जब शहनाई की तान से गूंजती थी काशी, कुछ ऐसा था बिस्मिल्लाह खान का जीवन

भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जीवन भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा, सादगी और समर्पण की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने शहनाई को सिर्फ एक वाद्ययंत्र नहीं रहने दिया, बल्कि उसे भारतीय आत्मा की आवाज भी बना दिया।

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar21 Mar 2026 03:48 PM
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Ustad Bismillah Khan : भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जीवन भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा, सादगी और समर्पण की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने शहनाई को सिर्फ एक वाद्ययंत्र नहीं रहने दिया, बल्कि उसे भारतीय आत्मा की आवाज भी बना दिया। 21 मार्च 1916 को बिहार राज्य के डुमरांव में जन्मे उस्ताद ने अपनी संगीत साधना से ऐसा इतिहास रचा, जिसे पीढ़ियां याद रखेंगी। उनकी शहनाई की तान में एक ओर भक्ति का भाव था, तो दूसरी ओर भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ें भी महसूस होती थीं। उन्होंने देश ही नहीं, दुनिया भर के श्रोताओं को अपने सुरों से प्रभावित किया। उनकी जयंती पर उन्हें याद करना दरअसल उस विरासत को प्रणाम करना है, जिसने भारतीय संगीत को वैश्विक सम्मान दिलाया।

बाबा विश्वनाथ के चरणों में समर्पित थी साधना

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का काशी और बाबा विश्वनाथ से बेहद गहरा आध्यात्मिक रिश्ता था। कहा जाता है कि जब तक वह जीवित रहे, तब तक अपनी शहनाई की मधुर तान से बाबा विश्वनाथ को जगाने की परंपरा निभाते रहे। उनके सुरों में भक्ति, बनारस की आत्मा और गंगा किनारे की आध्यात्मिक शांति का अनूठा संगम सुनाई देता था। यही वजह है कि उनकी शहनाई सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि साधना मानी जाती थी। एक दौर में शहनाई को सिर्फ शादी-ब्याह और शुभ अवसरों का वाद्ययंत्र माना जाता था। लेकिन उस्ताद बिस्मिल्लाह खान ने अपने अथक रियाज, अद्भुत प्रतिभा और समर्पण से इसे शास्त्रीय संगीत की ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। उन्होंने शहनाई को देश की सीमाओं से बाहर ले जाकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान दिलाया। आज शहनाई को जो प्रतिष्ठा हासिल है, उसमें उस्ताद का योगदान सबसे अहम माना जाता है।

डुमरांव की मिट्टी से उठी सुरों की महान धारा

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जन्म बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव में एक संगीतकार परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें संगीत का वातावरण मिला और उसी ने उनके भीतर शहनाई के प्रति समर्पण का भाव पैदा किया। कठिन साधना और निरंतर अभ्यास ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां उनका नाम शहनाई का पर्याय बन गया। उनकी कला में बिहार की सादगी और बनारस की आत्मीयता एक साथ दिखाई देती थी। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान केवल एक महान कलाकार ही नहीं थे, बल्कि वे भारतीय साझा संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब के मजबूत प्रतीक भी थे। उनके व्यक्तित्व में विनम्रता, आध्यात्मिकता और इंसानियत की गहरी छाप थी। यही कारण है कि वे संगीत के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द की मिसाल के रूप में भी याद किए जाते हैं। भारतीय संगीत को समृद्ध करने और शहनाई को वैश्विक पहचान दिलाने में उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं।

जयंती पर नेताओं ने किया स्मरण

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की जयंती पर देश के कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें शहनाई का जादूगर बताते हुए विनम्र अभिवादन किया। वहीं शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उस्ताद की स्मृतियां शहनाई की मधुर धुन में हमेशा जीवित रहेंगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने अपने संगीत के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत किया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन्हें काशी और भारत की सांस्कृतिक चेतना का जीवंत स्वर बताया। वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उनकी कला, सादगी और सांझी विरासत को भारतीय संगीत जगत की अमूल्य धरोहर कहा। Ustad Bismillah Khan

