NEET री एग्जाम रिजल्ट 2026 को लेकर नया विवाद सामने आया है। महाराष्ट्र के छात्र ने 522 की जगह 95 और मध्य प्रदेश के छात्र ने 305 की जगह 64 अंक मिलने का दावा किया है। दोनों मामलों पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है।

नीट यूजी री एग्जाम 2026 के रिजल्ट को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। इस बार महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के दो छात्रों ने अलग-अलग उच्च न्यायालयों का दरवाजा खटखटाया है। दोनों छात्रों का दावा है कि उनकी आधिकारिक ओएमआर शीट और एनटीए की उत्तर कुंजी के आधार पर उनके अंक घोषित रिजल्ट से कहीं अधिक बन रहे हैं। छात्रों का कहना है कि रिजल्ट में गंभीर गड़बड़ी हुई है, जिसके कारण उन्हें वास्तविक अंकों से काफी कम अंक दिए गए हैं। इन मामलों के सामने आने के बाद एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए की मूल्यांकन प्रक्रिया और रिजल्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
महाराष्ट्र के बीड जिले के रहने वाले छात्र सोहम नितिन गावते ने मुंबई हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ में याचिका दायर की है। छात्र का कहना है कि आधिकारिक ओएमआर शीट और उत्तर कुंजी के अनुसार उन्होंने कुल 148 प्रश्न हल किए थे, जिनमें 136 उत्तर सही और 12 उत्तर गलत थे। नीट की मार्किंग स्कीम के अनुसार उनके 720 में से 522 अंक बनने चाहिए थे, लेकिन एनटीए द्वारा जारी स्कोरकार्ड में उन्हें केवल 95 अंक दिए गए।
छात्र का यह भी कहना है कि उन्होंने 17 और 18 जुलाई को ईमेल के माध्यम से एनटीए से शिकायत की थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया। इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है।
मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के छात्र लोकेन्द्र सिंह खड़िया ने भी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में याचिका दाखिल की है। उनका दावा है कि आधिकारिक ओएमआर शीट और उत्तर कुंजी के अनुसार उनके 305 अंक बनते हैं, जबकि घोषित परिणाम में उन्हें केवल 64 अंक दिए गए हैं। छात्र ने अदालत से मामले की जांच कराने और सही परिणाम जारी करने की मांग की है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से एक सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 28 जुलाई तय कर दी है। अब इस मामले में सरकार और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी।
लोकेन्द्र सिंह खड़िया की ओर से पेश अधिवक्ता ने केवल अंकों में कथित गड़बड़ी का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कानूनी स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। याचिका में कहा गया है कि एनटीए संसद द्वारा स्थापित कोई वैधानिक संस्था नहीं है, बल्कि यह सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत एक सोसायटी है। ऐसे में इसकी संवैधानिक और कानूनी वैधता की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए।
इससे पहले भी कई छात्रों ने नीट यूजी री एग्जाम के परिणाम को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं। कुछ छात्रों ने उम्मीद से कम अंक मिलने का आरोप लगाया था, जबकि कुछ ने ओएमआर शीट से छेड़छाड़ या गलत शीट दिए जाने का दावा किया था। हालांकि, एनटीए ने उन सभी आरोपों को पहले ही खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया था।
गौरतलब है कि नीट यूजी 2026 की मूल परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। बाद में प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के चलते परीक्षा रद्द कर दी गई। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई और 16 जुलाई को परिणाम घोषित किए गए। अब दो अलग-अलग राज्यों के छात्रों द्वारा रिजल्ट में कथित विसंगति का मामला हाईकोर्ट पहुंचने से परीक्षा प्रक्रिया और मूल्यांकन प्रणाली को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और सरकार के जवाब पर सभी की नजर रहेगी।
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