National News: विधेयक का मकसद सहकारी क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाना
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भारत
चेतना मंच
20 Dec 2022 09:14 PM
National News: नई दिल्ली। लोकसभा ने मंगलवार को ‘बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022’ को संसद की संयुक्त समिति के विचारार्थ भेज दिया। इस विधेयक का मकसद सहकारी क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाना और इसकी चुनाव प्रक्रिया में सुधार करना है। कई विपक्षी दलों की मांग के बाद सरकार ने इस विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजने पर सहमति जताई।
गृह मंत्री अमित शाह ने निचले सदन में इस विधेयक को संयुक्त समिति के विचारार्थ भेजने का प्रस्ताव रखा जिसे सदन ने मंजूरी दी।
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इस संयुक्त समिति में भारतीय जनता पार्टी के चंद्रपकाश जोशी, जगदंबिका पाल, परबत भाई पटेल, पूनमबेन मदाम, रामदास तड़स, अण्णासाहेब जोल्ले, निशिकांत दुबे, सुनीता दुग्गल, बृजेंद्र सिंह, जसकौर मीणा, रामकृपाल यादव और ढाल सिंह बिशेन, कांग्रेस के कोडिकुनिल सुरेश एवं मनीष तिवारी, द्रमुक की कनिमोई, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के लव श्रीकृष्णा, शिवसेना के हेमंत पाटिल, जनता दल (यूनाइटेड) के दुलाल चंद्र गोस्वामी, बीजू जनता दल के चंद्रशेखर साहू और बहुजन समाज पार्टी के गिरीश चंद्र को शामिल किया गया है।
इस समिति में 10 सदस्य राज्यसभा के होंगे।
लोकसभा में केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री बी एल वर्मा ने गत सात दिसंबर को उक्त विधेयक पेश किया था। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक सहित ज्यादातर विपक्षी दलों के सदस्यों ने विधेयक को पेश करने का विरोध करते हुए इसे स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की थी।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि यह विधेयक संविधान के संघीय सिद्धांत के खिलाफ है और राज्यों के अधिकारों को अपने हाथ में लेने का केंद्र का प्रयास है।
विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए सहकारिता राज्य मंत्री बी एल वर्मा ने कहा था कि यह विधेयक सदन की विधायी क्षमता के दायरे में है और किसी भी तरह से राज्यों के अधिकारों पर हमला नहीं करता है।
उन्होंने यह भी कहा था कि राज्यों के अधिकार पर कोई हमला नहीं हुआ है तथा राज्य सोसाइटी को बहु-राज्य सोसाइटी में शामिल करने का प्रावधान पहले से है।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गत 12 अक्टूबर को बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दी थी। इस पहल का मकसद क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाना और चुनाव प्रक्रिया में सुधार करना है।
वर्तमान समय में देश भर में 1,500 से अधिक बहु-राज्य सहकारी समितियां हैं। ये समितियां स्वयं-सहायता और पारस्परिक सहायता के सिद्धांतों के आधार पर अपने सदस्यों की आर्थिक और सामाजिक बेहतरी को बढ़ावा देती हैं।
स्थापित सहकारी सिद्धांतों के अनुरूप सहकारी समितियों के कामकाज को लोकतांत्रिक बनाने और स्वायत्तता देने के मकसद से ‘बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002’ लाया गया था।