MP Husband Murder Cases: इन आंकड़ों के आधार पर मध्य प्रदेश को देश में दूसरे स्थान पर बताया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में इसी अवधि में 93 मामलों का दावा किया गया है।

मध्य प्रदेश में पुरुषों से जुड़े मामलों को लेकर सामने आए आंकड़ों ने एक बार फिर बहस तेज कर दी है। पुरुष अधिकार संगठनों के मुताबिक, जनवरी से जून के बीच राज्य में पति की हत्या के 36 मामले सामने आए। इन आंकड़ों के आधार पर मध्य प्रदेश को देश में दूसरे स्थान पर बताया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में इसी अवधि में 93 मामलों का दावा किया गया है। हालांकि, ये आंकड़े पुरुष अधिकार संगठनों की ओर से जारी किए गए हैं और इनकी स्वतंत्र सरकारी पुष्टि अलग से देखी जानी चाहिए।
पुरुष अधिकार संगठनों के अनुसार, जनवरी से जून के बीच मध्य प्रदेश में पति की हत्या से जुड़े 36 मामले सामने आए। उत्तर प्रदेश 93 मामलों के साथ पहले स्थान पर बताया गया है। संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों को सिर्फ व्यक्तिगत अपराध के तौर पर देखने के बजाय वैवाहिक विवाद और पारिवारिक तनाव के व्यापक संदर्भ में भी समझने की जरूरत है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद पुरुष अधिकारों से जुड़े संगठनों ने पुरुषों की शिकायतों और उनकी सुरक्षा को लेकर अपनी मांगें फिर तेज कर दी हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश से पुरुष अधिकार हेल्पलाइन पर वर्ष 2025 में 8,108 कॉल आई थीं। वहीं जनवरी से जून 2026 के बीच ही यह संख्या बढ़कर 12,577 बताई गई है। संगठनों का कहना है कि इन कॉल में वैवाहिक विवाद, पारिवारिक तनाव और कानूनी मदद से जुड़े मामले शामिल हैं। पुरुष अधिकार संगठनों के अनुसार, वर्ष 2025 में देशभर से उनकी हेल्पलाइनों पर 58,289 कॉल आई थीं। वहीं 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही 87,969 कॉल दर्ज होने का दावा किया गया है। संगठनों का कहना है कि वैवाहिक विवाद, घरेलू तनाव और कानूनी मामलों को लेकर पुरुषों की ओर से मदद मांगने के मामले बढ़ रहे हैं।
संगठनों ने जनवरी से जून 2026 के बीच मध्य प्रदेश में 232 पुरुषों की आत्महत्या का आंकड़ा भी सामने रखा है। पुरुष अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पारिवारिक विवाद, मानसिक दबाव और सामाजिक परिस्थितियों को लेकर पुरुषों की समस्याओं पर भी गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। इस तरह के आंकड़ों की वजहों को समझने के लिए व्यापक और आधिकारिक अध्ययन जरूरी है।
इन मुद्दों के बीच राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन की मांग भी तेज हो गई है। पुरुष अधिकार संगठनों का कहना है कि जिस तरह महिलाओं की शिकायतों के लिए अलग संस्थागत व्यवस्थाएं मौजूद हैं उसी तरह पुरुषों की समस्याओं को सुनने और उनके मामलों में सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी एक राष्ट्रीय स्तर का मंच होना चाहिए। आंदोलन से जुड़े संगठनों के मुताबिक, करीब 70 एनजीओ और 10 से 12 हजार एक्टिविस्ट इस अभियान से जुड़े हैं।
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