National News : तीन तलाक पर कानून बनने के बाद अब बच्चों की खतना के खिलाफ बुलंद हुई आवाज
After the enactment of the law on triple talaq, now the voice against the circumcision of children has been raised
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 01:41 PM
तीन तलाक पर कानून बनने के बाद अब बच्चों के खतना प्रथा के खिलाफ भी आवाज बुलंद होने लगी है। इस बाबत केरल हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इसमें इस्लाम में प्रचलित बच्चों के खतना प्रथा पर रोक लगाने के साथ ही इस प्रथा को बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन, संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध घोषित करने का अनुरोध किया गया है। नॉन-रिलीजियस सिटीजन (NRC) और पांच अन्य व्यक्तियों द्वारा दायर याचिका में न्याय मंत्रालय को खतने पर रोक लगाने वाले पर्याप्त कानून पर विचार करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि खतना बच्चों के मौलिक अधिकारों और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है। बच्चे इस कुप्रथा के शिकार हैं। इसका अभ्यास क्रूर, अमानवीय और बर्बर होने के साथ-साथ संविधान प्रदत्त अधिकारों के भी खिलाफ है।
यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के मौलिक और जीवन के अधिकार का उल्लंघन करता है। याचिका में कहा गया है कि खतने से कई स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। उनमें से एक आघात है। आघात की वजह से डर, असहायता, गंभीर चोट या मृत्यु के खतरे की भावना का अहसास होता है। इसमें यौन शोषण, शारीरिक शोषण, घरेलू हिंसा, सामुदायिक और स्कूल हिंसा, चिकित्सा आघात आदि शामिल हैं।
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याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बच्चे को किसी विशेष धर्म को मानने या न मानने और किसी विशेष प्रथा या अनुष्ठान का पालन करने या न करने का अधिकार होना चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया है कि खतना प्रथा बच्चों को मजबूर करने के लिए किया जाता है कि उनकी पसंद जैसी चीज नहीं है। उनके माता-पिता द्वारा लिए गए एकतरफा निर्णय का ही उन्हें पालन करना।
याचिका में आगे कहा गया है कि एक बच्चे को अपने माता-पिता की सनक का शिकार नहीं होना चाहिए। बच्चों को किसी विशेष प्रथा, विश्वास या धर्म को चुनने का अवसर मिलना चाहिए। हालांकि, समाज बच्चों की अक्षमता और लाचारी का फायदा उठा रहा है। माता-पिता की धार्मिक कट्टरता के कारण बच्चों के अधिकारों और स्वतंत्रता का समर्पण नहीं किया जा सकता है। बालिग होने के बाद ही बच्चे को कोई धार्मिक अनुष्ठान चुनने की अनुमति दी जानी चाहिए।
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