खरीफ सीजन की बुवाई के साथ ही देश के कई राज्यों में नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों का कारोबार एक बार फिर किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

New Delhi News : खरीफ सीजन की बुवाई के साथ ही देश के कई राज्यों में नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों का कारोबार एक बार फिर किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ के 18 जिलों में हजारों किसानों ने शिकायत की है कि महंगे दाम पर खरीदे गए सोयाबीन और अन्य फसलों के बीज बोने के 15 से 25 दिन बाद भी अंकुरित नहीं हुए। इसके चलते किसानों को दोबारा बुवाई की नौबत आ गई है और आर्थिक संकट गहरा गया है। राज्य सरकार ने कई बीज कंपनियों की जांच शुरू कर दी है और शिकायतों के निस्तारण के लिए नई व्यवस्था लागू की है।
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मराठवाड़ा और विदर्भ के कई जिलों से अब तक 5,000 से अधिक किसानों ने पुलिस, कृषि विभाग और प्रशासन के पास शिकायत दर्ज कराई है। किसानों का आरोप है कि नामी कंपनियों के नाम पर बेचे गए बीज अंकुरित नहीं हुए, जिससे उनकी पूरी बुवाई प्रभावित हो गई। कृषि विभाग ने कई कंपनियों के बीजों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे हैं और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही है। New Delhi News
नकली बीजों की समस्या केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और तेलंगाना सहित कई राज्यों में भी समय-समय पर नकली या घटिया गुणवत्ता वाले बीजों की बिक्री के मामले सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने बीज उत्पादन से लेकर वितरण तक निगरानी बढ़ाने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं, ताकि किसानों तक नकली बीज पहुंचने से रोका जा सके।
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नकली बीज बेचने वाले गिरोह किसानों को ठगने के लिए कई तरीके अपनाते हैं।
इसी वजह से किसान अक्सर असली और नकली बीज में अंतर नहीं कर पाते।
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नकली बीजों का सबसे बड़ा असर फसल की अंकुरण क्षमता पर पड़ता है। कई बार बीज उगते ही नहीं हैं या पौधे कमजोर निकलते हैं। ऐसे में किसान को दोबारा बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर खर्च करना पड़ता है। जिन किसानों ने खेती के लिए कर्ज लिया होता है, उनके ऊपर आर्थिक बोझ कई गुना बढ़ जाता है। सोयाबीन, कपास, मूंगफली, धान, बाजरा और सब्जियों के हाईब्रिड बीजों में इस तरह की शिकायतें अधिक सामने आती हैं।
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केंद्र सरकार भी नकली बीज और नकली कीटनाशकों के खिलाफ कड़े कानूनों की जरूरत पर जोर दे रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए नकली बीज और कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। महाराष्ट्र सरकार ने भी शिकायत निवारण समितियों का पुनर्गठन किया है। अब तहसील स्तर पर शिकायतों की जांच होगी और बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खेतों का निरीक्षण कराया जाएगा।
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कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि वे केवल लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही बीज खरीदें। खरीदारी का पक्का बिल जरूर लें, पैकेट पर बैच नंबर, लॉट नंबर, प्रमाणन टैग, अंकुरण प्रतिशत और पैकिंग की तारीख की जांच करें। बीज का पैकेट खोलने से पहले उसकी फोटो सुरक्षित रखें और यदि बीज नकली होने का संदेह हो तो तुरंत जिला कृषि अधिकारी या कृषि विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि नकली बीज केवल किसानों की फसल ही नहीं, बल्कि देश की कृषि अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा हैं। एक सीजन की खराब बुवाई किसान की पूरी सालभर की आय पर असर डाल सकती है। इसलिए विशेषज्ञ बीज वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, डिजिटल ट्रैकिंग और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई को समय की सबसे बड़ी जरूरत मान रहे हैं।
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