोनों रूखे होने लगते हैं, तब देसी घी शरीर को अंदर से पोषण देता है। यह न केवल जोड़ो की चिकनाई बनाए रखता है बल्कि शरीर को ताकत भी देता है। भोजन में थोड़ा सा देसी घी जरूर शामिल करें, खासकर बुजुर्गों के लिए यह बेहद लाभकारी होता है।
तिल का तेल है फायदेमंद
मानसून के दौरान तिल का तेल शरीर को संक्रमणों से बचाने में सहायक होता है। यह तेल खाने में भी अच्छा है और शरीर पर मालिश करने के लिए भी। इसकी गर्म प्रकृति शरीर में संतुलन बनाए रखती है और त्वचा को नमी प्रदान करती है। साथ ही यह त्वचा संक्रमण से भी रक्षा करता है जो मानसून में आम होते हैं।
हींग – छोटे से मसाले में बड़ी ताकत
हींग एक ऐसा मसाला है जो हर भारतीय रसोई में मिलता है, लेकिन इसके गुणों को बहुत कम लोग जानते हैं। मानसून में हींग का सेवन गैस, पेट दर्द और अपच से राहत दिलाता है। जब बाकी मसाले पचने में भारी हो सकते हैं, तब हींग हल्की और असरदार होती है। दाल और सब्जियों में हींग का तड़का सेहत के लिए वरदान बन सकता है।
सेंधा नमक – आयोडीन से आगे की सोच
आम नमक की जगह अगर आप सेंधा नमक का इस्तेमाल करें, तो यह आपके पाचन में सुधार लाता है और शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखता है। यह खनिजों से भरपूर होता है और शरीर को अतिरिक्त पानी रोकने से बचाता है, जिससे सूजन और थकावट जैसी समस्याएं कम होती हैं।
मानसून में बीमारियों से बचाव केवल सावधानी से नहीं, बल्कि समझदारी से भी होता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से देखें तो मौसम के अनुसार भोजन करना ही सबसे बेहतर तरीका है। ऊपर बताए गए सात आयुर्वेदिक तत्व ना केवल आपको बीमारियों से दूर रखते हैं, बल्कि शरीर को मजबूत और ऊर्जावान भी बनाते हैं। इस बारिश के मौसम में इन्हें अपनी थाली में शामिल करें और सेहतमंद मानसून का आनंद लें।
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