जानिए किन मुस्लिम देशों में है होली पर सख्त प्रतिबंध
अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद से धार्मिक नियम काफी सख्त हो गए हैं। हिंदू और सिख समुदाय की संख्या वहां बेहद कम रह गई है, जिसके चलते होली का उत्सव अब सार्वजनिक रूप से लगभग समाप्त हो चुका है। प्रशासन के अनुसार, त्योहार सिर्फ घर या मंदिर की चार दीवारों के भीतर ही सीमित है।

Holi Festival: भारत में होली का त्योहार खुशियों, रंगों और आपसी प्रेम का प्रतीक है। गली-मोहल्लों से लेकर खुले मैदानों तक, रंगों की बरसात और मिठाइयों के साथ यह त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। यह दिन गिले-शिकवे भूलकर रिश्तों में मिठास घोलने का होता है। लेकिन, जब आप सीमाओं के पार उन देशों की ओर देखते हैं जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं, तो यह तस्वीर बिल्कुल बदल जाती है। कई इस्लामिक देशों में इतने सख्त धार्मिक और सामाजिक नियम हैं कि वहां होली का रंग दिखना भी महंगा पड़ सकता है।
सार्वजनिक आयोजन है 'नामुमकिन'
कई इस्लामिक देशों में धार्मिक कानूनों के चलते होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है। कुछ जगहों पर तो यह पूरी तरह प्रतिबंधित है। अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है या जुलूस निकालता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं उन देशों के बारे में जहां होली खेलना आसान नहीं है।
1. अफगानिस्तान: तालिबान के शासन में दबा हुआ 'रंग'
अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद से धार्मिक नियम काफी सख्त हो गए हैं। हिंदू और सिख समुदाय की संख्या वहां बेहद कम रह गई है, जिसके चलते होली का उत्सव अब सार्वजनिक रूप से लगभग समाप्त हो चुका है। प्रशासन के अनुसार, त्योहार सिर्फ घर या मंदिर की चार दीवारों के भीतर ही सीमित है। खुले मैदानों में रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है। अगर कोई इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे गिरफ्तारी या जेल की सजा का खतरा बना रहता है।
2. सऊदी अरब: निजी परिसरों तक सीमित
सऊदी अरब में गैर-इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय से सख्ती बरती जाती है। वहां रहने वाले भारतीय प्रवासी भी होली को सिर्फ निजी परिसरों या भारतीय दूतावास के भीतर ही मना सकते हैं। सार्वजनिक जगहों पर रंग खेलते पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई की जाती है, जिसमें जेल या प्रत्यर्पण (deportation) तक की सजा हो सकती है।
3. कतर और ओमान: प्रशासन की अनुमति के बिना निषेध
अन्य खाड़ी देशों जैसे कतर और ओमान में भी धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है। वहां बिना प्रशासन की अनुमति के सार्वजनिक रूप से होली मनाना प्रतिबंधित है। लोग सिर्फ प्रशासन की अनुमति से आयोजित निजी कार्यक्रमों में ही शामिल हो सकते हैं। अगर कोई नियमों की अवहेलना करता है, तो उस पर भारी जुर्माना, प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं।
रंग खेलने पर मिलती है कड़ी सजा
इन देशों में होली के रंगों को लेकर सजा का प्रावधान काफी कड़ा है। सजा का स्वरूप देश के कानून और स्थानीय प्रशासन पर निर्भर करता है:
- अफगानिस्तान: तालिबानी शासन में सार्वजनिक आयोजन पर रोक है। उल्लंघन पर गिरफ्तारी और जेल की सजा हो सकती है।
- सऊदी अरब: रंग खेलते पकड़े जाने पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है, जिसमें जेल और देश से निकाले जाने का प्रावधान शामिल है।
- कतर व ओमान: सार्वजनिक उत्सव पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का डर बना रहता है।
