
नागपुर(Nagpur) में हिंसा की असली वजह अफवाहों को माना जा रहा है। दक्षिणपंथी समूहों द्वारा औरंगजेब के मकबरे को हटाने की मांग के दौरान कुरान को जलाए जाने की अफवाह फैल गई। यह प्रदर्शन विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल जैसे संगठनों द्वारा आयोजित किया गया था, जिन्होंने कथित तौर पर 'कलमा' लिखा कपड़ा जलाया था। इस अफवाह के बाद मुस्लिम समुदाय में गुस्सा फैल गया, और दोनों समुदायों के बीच टकराव हुआ, जिसमें चार लोग घायल हो गए और कई गाड़ियों में आग लगा दी गई।
हिंसा के बाद पुलिस को स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। नागपुर(Nagpur) के महल इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस ने धारा 144 लागू कर दी, जो किसी स्थान पर चार या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाती है। इसके साथ ही पुलिस ने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए।
नागपुर(Nagpur) में हुई हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दंगा फैलाने वाले और पुलिस पर पत्थर फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। फडणवीस ने स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने की बात भी कही।
पुलिस आयुक्त डॉ. रविंद्र सिंघल ने बताया कि कुछ लोगों ने अफवाह फैलाने के बाद उनके कार्यालय में तस्वीर जलाने की शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और इलाके में शांतिपूर्वक स्थिति बहाल करने के लिए धारा 144 लागू की। पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और स्थिति को नियंत्रण में रखने का प्रयास करें।
चश्मदीदों ने घटना के बारे में बताया कि कुछ चेहरे ढके हुए लोग हथियार लेकर इलाके में आए थे। उन्होंने दुकानों में तोड़फोड़ की और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। इस घटना से इलाके में डर का माहौल था, और पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है।
नागपुर(Nagpur) में हिंसा के बाद शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस ने सख्त कदम उठाए हैं, लेकिन इस विवाद की असली वजह अफवाहों और गलत सूचना के फैलने को ही माना जा रहा है।Nagpur: