हिंदी पर पीछे हटी फडणवीस सरकार : महाराष्ट्र के स्कूलों में अब जरूरी नहीं होगी तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी
Mumbai News
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 07:33 AM
Mumbai News : महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने राज्य के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य बनाने के फैसले को वापस ले लिया है। 29 जून 2025 को सरकार ने अप्रैल और जून में जारी अपने ही दो आदेशों को रद कर दिया। यह यू-टर्न मराठी संगठनों और विपक्षी दलों के तीव्र विरोध के बाद लिया गया, जिसमें मराठी अस्मिता और क्षेत्रीय भाषा की प्राथमिकता को लेकर सरकार पर भारी दबाव बनाया गया था।
सरकार को बदलना पड़ा फैसला
अब हिंदी को स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य नहीं होगा, यानी वह वैकल्पिक भाषा के रूप में ही पढ़ाई जा सकेगी, यदि स्कूल और छात्र ऐसा चाहें। आइए समझते हैं तीन प्रमुख कारण जिनके चलते सरकार को यह फैसला बदलना पड़ा :
1. मराठी अस्मिता पर राजनीतिक दबाव
राज्य में मराठी भाषी संगठनों और क्षेत्रीय दलों ने इसे "मराठी अस्मिता पर हमला" करार देते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया। शिवसेना (उद्धव गुट), एनसीपी (शरद पवार गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इसे केंद्र के "हिंदी थोपने" के एजेंडे से जोड़कर जनता में व्यापक असंतोष फैलाया।
2. महायुति की सियासी गणित बिगड़ने का खतरा
बीजेपी और शिंदे-गुट की अगुवाई वाली महायुति सरकार को यह आशंका थी कि हिंदी थोपे जाने की छवि उभरने से आगामी विधानसभा चुनावों में मराठी वोट बैंक खिसक सकता है। खासतौर पर ग्रामीण और मध्य महाराष्ट्र में इसका गंभीर असर पड़ सकता था।
3. विपक्ष की तीव्र प्रतिक्रिया और सामाजिक आंदोलन
राज्यभर में सामाजिक संगठनों और शिक्षक संघों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। शिक्षाविदों ने सरकार से मांग की कि वह क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता दे और बच्चों पर अतिरिक्त भाषाई बोझ न डाले। यह आंदोलन सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक फैल गया था। Mumbai News