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लोकसभा और राज्यों की राजनीति में हाल के घटनाक्रमों ने देश के सियासी समीकरणों को तेजी से बदल दिया है। पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र और तमिलनाडु तक विपक्षी खेमे में टूट और असंतोष की खबरों ने इंडिया गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

INDIA alliance breaks up : लोकसभा और राज्यों की राजनीति में हाल के घटनाक्रमों ने देश के सियासी समीकरणों को तेजी से बदल दिया है। पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र और तमिलनाडु तक विपक्षी खेमे में टूट और असंतोष की खबरों ने इंडिया गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जबकि भाजपा नेतृत्व वाला NDA अब पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मतभेद के चलते करीब 20 सांसदों के अलग रुख अपनाने की चर्चाओं ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। वहीं महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे खेमे के संपर्क में होने की खबरों ने विपक्षी एकता को झटका दिया है। इन घटनाक्रमों के बाद NDA के संख्याबल में बढ़ोतरी की संभावनाएं लगातार चर्चा में हैं। INDIA alliance breaks up
2024 लोकसभा चुनाव के बाद INDIA गठबंधन ने विपक्षी राजनीति में एक मजबूत उपस्थिति दर्ज की थी, लेकिन बीते महीनों में लगातार टूट और राजनीतिक असंतोष ने इसकी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती दौर में कांग्रेस (99), समाजवादी पार्टी (37), तृणमूल कांग्रेस (28), डीएमके (22), शिवसेना (UBT) (9), शरद पवार गुट की एनसीपी (8), राजद (4), सीपीआई (एम) (3) और जेएमएम (3) सहित अन्य सहयोगी दलों के साथ यह गठबंधन एक प्रभावशाली ताकत के रूप में उभरा था। हालांकि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने इस समीकरण को काफी हद तक बदल दिया है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर 20 सांसदों के अलग रुख के बाद पार्टी की वास्तविक ताकत घटकर करीब 8 सांसदों तक सिमटने की बात सामने आ रही है। वहीं शिवसेना (UBT) के 9 में से लगभग 3 सांसद ही वर्तमान स्थिति में बने हुए बताए जा रहे हैं। इसके अलावा डीएमके के अलग रुख ने भी INDIA गठबंधन के लिए नई राजनीतिक चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। इन सभी बदलावों के बीच विपक्षी गठबंधन का कुल संख्याबल घटकर लगभग 187 सांसदों के आसपास पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है, जिससे संसद में विपक्ष की रणनीतिक स्थिति पहले की तुलना में कमजोर होती नजर आ रही है। INDIA alliance breaks up
लोकसभा की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर में INDIA गठबंधन के भीतर कई दलों की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस के पास 98 सांसद हैं, जबकि समाजवादी पार्टी 37 सीटों के साथ मजबूत स्थिति में है। तृणमूल कांग्रेस के 8, शिवसेना (UBT) के 3 और शरद पवार गुट की एनसीपी के 8 सांसद गठबंधन का हिस्सा बने हुए हैं। इसके अलावा राजद के 4, माकपा के 4, आईयूएमएल के 3, जेएमएम के 3, सीपीआई के 2, नेशनल कॉन्फ्रेंस के 2, वीसीके के 2 और अन्य सहयोगी दलों के 7 सांसद भी इस खेमे में शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर डीएमके के 22 सांसद, आम आदमी पार्टी के 3, वाईएसआर कांग्रेस के 4, एआईएमआईएम का 1, बीजेडी का 1 और जेडपीएम व एचएलपी जैसे छोटे दल अभी किसी भी प्रमुख गठबंधन के साथ पूरी तरह स्पष्ट रूप से जुड़े नहीं माने जा रहे हैं। इन दलों की यह ‘तटस्थ या अलग राह’ संसद की मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को और अधिक जटिल और दिलचस्प बना रही है। INDIA alliance breaks up
वहीं दूसरी ओर NDA को कई नए समर्थन मिलने की संभावना से उसका संख्याबल लगातार बढ़ता दिख रहा है। लोकसभा की कुल 543 सीटों में से 3 सीटें खाली हैं, जिससे प्रभावी संख्या 540 रह जाती है। दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों का समर्थन जरूरी है। वर्तमान में NDA के पास लगभग 293 सांसद हैं। यदि TMC के बागी सांसदों और अन्य संभावित समर्थन को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या 313 तक पहुंच सकती है। उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों के समर्थन की स्थिति में यह आंकड़ा 319 तक पहुंचता दिख रहा है। वहीं यदि DMK और कांग्रेस से अलग हुए संभावित 22 सांसद भी NDA के साथ जाते हैं तो संख्या 341 तक पहुंच सकती है। अप्रैल में हुए एक अहम मतदान में NDA को 298 सांसदों का समर्थन मिला था। इसी आधार पर संभावित समर्थन जोड़ने पर गठबंधन का आंकड़ा 346 तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है, जो दो-तिहाई बहुमत से कुछ ही कदम दूर है। INDIA alliance breaks up
राज्यसभा में भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है। वर्तमान में उच्च सदन की कुल सदस्य संख्या 242 है, जिसमें बहुमत का आंकड़ा 122 और दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। मौजूदा समीकरणों में NDA के पास लगभग 148 सांसद हैं, जो उसे स्पष्ट बहुमत के साथ-साथ दो-तिहाई लक्ष्य के काफी करीब ले जाते हैं। वहीं विपक्षी INDIA गठबंधन के पास 64 सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है, जबकि 28 सदस्य किसी भी प्रमुख गठबंधन से स्पष्ट रूप से जुड़े नहीं हैं। इन आंकड़ों के आधार पर राज्यसभा में भी सत्ता पक्ष का पलड़ा भारी नजर आ रहा है, जिससे आने वाले समय में विधायी समीकरण और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। INDIA alliance breaks up
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