संक्षेप में, भारत की तरह खुले मैदानों में रंग उड़ाने का अहसास इन देशों में न केवल मुश्किल है, बल्कि जोखिम भी भरा है। वहां रहने वाले भारतीय अपनी सुरक्षा के लिए त्योहार को सिर्फ घरों तक ही सीमित रखते हैं। Holi Festival
Holi Festival: भारत में होली का त्योहार खुशियों, रंगों और आपसी प्रेम का प्रतीक है। गली-मोहल्लों से लेकर खुले मैदानों तक, रंगों की बरसात और मिठाइयों के साथ यह त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। यह दिन गिले-शिकवे भूलकर रिश्तों में मिठास घोलने का होता है। लेकिन, जब आप सीमाओं के पार उन देशों की ओर देखते हैं जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं, तो यह तस्वीर बिल्कुल बदल जाती है। कई इस्लामिक देशों में इतने सख्त धार्मिक और सामाजिक नियम हैं कि वहां होली का रंग दिखना भी महंगा पड़ सकता है।
सार्वजनिक आयोजन है 'नामुमकिन'
कई इस्लामिक देशों में धार्मिक कानूनों के चलते होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है। कुछ जगहों पर तो यह पूरी तरह प्रतिबंधित है। अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है या जुलूस निकालता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं उन देशों के बारे में जहां होली खेलना आसान नहीं है।
1. अफगानिस्तान: तालिबान के शासन में दबा हुआ 'रंग'
अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद से धार्मिक नियम काफी सख्त हो गए हैं। हिंदू और सिख समुदाय की संख्या वहां बेहद कम रह गई है, जिसके चलते होली का उत्सव अब सार्वजनिक रूप से लगभग समाप्त हो चुका है। प्रशासन के अनुसार, त्योहार सिर्फ घर या मंदिर की चार दीवारों के भीतर ही सीमित है। खुले मैदानों में रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है। अगर कोई इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे गिरफ्तारी या जेल की सजा का खतरा बना रहता है।
2. सऊदी अरब: निजी परिसरों तक सीमित
सऊदी अरब में गैर-इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय से सख्ती बरती जाती है। वहां रहने वाले भारतीय प्रवासी भी होली को सिर्फ निजी परिसरों या भारतीय दूतावास के भीतर ही मना सकते हैं। सार्वजनिक जगहों पर रंग खेलते पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई की जाती है, जिसमें जेल या प्रत्यर्पण (deportation) तक की सजा हो सकती है।
3. कतर और ओमान: प्रशासन की अनुमति के बिना निषेध
अन्य खाड़ी देशों जैसे कतर और ओमान में भी धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है। वहां बिना प्रशासन की अनुमति के सार्वजनिक रूप से होली मनाना प्रतिबंधित है। लोग सिर्फ प्रशासन की अनुमति से आयोजित निजी कार्यक्रमों में ही शामिल हो सकते हैं। अगर कोई नियमों की अवहेलना करता है, तो उस पर भारी जुर्माना, प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं।
रंग खेलने पर मिलती है कड़ी सजा
इन देशों में होली के रंगों को लेकर सजा का प्रावधान काफी कड़ा है। सजा का स्वरूप देश के कानून और स्थानीय प्रशासन पर निर्भर करता है:
- अफगानिस्तान: तालिबानी शासन में सार्वजनिक आयोजन पर रोक है। उल्लंघन पर गिरफ्तारी और जेल की सजा हो सकती है।
- सऊदी अरब: रंग खेलते पकड़े जाने पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है, जिसमें जेल और देश से निकाले जाने का प्रावधान शामिल है।
- कतर व ओमान: सार्वजनिक उत्सव पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का डर बना रहता है।
संक्षेप में, भारत की तरह खुले मैदानों में रंग उड़ाने का अहसास इन देशों में न केवल मुश्किल है, बल्कि जोखिम भी भरा है। वहां रहने वाले भारतीय अपनी सुरक्षा के लिए त्योहार को सिर्फ घरों तक ही सीमित रखते हैं। Holi Festival