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केरल और पुडुचेरी में भाजपा का चुनावी दांव, उम्मीदवारों की नई सूची जारी

इसी क्रम में पार्टी ने शनिवार को केरल और पुडुचेरी के लिए उम्मीदवारों की नई सूची जारी कर दी। पुडुचेरी के लिए भाजपा ने पहली सूची में 9 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं, जबकि केरल के लिए पार्टी ने तीरी सूची जारी की है।

भाजपा का चुनावी दांव
भाजपा का चुनावी दांव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar21 Mar 2026 03:24 PM
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Bharatiya Janata Party : भारतीय जनता पार्टी ने 2026 के विधानसभा चुनावों को लेकर अपनी राजनीतिक तैयारियों को और तेज कर दिया है। इसी क्रम में पार्टी ने शनिवार को केरल और पुडुचेरी के लिए उम्मीदवारों की नई सूची जारी कर दी। पुडुचेरी के लिए भाजपा ने पहली सूची में 9 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं, जबकि केरल के लिए पार्टी ने तीरी सूची जारी की है। पुडुचेरी में कुल 30 विधानसभा सीटें हैं और यहां सरकार बनाने के लिए 16 सीटों के बहुमत की जरूरत होगी। वहीं, केरल विधानसभा की कुल 140 सीटों में सत्ता हासिल करने के लिए 71 सीटों का आंकड़ा जरूरी है।

केरल में भाजपा की तीसरी सूची जारी

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 21 मार्च को केरल विधानसभा चुनाव के लिए तीसरी सूची जारी की। इस सूची में 11 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का एलान किया गया है। पार्टी ने राज्य के अलग-अलग इलाकों में अपने प्रत्याशी उतारकर चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

केरल के लिए घोषित उम्मीदवार

  1. पीरुमेड (92) : वी. रतीश
  2. पुथुपल्ली (98) : रवींद्रनाथ वाकथानम
  3. मावेलिक्करा-एससी (109) : अजीमोन
  4. अडूर-एससी (115) : पंडालम प्रतापन
  5. चावरा (117) : के.आर. राजेश
  6. चादायमंगलम (122) : आर.एस. अरुण राज
  7. चिरायिनकीझु-एससी (129) : बी.एस. अनूप
  8. तिरुवनंतपुरम (134) : करमना जयन
  9. अरुविक्करा (136) : विवेक गोपन
  10. कोवलम (139) : टी.एन. सुरेश
  11. नेय्याट्टिनकारा (140) : एस. राजशेखरन नायर

केरल की राजनीति में लंबे समय से मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के बीच होता रहा है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में LDF लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, UDF भी राज्य में सत्ता दोबारा हासिल करने की उम्मीद के साथ मैदान में है। ऐसे में भाजपा नीत NDA इस चुनाव में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने के इरादे से उतर रही है।

पुडुचेरी के लिए भाजपा की पहली सूची में 9 नाम

पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी पहली सूची जारी करते हुए 9 उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लगा दी है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने इन नामों को अंतिम रूप दिया। भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि वह पुडुचेरी में गठबंधन की स्थिति मजबूत रखते हुए अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। पुडुचेरी की सभी 30 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। यहां किसी भी दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए 16 सीटों की जरूरत होगी।

पुडुचेरी के लिए घोषित उम्मीदवार

  1. मन्नाडिपेट : ए. नमस्सिवायम
  2. औसुडु (एससी) : ई. थीप्पैनथन
  3. कलापेट : पी.एम.एल. कल्याणसुंदरम
  4. राजभवन : वी.पी. रामलिंगम
  5. मुदलियारपेट : ए. जॉनकुमार
  6. मनावेली : एम्बलम आर. सेल्वम
  7. तिरुनाल्लर : जी.एन.एस. राजशेखरन
  8. नेरावी-टी.आर. पट्टिनम : टीकेएसएम मीनाक्षीसुंदरम
  9. माहे : ए. दिनेशन

