Nagpur News : शांति और शुभ का भी आधार है शक्ति: मोहन भागवत
Mohan Bhagwat in Nagpur
भारत
चेतना मंच
27 Nov 2025 07:44 AM
Nagpur News : नागपुर। विजयदशमी पर रेशम बाग में आयोजित रैली में आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि मातृ शक्ति की उपेक्षा संभव नहीं है। महिलाओं को हम जगत जननी मानते हैं, लेकिन उनको पूजा घर या घरों में बंद कर दिया गया है। विदेशी हमलों के कारण इसे एक वैधता मिली थी, मगर विदेशी हमलों के खत्म होने के बाद भी उनको प्रतिबंधों से आजादी नहीं मिली है। जो काम पुरुष कर सकते हैं, उससे ज्यादा काम महिलाएं कर सकती हैं। मातृ शक्ति के जागरण का काम अपने परिवार से करके समाज में ले जाना है। उन्होंने कहा कि शक्ति हर बात का आधार है। शक्ति शांति और शुभ का भी आधार है। शुभ काम को करने के लिए भी शक्ति की जरूरत होती है।
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मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में भारत की बात सुनी जा रही ही है, हमारा वजन बढ़ रहा है। श्रीलंका के संकट में हमने बहुत मदद की। यूक्रेन पर हो रही रूस और अमेरिका के बीच की जंग में हमारी बड़ी भूमिका हो सकती है। इससे हमें गर्व होता है। खेल नीतियों में भी अच्छा सुधार हुआ है। हमारे खिलाड़ी ओलंपिक और पैरालंपिक में मेडल जीत रहे हैं। कोरोना के बाद देश की अर्थव्यवस्था भी सुधर रही है। उन्होंने कहा कि नीतियों में स्पष्टता होनी चाहिए। परिस्थितियों के हिसाब से लचीलापर जरूरी होती है। इसके साथ ही मर्यादा का पालन भी करना होता है। साथ ही लोगों को भरोसे में रखना होता है।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हमें दो बाधाओं से सावधान रहना है। पहली बाधा तो हम खुद हैं। समय के साथ ज्ञान और समझ में बदलाव होता है। नित्य नूतन के साथ चिर पुरातन या सनातन का साथ जरूरी है, अन्यथा जीवन कटी पतंग हो जाता है। लेकिन, नूतनता भटका न दे, इसके लिए सनातन संस्कृति के मूल्यों पर कायम रहना भी जरूरी है। दूसरी बाधा बाहर से आती है, जो भारत की प्रगति को नहीं होने देना चाहते हैं, जिनके स्वार्थों को नुकसान होगा, वे बाधा डालते हैं। उनकी शक्तियां गलत विमर्श पैदा करती हैं। वे हमारे देश में कलह, अराजकता, आतंकवाद को बढ़ाते हैं। देश में नियम कानून का सम्मान न रहे, अनुशासन न रहे, ऐसे कामों को बढ़ाते हैं। ऐसे लोग कभी-कभी घुसपैठ के लिए नजदीकी भी बढ़ाते हैं। भेदभाव को बढ़ाते हुए दुष्टता कपट करती है, इसलिए सावधान रहने की जरूरत है।
मोहन भागवत ने कहा कि मातृभाषा को बढ़ने से रोकने के लिए ये मिथक फैलाया जाता है कि करियर के लिए अंग्रेजी जरूरी है। जबकि ये पूरी तरह गलत है। नई शिक्षा नीति की बात हो रही है, लेकिन हम अपने बच्चों को क्या मातृ भाषा में शिक्षा के लिए भेजते हैं। अगर ऐसा नहीं किया गया तो मातृभाषा कैसे सशक्त होगी। उन्होंने कहा कि रोजगार का मतलब केवल नौकरी और वह भी सरकारी नौकरी के पीछे अगर सब लोग दौड़ेंगे तो नौकरी कितनी दे सकते हैं? किसी भी समाज में सरकारी और प्राइवेट मिलाकर केवल 10, 20, 30 प्रतिशत नौकरी होती है। बाकी सब को अपना काम करना पड़ता है। इसके लिए उद्यम जरूरी है।