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NEET 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद फिर चर्चा में आया राजस्थान का सीकर। जानिए 2024 नीट पेपर लीक विवाद, ग्रेस मार्क्स, टॉपर्स विवाद और नए सीकर कनेक्शन की पूरी कहानी।

NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद एक बार फिर राजस्थान का सीकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। पेपर लीक के शक के बीच परीक्षा रद्द किए जाने से छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। इस पूरे विवाद ने साल 2024 के नीट पेपर लीक मामले की यादें ताजा कर दी हैं, जब परीक्षा की पारदर्शिता, रिजल्ट और ग्रेस मार्क्स को लेकर देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हुआ था। उस समय भी सीकर का नाम लगातार चर्चा में रहा था और अब 2026 के विवाद में भी जांच एजेंसियों की नजर इस जिले पर टिकी हुई है।
साल 2024 की नीट यूजी परीक्षा देश की सबसे विवादित मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक बन गई थी। परीक्षा के बाद आरोप लगे थे कि कई छात्रों को एग्जाम से पहले ही प्रश्न पत्र मिल गया था। बिहार पुलिस ने शुरुआती जांच शुरू की थी, जिसके बाद मामला केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई तक पहुंच गया। जांच के दौरान कई गिरफ्तारियां भी हुई थीं। आरोप था कि कुछ छात्रों ने 30 से 50 लाख रुपये तक देकर पेपर खरीदा था।
जब परीक्षा का रिजल्ट जारी हुआ तो पूरे देश में हैरानी फैल गई। पहली बार ऐसा हुआ कि 67 छात्रों को ऑल इंडिया रैंक 1 मिली। इससे पहले नीट के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में टॉपर्स कभी नहीं आए थे। 1400 से ज्यादा परीक्षा केंद्रों से हजारों छात्रों के 700 से अधिक अंक आए। इससे छात्रों और शिक्षकों के बीच परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।
NEET 2024 में कई छात्रों के 718 और 719 जैसे अंक सामने आए थे, जिन्हें सामान्य अंक प्रणाली के हिसाब से संभव नहीं माना गया। इसके बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने सफाई दी थी कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर समय बर्बाद होने के कारण प्रभावित छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे।
हालांकि इस फैसले का देशभर में भारी विरोध हुआ। छात्रों ने आरोप लगाया कि ग्रेस मार्क्स की वजह से मेरिट और कटऑफ पूरी तरह प्रभावित हो गई। बाद में NTA ने ग्रेस मार्क्स वापस लेने का फैसला किया और संबंधित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। री-एग्जाम और ग्रेस मार्क्स हटने के बाद 720 में से 720 अंक पाने वाले छात्रों की संख्या घटकर 17 रह गई थी।
इसके बावजूद 2024 में हाई स्कोर करने वाले छात्रों की संख्या इतनी ज्यादा रही कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों की कटऑफ रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। कई अच्छे अंक लाने वाले छात्रों को भी सरकारी MBBS सीट नहीं मिल सकी।
राजस्थान का सीकर पिछले कुछ वर्षों में देश के बड़े कोचिंग हब के रूप में तेजी से उभरा है। कोटा के बाद अब सीकर को मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षाओं की तैयारी का नया केंद्र माना जाने लगा है। यहां के कोचिंग संस्थानों का रिजल्ट लगातार बेहतर रहा है और बड़ी संख्या में छात्र NEET और JEE जैसी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं।
लेकिन 2024 के नीट विवाद के दौरान सीकर अचानक सवालों के घेरे में आ गया था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील नरेंद्र हुड्डा ने आंकड़ों के आधार पर दावा किया था कि देश में औसतन एक सेंटर से चयन प्रतिशत बेहद कम है, जबकि अकेले सीकर में यह आंकड़ा असामान्य रूप से बहुत ज्यादा था।
उन्होंने अदालत में बताया था कि NEET 2024 में 500 से अधिक अंक पाने वाले छात्रों वाले देश के टॉप 100 परीक्षा केंद्रों में से 71 राजस्थान के थे और इनमें 46 केंद्र अकेले सीकर के थे। उनके मुताबिक सीकर में 700 से ज्यादा अंक पाने वाले 8 छात्र, 650 से अधिक अंक पाने वाले 69 छात्र और 600 से अधिक अंक पाने वाले 115 छात्र थे। इन आंकड़ों ने परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर बहस और तेज कर दी थी।
अब NEET UG 2026 विवाद में भी सीकर का नाम सामने आने से नया विवाद खड़ा हो गया है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG इस मामले की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कथित ‘लीक गेस पेपर’ का नेटवर्क सीकर से जुड़ा हुआ था।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह गेस पेपर केरल से होते हुए राजस्थान और अन्य राज्यों तक पहुंचा। सीकर, झुंझुनूं, चूरू, नागौर और देहरादून तक इसके तार जुड़े होने की बात सामने आई है। जांच में सीकर के पीपराली रोड पर कंसल्टेंसी चलाने वाले राकेश मंडावरिया का नाम मुख्य किरदार के रूप में सामने आया है। बताया जा रहा है कि उसे अप्रैल में ही कथित गेस पेपर मिल गया था।
जांच में यह भी सामने आया कि केरल में MBBS की पढ़ाई कर रहे चूरू के एक छात्र को प्रश्नों की पीडीएफ सीकर से भेजी गई थी। छात्र के पिता सीकर में पीजी हॉस्टल चलाते हैं। आरोप है कि वहीं से यह सामग्री अन्य छात्रों और करियर काउंसलर्स तक पहुंची और फिर बड़े स्तर पर फैल गई।
राजस्थान SOG की शुरुआती जांच में सामने आया कि कई छात्रों के पास जो गेस पेपर मिला था, उसमें बड़ी संख्या में वही सवाल थे जो असली परीक्षा में पूछे गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक 720 अंकों में से लगभग 600 अंकों के सवाल इसी गेस पेपर से जुड़े बताए जा रहे हैं। करीब 120 से 140 प्रश्न हूबहू परीक्षा में आने का दावा किया गया है।
बताया जा रहा है कि परीक्षा के दिन कुछ छात्रों ने सीकर के उद्योग नगर थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन उस समय मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। बाद में छात्रों ने सबूतों के साथ NTA को ईमेल भेजा, जिसके बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं।
NEET 2024 और 2026 दोनों विवादों में सीकर का नाम सामने आने से अब इस जिले की कोचिंग व्यवस्था और परीक्षा केंद्रों की निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि अभी जांच जारी है और एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है, लेकिन लगातार दूसरे बड़े विवाद में सीकर का नाम आने से देशभर के छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है।
अब सभी की नजर जांच एजेंसियों और सरकार के अगले कदम पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और भरोसे को कैसे बहाल किया जाएगा।
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