National Legal Services Day : राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस: जानें इसका इतिहास एवं महत्व
National Legal Services Day
भारत
चेतना मंच
09 Nov 2022 02:54 PM
National Legal Services Day : हर साल 9 नवंबर को राष्ट्रीय कानूनी सेवा या विधिक सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। गौरतलब है कि 1994 अधिनियम के संसोधन के बाद 1987 अधिनियम को प्रभाव में लाया गया। ये प्रावधान 9 नवंबर 1995 में लागू किया गया था। इसके बाद से ही हर साल 9 नवंबर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस मनाया जाने लगा। इस दिन को मनाने की शुरुआत भारत (India ) में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के द्वारा की गई थी। इस दिन को इसलिए भी खास महत्व दिया जाता है ताकि कानूनी प्राधिकरण अधिनियम 1987 जिस दिन प्रभाव में आया था, उसे चिन्हित किया जा सके और लोगों को कानून के प्रति जागरूक किया जा सके।
National Legal Services Day :
राष्ट्रीय विधिक दिवस को मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य है लोगों को न्याय व्यवस्था, अधिकारों एवं कानून को लेकर जागरूक करना और उन्हें इसके महत्व को समझाना। इसके साथ ही इस दिन को इसलिए भी मनाया जाता है ताकि लोगों में न्याय को सुनिश्चित किया जा सके। अक्सर गरीब वर्ग के लोग कानूनी सहायता लेने से कतराते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करने से काफी खर्चा होगा। ऐसे में गरीब वर्ग के लोगों को मुफ्त में कानूनी सहायता प्राप्त करना और इस बारे में सलाह देना भी विधिक दिवस मनाने का लक्ष्य है।
न्याय को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाना भी इसमें शामिल है। हर वर्ग के लोगों को हर धर्म के लोगों को निष्पक्ष न्याय प्रदान करना और किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव न हो, इन सबको लेकिन लोगों को जागरूक किया जाता है।
कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 :
भारतीय संविधान (Indian Constitution ) के Article 39A तथा समिति के द्वारा की गई सिफारिशों के बाद केंद्र सरकार (Central Government) ने 1987 के कानूनी अधिनियम को संसोधित किया था। ये संशोधन 1994 अधिनियम के बाद लागू किया गया था। इसको 9 नवंबर 1995 में लागू किया गया था। इसके बाद कई कई संसोधन मुख्य अधिनियम को लेकर पेश किए गए। इस अधिनियम के तहत सबको कानून को लेकर एक समान रखा गया है। आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग, विकलांग वर्ग के लोगों के लिए मुफ्त में कानूनी सेवा प्रदान करना भी इसके अंतर्गत शामिल हैं। किसी से किसी भी प्रकार का भेदभाव न करना और सबको समान अवसर प्रदान करना इस अधिनियम में चिन्हित किया गया है।