Mumbai Children Hostage: मुंबई पुलिस ने रोहित आर्या को किया ढेर
भारत
RP Raghuvanshi
30 Nov 2025 02:53 AM
भारत
RP Raghuvanshi
30 Nov 2025 02:53 AM
Mumbai Children Hostage: मुंबई के पवई स्थित आर ए स्टूडियो में 17 बच्चों को बंधक बनाने वाले शख्स रोहित आर्या की मौत हो गई है। पुलिस की कार्रवाई के दौरान फायरिंग में उसे गोली लगी, और गंभीर हालत में अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस अब घटना की पूरी जांच कर रही है और ऑपरेशन की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। Mumbai News
रोहित आर्या ने पवई के RA स्टूडियो में बच्चों को ऑडिशन के बहाने बुलाया था, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें बंधक बना लिया। कुल 19 लोग—17 बच्चे, 1 बुजुर्ग नागरिक और 1 आम शख्स—को रोहित ने बंदी बना लिया था। जैसे ही पुलिस को इस घटना की जानकारी मिली, उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी बच्चों को सकुशल बचा लिया।
पुलिस से मुठभेड़ और मौत
पुलिस द्वारा कार्रवाई करते वक्त रोहित ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई। इस मुठभेड़ के दौरान रोहित को गोली लगी और उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना गुरुवार सुबह की है, जब पवई स्थित RA स्टूडियो में लगभग 100 बच्चे ऑडिशन के लिए पहुंचे थे। रोहित आर्या पिछले कुछ दिनों से बच्चों के ऑडिशन ले रहा था। गुरुवार को उसने 80 बच्चों को वापस भेज दिया और बाकी 19 बच्चों को अंदर ही रोक लिया। इस दौरान बच्चों के शीशे से झांकने पर आसपास के लोगों ने शोर मचाया और तुरंत पुलिस को सूचना दी।
वीडियो संदेश और रोहित की मानसिक स्थिति
इस बीच, रोहित का एक वीडियो संदेश सामने आया, जिसमें उसने दावा किया कि यह सब उसने एक "प्लान" के तहत किया है। हालांकि उसने अपनी कोई बड़ी वित्तीय मांग नहीं रखी, बल्कि उसे नैतिकता से जुड़ी कुछ सवालों के जवाब चाहिए थे। उसने खुद को आतंकवादी न बताते हुए, केवल सवाल पूछने वाला व्यक्ति बताया।
मुंबई के पवई स्थित आर ए स्टूडियो में बच्चों को बंधक बनाने वाले आरोपी रोहित आर्या की मानसिक स्थिति और इसके पीछे के कारण अब सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपी ने कई सरकारी परियोजनाओं में भारी मात्रा में पैसा लगाया था, लेकिन इन परियोजनाओं में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप, वह सरकार और संबंधित विभागों को दोषी मानने लगा और उसे लगता था कि उसके नुकसान का जिम्मेदार प्रशासन है।
रोहित के अनुसार, उसके द्वारा किए गए निवेशों में घाटा होने के कारण वह मानसिक रूप से टूट चुका था। वह सरकार को अपने नुकसान का जिम्मेदार मान रहा था, और अपने मुद्दों को हल करने के लिए किसी न किसी तरीके से सरकार से संवाद करना चाहता था। लेकिन उसके लिए यह संवाद सामान्य तरीके से नहीं हुआ, बल्कि उसने बच्चों को बंधक बनाकर यह कदम उठाया। यह कदम उसका मानसिक दबाव और अव्यावासिक सोच का परिणाम था।
ऑपरेशन और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने मामले को सुलझाने के लिए एक विशेष ऑपरेशन की योजना बनाई। मुख्य दरवाजे से प्रवेश करना जोखिम भरा था, इसलिए पुलिस ने बाथरूम के जरिए अंदर घुसने का रास्ता चुना। करीब दो घंटे चले इस साइलेंट ऑपरेशन में पुलिस ने सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि रोहित ने इस दौरान पुलिस पर फायरिंग की।
पुलिस ने रोहित के पास से एक एयरगन और कुछ संदिग्ध केमिकल पदार्थ बरामद किए हैं, जिनकी जांच अब फॉरेंसिक टीम कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह घटना किसी अन्य के इशारे पर हुई थी, या रोहित ने यह सब अकेले किया था।
बच्चों का मेडिकल चेकअप और काउंसलिंग
मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सभी बच्चे सुरक्षित हैं और उनका मेडिकल चेकअप किया गया है। इसके बाद उन्हें काउंसलिंग के लिए भेजा गया है, ताकि इस मानसिक आघात से उबरने में मदद मिल सके। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि कभी-कभी ऐसी मानसिक समस्याएं व्यक्ति को कितनी खतरनाक दिशा में ले जा सकती हैं, और समय पर की गई पुलिस कार्रवाई से एक बड़े हादसे से बचा जा सकता है। पुलिस द्वारा की गई बहादुरी और सूझबूझ की बदौलत सभी बच्चे सुरक्षित हैं।