Advertisement
Advertisement

Advertisement
National News : हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक दबाव के तहत कुछ ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। इन फैसलों का पाकिस्तान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।
भारत ने 1960 में पाकिस्तान के साथ किए गए सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया है।
यह संधि पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब – के पानी के उपयोग से जुड़ी थी।
इस कदम से पाकिस्तान की कृषि, पेयजल और हाइड्रोपावर उत्पादन पर भारी असर पड़ेगा।
अब कोई रियायत नहीं – पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने का अल्टीमेटम
सभी वीजा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए हैं, जिससे कूटनीतिक दबाव और सुरक्षा उपायों को मजबूती मिली है।
भारत ने अटारी बॉर्डर से सभी आवाजाही और व्यापार पर रोक लगा दी है।
इससे सीमापार व्यापार, विशेषकर पाकिस्तान के लिए, लगभग ठप हो जाएगा।
पाक उच्चायोग के रक्षा, नौसेना और वायुसेना सलाहकारों को अवांछित घोषित किया गया है।
1 मई 2025 से पाक उच्चायोग के स्टाफ की संख्या घटाकर 30 कर दी जाएगी – भारत ने दी सख्त चेतावनी ।
भारत ने अपने सैन्य सलाहकार और सहायक स्टाफ को इस्लामाबाद से वापस बुला लिया है।
इससे भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक दूरी और बढ़ गई है।
भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध 1971 युद्ध के बाद सबसे गंभीर स्तर पर आ सकते हैं।
भारत की रणनीति पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग करने की है।
विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र में सिंधु समझौते पर चर्चा हो सकती है।
सिंधु जल रोकने से पाकिस्तान की 80% कृषि प्रभावित होगी।
हाइड्रोपावर उत्पादन घटेगा और खाद्य सुरक्षा पर संकट बढ़ेगा।
अटारी बॉर्डर से व्यापार बंद होने से पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा, जबकि भारत पर असर न्यूनतम रहेगा।
पाकिस्तान सीमा पर घुसपैठ या आतंकी हमलों से प्रतिक्रिया दे सकता है।
भारत की तैयारियों और संभावित सर्जिकल स्ट्राइक के संकेत CCS बैठक से मिलते हैं।
लंबे समय में यह कदम आतंकवाद की फंडिंग को कमज़ोर कर सकता है।
पाकिस्तान में जल संकट और आर्थिक दबाव से सामाजिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
भारत में जनता इसे "मजबूत नेतृत्व" मान सकती है, जिससे मोदी सरकार की लोकप्रियता बढ़ेगी।
विपक्ष इस पर युद्ध जोखिम या आर्थिक लागत के आधार पर सवाल उठा सकता है।
सिंधु समझौते को एकतरफा रोकने से भारत को विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय अदालतों में चुनौती मिल सकती है।
चीन CPEC के जरिए पाकिस्तान का समर्थन कर सकता है, जिससे भारत-चीन तनाव भी बढ़ सकता है। National News :
Advertisement
Advertisement