पुडुचेरी में सत्ता बचाने की चुनौती

पुडुचेरी में इस समय AINRC और भाजपा के नेतृत्व वाला NDA गठबंधन सत्ता में है। ऐसे में भाजपा की कोशिश सिर्फ गठबंधन सरकार को बरकरार रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने संगठनात्मक आधार और राजनीतिक प्रभाव को भी और मजबूत करना चाहती है। उम्मीदवारों की यह सूची उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। Bharatiya Janata Party

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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कर दी बड़ी घोषणा

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ी घोषणा कर दी है। RSS प्रमुख की इस घोषणा को RSS में बदले हुए युग के रूप में देखा जा रहा है। RSS अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर चुका है। इन दिनों भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में RSS का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है।

मोहन भागवत
मोहन भागवत
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar20 Mar 2026 04:34 PM
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Mohan Bhagwat : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ी घोषणा कर दी है। RSS प्रमुख की इस घोषणा को RSS में बदले हुए युग के रूप में देखा जा रहा है। RSS अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर चुका है। इन दिनों भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में RSS का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। RSS के शताब्दी वर्ष के सिलसिले में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

RSS में होंगे 86 संभाग

RSS का राष्ट्रीय मुख्यालय महाराष्ट्र के नागपुर शहर में है। नागपुर में शुक्रवार को RSS का बड़ा आयोजन हुआ। RSS के इस आयोजन में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भविष्य में RSS के अलग-अलग 86 संभाग बनाए जाएंगे। वर्तमान में RSS के 46 प्रांत हैं। इन 46 प्रांतों को 86 संभाग में बदलकर RSS के संगठन में बड़ा बदलाव किया जाएगा। इसके साथ ही संघ प्रमुख मोहन भागवत ने यह घोषणा भी कर दी है कि RSS के संगठन का स्वरूप जरूर बदलेगा किन्तु RSS का काम तथा काम करने का तरीका बिल्कुल भी नहीं बदला जाएगा।

नागपुर में क्या बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत

नागपुर के कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी उन विचारधाराओं की ओर आकर्षित होती है, जिसमें राष्ट्र सेवा की भावना हो। उन्होंने कहा कि RSS को अच्छे कामों के लिए इंटरनेट मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की आवश्यकता है। जब उनसे पूछा गया कि RSS ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर हाल ही में संगठन में क्या बड़े बदलाव किए हैं, इस पर उन्होंने कहा कि RSS का कार्य बड़े स्तर पर बढ़ा है। इसलिए अब विकेंद्रीकरण की जरूरत है।

RSS के काम का तरीका कभी नहीं बदलेगा

भागवत ने कहा कि छोटी-छोटी इकाइयां जरूरी कामों को ज्यादा कुशलता से संभालेंगी, जबकि मित्रता रखने और स्वयं मिसाल बनकर नेतृत्व करने का मूल तरीका पहले जैसा ही रहेगा। उन्होंने कहा कि चूंकि RSS से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं, इसलिए स्वयंसेवकों को भी अब ज्यादा परिश्रम करना होगा। इसलिए अब और भी छोटी-छोटी इकाइयां बनाई जाएंगी। जो काम पहले ऊपरी स्तर से होता था, वह अब ये छोटी इकाइयां करेंगी। जब कोई संगठन बड़ा होता है तो यह एक स्वाभाविक बदलाव है। उन्होंने कहा कि अब आरएसएस में 46 प्रांतों (प्रशासनिक इकाइयों) के बजाय 86 संभाग होंगे।उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS के काम करने का ढंग नहीं बदलेगा। यह पहले जैसा ही रहेगा। काम करने का वह तरीका है मित्रता करना और स्वयं मिसाल बनकर बदलाव लाना। जब उनसे पूछा गया कि विपरीत परिस्थितियों में भी संघ का विस्तार कैसे हुआ तो उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन के विस्तार में प्रचार-प्रसार से मदद मिल सकती है, लेकिन RSS की असली ताकत कुछ और ही है। संघ का विस्तार ऐसे माध्यमों से नहीं होता। इसका विस्तार इसके काम और इसके कार्यकर्ताओं के बीच आपसी स्नेह से होता है। Mohan Bhagwat


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