National: सबसे बड़ी अदालत ने पूछा सीधा सवाल, सभी लड़कियों की शादी 18 साल में क्यों नहीं?
Joshimath Update
भारत
RP Raghuvanshi
11 Dec 2022 12:44 AM
भारत
RP Raghuvanshi
11 Dec 2022 12:44 AM
National: उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) द्वारा दायर उस याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है, जिसमें सभी समुदायों की महिलाओं और पुरुषों के लिए 18 वर्ष की एक समान विवाह योग्य आयु निर्धारित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
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प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की पीठ ने शुक्रवार को उस याचिका पर विधि आयोग से जवाब मांगा, जिसमें नाबालिग मुस्लिम लड़कियों के विवाह को कानून के तहत दंडनीय अपराध बनाने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में दिल्ली उच्च न्यायालय के हाल के उस फैसले का हवाला दिया गया है जिसमें एक नाबालिग मुस्लिम लड़की की शादी की अनुमति इस आधार पर दी गई थी कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत इसकी अनुमति है।
याचिका में कहा गया है कि भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872, पारसी विवाह और तलाक अधिनियम, 1936, विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत, एक पुरुष के लिए ‘विवाह की न्यूनतम आयु’ 21 वर्ष और एक महिला के लिए 18 वर्ष है।
इसमें कहा गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत, जो अभी भी असंहिताबद्ध और असंबद्ध बना हुआ है, नाबालिग मुस्लिम लड़की के विवाह को जायज माना गया है।
याचिका में कहा गया है कि यह न केवल मनमाना, तर्कहीन और भेदभावपूर्ण है, बल्कि पॉक्सो अधिनियम, 2012 के प्रावधानों का भी उल्लंघन है, जो बच्चों, विशेषकर लड़कियों को यौन अपराध से बचाने के लिए बनाया गया था।