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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की है कि अगले साल से NEET UG परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी CBT मोड में आयोजित की जाएगी।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की है कि अगले साल से NEET UG परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी। अब तक यह परीक्षा ऑफलाइन पेन-पेपर मोड में होती थी लेकिन पेपर लीक विवाद और परीक्षा में गड़बड़ियों के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इस बदलाव के बाद अब छात्र यह जानना चाहते हैं कि क्या NEET परीक्षा भी CUET और JEE Main की तरह ऑनलाइन होगी और इससे परीक्षा प्रक्रिया में क्या फर्क पड़ेगा।
हाल ही में NEET UG परीक्षा पेपर लीक मामले ने पूरे देश में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। लाखों छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। इसी को देखते हुए सरकार ने परीक्षा प्रणाली में बदलाव करने का फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि, सरकार निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका कहना है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और योग्य छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
शिक्षा मंत्री के अनुसार, अगले साल से NEET UG परीक्षा CBT मोड में कराई जाएगी। इसका मतलब यह है कि छात्रों को परीक्षा केंद्र पर कंप्यूटर के जरिए प्रश्न हल करने होंगे। यह व्यवस्था पहले से CUET और JEE Main जैसी बड़ी परीक्षाओं में लागू है। माना जा रहा है कि ऑनलाइन परीक्षा होने से पेपर लीक जैसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी।
ऑनलाइन मोड आने के बाद छात्रों की तैयारी का तरीका भी थोड़ा बदल सकता है। अब केवल विषय की तैयारी ही नहीं बल्कि कंप्यूटर पर परीक्षा देने की प्रैक्टिस भी जरूरी होगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि CBT मोड छात्रों के लिए ज्यादा सुविधाजनक साबित हो सकता है क्योंकि इसमें रिजल्ट और प्रक्रिया दोनों तेज हो जाती हैं। साथ ही परीक्षा की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकती है।
शिक्षा मंत्री ने यह भी साफ कर दिया है कि NEET UG री-एग्जाम 21 जून को आयोजित किया जाएगा। यह परीक्षा उन परिस्थितियों के बाद दोबारा कराई जा रही है जब 3 मई को हुई परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। सरकार और NTA ने जांच के बाद फैसला लिया कि छात्रों को निष्पक्ष मौका देने के लिए परीक्षा दोबारा आयोजित की जाए।
सरकार ने बताया कि 7 मई को पेपर लीक को लेकर गंभीर शिकायतें मिली थीं। इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि कथित ‘गेस पेपर नेटवर्क’ के जरिए प्रश्न पत्र लीक किया गया था। अब इस मामले की जांच एजेंसियां लगातार कर रही हैं और सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सरकार की कोशिश है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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