
MP News : कहते हैं कि जब किस्मत पलटी मारती है तो रंग भी राजा बन जाता है। कुछ इसी तरह से मध्य प्रदेश के कमलेश्वर डोडियार के साथ हुआ। कमलेश्वर डोडियार की किस्मत अचानक से पलट गई। कमलेश्वर के साथ ऐसा चमत्कार हुआ कि उसने विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के जैसी बड़ी पार्टियों के प्रत्याशियों को भी जोरदार पटखनी दे दी। दरअसल, कमलेश्वर अपने परिवार के साथ झोपड़ी में रहते हैं और 12 लाख रुपये का कर्ज लेकर विधानसभा का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में कमेलश्वर ने कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों को टक्कर देकर जीत दर्ज की है।
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की सैलाना सीट (Sailana Assembly Constituency) से चुनाव लड़ने वाले कमलेश्वर डोडियार ने जीत दर्ज की है। कमलेश्वर डोडियार (Kamleshwar Dodiyar) ने भारत आदिवासी पार्टी (Bharat Adivasi Party) के टिकट से सैलाना से चुनाव लड़ा। सैलाना सीट मध्य प्रदेश की एकमात्र वो सीट है जिस पर भाजपा और कांग्रेस के अलावा किसी अन्य दल के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की हो। रविवार को जारी हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के रिजल्ट के अनुसार भाजपा ने 230 में से 163 और कांग्रेस ने 66 सीटें जीती हैं, जबकि एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के खाते में गई है, जो कि सैलाना सीट है।
जानकारी के अनुसार, कमलेश्वर डोडियार के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वे चुनाव लड़ सकें। जिसके बाद कमलेश्वर ने 12 लाख का कर्ज लिया और सैलाना सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा। कमलेश्वर डोडियार ने कांग्रेस प्रत्याशी हर्ष विजय गहलोत को 4618 वोटों से शिकस्त दी। कमलेश्वर को 71,219 वोट मिले, जबकि हर्ष को 66,601 वोट मिले। जबकि भाजपा की प्रत्याशी संगीता चारेल तीसरे नंबर पर रहीं। मध्य प्रदेश के अंदर सैलाना सीट पर प्रदेश की सबसे अधिक 90.08 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।
कमलेश्वर डोडियार के पास रहने के लिए न तो पक्का घर है और नहीं कच्चा, जिसके चलते वह अपने परिवार के साथ झोपड़ी में जीवन यापन करते हैं। बारिश के समय झोपड़ी पर तिरपाल डालकर उनका परिवार पानी से बचने की कोशिश करता है। सबसे खास बात यह रही कि रविवार के दिन जब वोटों की गिनती हो रही थी और जैसे-जैसे वोटों का अंतर बढ़ता गया, आस-पास के लोग कमलेश्वर को जीत की बधाई देने के लिए आने लगे, लेकिन उनकी मां सीताबाई मजदूरी में व्यस्त थीं। मां सीताबाई परिवार के भरण पोषण के लिए मजदूरी करती नजर आई।
कमलेश्वर डोडियार का जन्म एक मजदूर परिवार में हुआ और वह मजदूरी के बीच पले-बढ़े। कमलेश्वर अपने 6 भाई और 3 बहनों में सबसे छोटे हैं। पढ़ाई में रुचि होने के कारण उन्होंने ग्रेजुएशन किया, लेकिन इसके बाद वह कोटा चले गए थे। जहां उन्होंने मकान के निर्माण कार्य में मजदूरी का काम किया। बचपन से लेकर अब तक उन्होंने गरीबी को नजदीक से देखा और जाना है। अभी भी कमलेश्वर अपने परिवार के भरण पोषण के लिए मजदूरी करके पैसा जुटाते हैं।