N Chandrasekaran: एन चंद्रशेखरन साल 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे। वह टाटा परिवार से बाहर के पहले प्रोफेशनल मैनेजर थे, जिन्हें समूह की कमान सौंपी गई थी। करीब नौ साल के उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप के कारोबार और निवेश का दायरा काफी बढ़ा।

टाटा समूह से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, उनका कार्यकाल तुरंत खत्म नहीं होगा। वह फरवरी 2027 तक टाटा संस के चेयरमैन के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। उनका यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से पहले आया है। चंद्रशेखरन साल 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे। वह टाटा परिवार से बाहर के पहले प्रोफेशनल मैनेजर थे, जिन्हें समूह की कमान सौंपी गई थी। करीब नौ साल के उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप के कारोबार और निवेश का दायरा काफी बढ़ा।
एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब टाटा संस की 18 अगस्त को एजीएम होने वाली है। इसी बैठक में उनके कार्यकाल और आगे की स्थिति को लेकर चर्चा होने की बात सामने आ रही थी। रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में एजीएम से पहले नेतृत्व को लेकर स्थिति काफी अहम मानी जा रही थी।
फरवरी 2024 में टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले पांच साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी। हालांकि, बाद में नए कारोबार में किए गए निवेश और उनके प्रदर्शन को लेकर मतभेद सामने आने की बात कही गई। रिपोर्ट के अनुसार, नोएल टाटा चंद्रशेखरन के लिए पांच साल के बजाय दो साल के कार्यकारी कार्यकाल के पक्ष में थे। इसी मुद्दे को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ने की चर्चा रही।
रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ग्रुप के ट्रस्ट्स के बीच मतभेदों की खबरें सामने आई थीं। इस दौरान कुछ ट्रस्टियों के पद छोड़ने की बात भी सामने आई। इन मतभेदों को लेकर चिंता यह थी कि कहीं इसका असर टाटा ग्रुप की कंपनियों के बड़े फैसलों और कामकाज पर न पड़े। सीनियर अधिकारियों और एग्जीक्यूटिव्स की ओर से भी इस तरह की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई थी।
एन चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने कई नए क्षेत्रों में कदम बढ़ाया। एयर इंडिया का अधिग्रहण, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे क्षेत्रों में समूह का निवेश बढ़ा। उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप का रेवेन्यू भी काफी बढ़ा। वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू करीब 7.89 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी दौरान ग्रुप का शुद्ध मुनाफा भी बढ़ा। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 में करीब 32,000 करोड़ रुपये का PAT वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर करीब 1.71 लाख करोड़ रुपये हो गया।
टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में भी चंद्रशेखरन के कार्यकाल के दौरान बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2020 में यह करीब 9.31 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर करीब 24.39 लाख करोड़ रुपये हो गया।
वित्त वर्ष 2025 में यह आंकड़ा करीब 27.85 लाख करोड़ रुपये के उच्च स्तर तक पहुंचा था। इन आंकड़ों से पता चलता है कि उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप का कारोबार और बाजार में उसकी स्थिति दोनों काफी बदले।
चंद्रशेखरन का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टाटा ग्रुप कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। इनमें सेमीकंडक्टर फैब, ईवी बैटरी और एयर इंडिया से जुड़े बड़े फैसले शामिल हैं। ऐसे में फरवरी 2027 तक चंद्रशेखरन का पद पर बने रहना नेतृत्व में अचानक बदलाव की स्थिति को कुछ समय के लिए टालता है। वहीं, उनके बाद टाटा संस की कमान किसे मिलेगी, इस पर भी अब सबकी नजर रहेगी।
एन चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे। इस दौरान टाटा ग्रुप को अपने कई बड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाना है और साथ ही नए नेतृत्व के लिए रास्ता तैयार करना होगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि चंद्रशेखरन के बाद टाटा संस की कमान किसके हाथ में जाएगी। हालांकि, उनके इस्तीफे के बाद टाटा ग्रुप में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होने की तस्वीर साफ हो गई है।
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